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5 साल से फाइलों में अटका ग्रेनो वेस्ट का सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट
अरविंद सिंह, अमर उजाला, ग्रेटर नोएडा
Updated Wed, 08 Aug 2018 04:00 AM IST
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ढाई लाख फ्लैट बन रहे हैं और 10 लाख आबादी रहने आएगी, लेकिन एसटीपी (सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट) के नाम पर कुछ भी नहीं। बरसाती पानी के लिए बने नालों में गिराई जा रही गंदगी, यह हाल है ग्रेटर नोएडा वेस्ट का।
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ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण ने 2008 से 2010 के बीच में ग्रेटर नोएडा वेस्ट में इतनी जमीन बिल्डरों को आवंटित कर दी है कि उनमें ढाई लाख फ्लैट बन रहे हैं। एक फ्लैट में चार परिवार के हिसाब से करीब 10 लाख आबादी यहां रहेगी। इस आबादी की सीवेज कहां जाएगा, इसका पता नहीं है।
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यही वजह है कि ग्रेटर नोएडा वेस्ट में स्थित सोसायटियों में वर्तमान समय में करीब एक लाख आबादी रहती है। इनका सीवेज बरसाती पानी के लिए बने नालों में गिराया जा रहा है। 60 मीटर रोड पर बने नाले को देखकर इसका अंदाजा लगाया जा सकता है।
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बीते समय हुई तेज बारिश के दौरान गंदा पानी सड़कों पर आ रहा था। इससे आसपास के लोगों को उस रास्ते से आने-जाने में बहुत परेशानी हुई। यही हाल बाकी सोसायटियों के आसपास का भी दिखा। 2013 में प्राधिकरण ने हिंडन किनारे 246 एमएलडी का एसटीपी प्लान किया। जमीन भी चिह्नित कर ली गई, लेकिन प्लांट सिर्फ कागजों में ही रह गया। अभी तक वह एक कदम भी आगे नहीं बढ़ा है, जिससे आने वाले दिनों में यहां परेशानी बढ़ेगी।
प्राधिकरण ने बिल्डर के पाले में डाला एसटीपी
प्राधिकरण ने 2015 में एक प्रावधान बनाया कि सोसायटी में रहने वाले लोगों के लिए बिल्डर ही एसटीपी भी बनाएगा। कुछ बिल्डरों ने इसे मानते हुए एसटीपी बना भी दिए, लेकिन उसे चलाते नहीं है। बिजली व रखरखाव खर्च अधिक होने के कारण बिल्डर एसटीपी नहीं चलाते। सीवेज का पानी नालों में गिरा रहे हैं, लेकिन प्राधिकरण ने इस प्रावधान को बनाकर पल्ला झाड़ लिया है।
प्राधिकरण ने प्रावधान तो कर दिए, लेकिन कभी इसकी जांच नहीं की कि बिल्डर एसटीपी कितनी क्षमता का बना रहा है। बिल्डरों ने सिर्फ अप्रूवल लेने के लिए छोटा से एसटीपी बना दिए हैं, लेकिन कोई चला नहीं रहा। मैंने खुद कई जगह जाकर देखा है। लोग नाले में ही सीवेज गिरा रहे हैं। आने वाले दिनों में ग्रेटर नोएडा वेस्ट में बड़ी परेशानी होने वाली है। यही स्थिति रही तो बरसात में यहां महामारी फैलेगी। - अन्नू खान, अध्यक्ष नेफोमा
सभी बिल्डरों को सोसायटी के निवासियों के हिसाब से एसटीपी बनाने का प्रावधान है। अगर किसी ने नहीं बनाया है या फिर बनाने के बाद भी खर्च से बचने के लिए उसे नहीं चला रहे हैं तो उनकी जांच की जाएगी और उनके खिलाफ खिलाफ कार्रवाई भी की जाएगी। प्राधिकरण ने जो एसटीपी प्लान किया है, उसकी भी जानकारी लेकर प्रस्ताव को आगे बढ़ाया जाएगा।- बीके त्रिपाठी, एसीईओ ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण
प्राधिकरण ने 2015 में एक प्रावधान बनाया कि सोसायटी में रहने वाले लोगों के लिए बिल्डर ही एसटीपी भी बनाएगा। कुछ बिल्डरों ने इसे मानते हुए एसटीपी बना भी दिए, लेकिन उसे चलाते नहीं है। बिजली व रखरखाव खर्च अधिक होने के कारण बिल्डर एसटीपी नहीं चलाते। सीवेज का पानी नालों में गिरा रहे हैं, लेकिन प्राधिकरण ने इस प्रावधान को बनाकर पल्ला झाड़ लिया है।
प्राधिकरण ने प्रावधान तो कर दिए, लेकिन कभी इसकी जांच नहीं की कि बिल्डर एसटीपी कितनी क्षमता का बना रहा है। बिल्डरों ने सिर्फ अप्रूवल लेने के लिए छोटा से एसटीपी बना दिए हैं, लेकिन कोई चला नहीं रहा। मैंने खुद कई जगह जाकर देखा है। लोग नाले में ही सीवेज गिरा रहे हैं। आने वाले दिनों में ग्रेटर नोएडा वेस्ट में बड़ी परेशानी होने वाली है। यही स्थिति रही तो बरसात में यहां महामारी फैलेगी। - अन्नू खान, अध्यक्ष नेफोमा
सभी बिल्डरों को सोसायटी के निवासियों के हिसाब से एसटीपी बनाने का प्रावधान है। अगर किसी ने नहीं बनाया है या फिर बनाने के बाद भी खर्च से बचने के लिए उसे नहीं चला रहे हैं तो उनकी जांच की जाएगी और उनके खिलाफ खिलाफ कार्रवाई भी की जाएगी। प्राधिकरण ने जो एसटीपी प्लान किया है, उसकी भी जानकारी लेकर प्रस्ताव को आगे बढ़ाया जाएगा।- बीके त्रिपाठी, एसीईओ ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण