आम बजट ने आप सरकार के सामने पैदा की परेशानी
केंद्र की मोदी सरकार ने अपना दूसरा फुल बजट पेश कर दिया लेकिन दिल्ली में आम आदमी पार्टी सरकार के हाथ खाली हैं। पार्टी को जनता से किए वादे पूरे करने हैं तो खजाने का इंतजाम भी खुद ही करना पड़ेगा।
दिल्ली ने केंद्र सरकार ने अलग-अलग तरीके से 16 हजार करोड़ रुपये मांगे थे लेकिन महज 756 करोड़ रुपये मिले। ऐसे में वादे पूरे करने के लिए पैसा जमा करने की चुनौती खजाना संभाल रहे मनीष सिसोदिया के सामने हैं।
उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया को 28-29 मार्च को दिल्ली का बजट पेश करना है। उसमें फ्री वाई-फाई दिल्ली, एक हजार लो फ्लोर एसी बसों की खरीद, एलिवेटेड बीआरटी कॉरिडोर, नल से पीने के पानी का नेटवर्क, नए स्कूल, कॉलेज निर्माण और एक हजार मोहल्ला क्लीनिक के अलावा अनधिकृत कॉलोनियों में सुविधाओं की चुनौती सामने है।
41,129 करोड़ रुपये जुटाना ही सरकार के लिए मुश्किल हो रहा है
वित्त वर्ष 2015-16 में 19 हजार करोड़ रुपये समेत 41,129 करोड़ रुपये जुटाना ही सरकार के लिए मुश्किल हो रहा है। रिवाइज बजट में यह राशि 3500 करोड़ रुपये कम की जाएगी। ऐसे में गैर योजना मद में बढ़ते खर्च और बड़े प्रोजेक्ट शुरू करने के लिए पैसे जुटाना आसान नहीं होगा। इन सबके बीच बिजली सब्सिडी, फ्री पानी को कायम रखना है।
दिल्ली सरकार का 2016-17 का बजट तैयार हो रहा है। ये बजट पिछले साल के मुकाबले बड़ी राशि की होगी। उस खर्च को पूरा करने के लिए बिना टैक्स बोझ या बिजली-पानी में दी जा रही छूट वापस लिए बिना आसान नहीं होगा। उम्मीद थी कि केन्द्र से कुछ राहत का पैगाम मिलेगा लेकिन ऐसा नहीं हुआ।
सिसोदिया का कहना है कि निश्चित रूप से केंद्र सरकार से पैकेज नहीं मिलने का असर दिल्ली पर पड़ेगा। अगर मोदी सरकार दिल्ली के लोगों के साथ सौतेला व्यवहार करेगी, अगर दिल्ली के लोगों को अपना मानकर बजट देती तो काफी कुछ होता। नहीं तो दिल्ली के लोगों से वैट व आबकारी या अन्य करों से जो आता है उससे प्लान करेंगे।