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जुर्माना लगाने से पहले लोगों को दीजिए कलर कोडेड स्टीकर लगाने का समय, हाईकोर्ट का दिल्ली सरकार को सुझाव
Thu, 24 Dec 2020 06:21 PM IST
पूजा त्रिपाठी
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
Published by: पूजा त्रिपाठी
Updated Thu, 24 Dec 2020 06:21 PM IST
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दिल्ली हाईकोर्ट
- फोटो : एएनआई
दिल्ली हाईकोर्ट ने गुरुवार को दिल्ली सरकार को सुझाव दिया है कि जनता पर नियमों के उल्लंघन के लिए 5500 का जुर्माना लगाने से पहले उन्हें गाड़ियों पर कलर कोडेड फ्युएल स्टीकर लगाने के लिए थोड़ा और समय दीजिए।
जस्टिस सिद्धार्थ मृदुल और तलवंत सिंह की खंडपीठ ने कहा कि दिल्ली सरकार को लोगों के बीच अफरा तफरी का माहौल नहीं पैदा करना चाहिए जिसका कुछ लोग गलत फायदा उठाएं। अदालत ने ये भी कहा कि सरकार ने जिस तरह से कलर कोडेड स्टिकर और एचएसआरपी के लिए अगस्त में विज्ञापन किए वह भी सही समय नहीं था।
अदालत ने दिल्ली कांग्रेस के अध्यक्ष अनिल कुमार की जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए ये बातें कहीं। अनिल चौधरी ने अपनी याचिका में यह आरोप लगाया है कि ओईएमएस लोगों से स्टीकर के लिए ज्यादा पैसे ले रही है और राजधानी में एचएसआरपी को भी अनिवार्य कर दिया गया है।
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अनिल कुमार के वकील सुनील फर्नांडीस ने अदालत में कहा कि दिल्ली सरकार की चालान की मुहिम ने उन लोगों के बीच भय का माहौल उत्पन्न कर दिया है जिनकी गाड़ियों पर कलर कोडेड स्टीकर और एचएसआरपी प्लेट नहीं लगी है कि कहीं उन्हें जुर्माना न भरना पड़ जाए।
दिल्ली सरकार के वकील सत्यकाम ने अदालत को बताया कि सरकार का स्टीकर और एसएसआरपी के रेट को तय करने से कोई लेना-देना नहीं है, सरकार सिर्फ इतना सुनिश्चित करना चाहती है थी कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन हो जिसमें सभी गाड़ियों पर इन दोनों चीजों के लगाने की बात कही गई है।
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जस्टिस सिद्धार्थ मृदुल और तलवंत सिंह की खंडपीठ ने कहा कि दिल्ली सरकार को लोगों के बीच अफरा तफरी का माहौल नहीं पैदा करना चाहिए जिसका कुछ लोग गलत फायदा उठाएं। अदालत ने ये भी कहा कि सरकार ने जिस तरह से कलर कोडेड स्टिकर और एचएसआरपी के लिए अगस्त में विज्ञापन किए वह भी सही समय नहीं था।
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अदालत ने दिल्ली कांग्रेस के अध्यक्ष अनिल कुमार की जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए ये बातें कहीं। अनिल चौधरी ने अपनी याचिका में यह आरोप लगाया है कि ओईएमएस लोगों से स्टीकर के लिए ज्यादा पैसे ले रही है और राजधानी में एचएसआरपी को भी अनिवार्य कर दिया गया है।
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अनिल कुमार के वकील सुनील फर्नांडीस ने अदालत में कहा कि दिल्ली सरकार की चालान की मुहिम ने उन लोगों के बीच भय का माहौल उत्पन्न कर दिया है जिनकी गाड़ियों पर कलर कोडेड स्टीकर और एचएसआरपी प्लेट नहीं लगी है कि कहीं उन्हें जुर्माना न भरना पड़ जाए।
दिल्ली सरकार के वकील सत्यकाम ने अदालत को बताया कि सरकार का स्टीकर और एसएसआरपी के रेट को तय करने से कोई लेना-देना नहीं है, सरकार सिर्फ इतना सुनिश्चित करना चाहती है थी कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन हो जिसमें सभी गाड़ियों पर इन दोनों चीजों के लगाने की बात कही गई है।
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने आप सरकार पर लगाया 350 करोड़ के घोटाले का आरोप
अपने इस जनहित याचिका में अनिल चौधरी ने अदालत से ये विनती भी की है कि वह दिल्ली सरकार को आदेश दे कि कलर कोडेड स्टीकर के लिए 12.15 रुपये लिए जाएं, जिसकी अनुमति है। अनिल चौधरी का कहना है कि वह अदालत के संज्ञान में लाना चाहते हैं कि कलर कोडेड स्टीकर की मदद से आप सरकार 350 करोड़ का घोटाला कर सकती है इसलिए तुरंत आदेश देकर इसे रोका जाए।
उनका कहना है कि जो स्टीकर 12.15 रुपये में मिलना चाहिए वो जबरन 141.60 रुपये में बेचा जा रहा है जो असल दाम से दस गुने से भी ज्यादा है। वह चाहते हैं कि कोर्ट इसका संज्ञान लेकर सरकार को निश्चित मूल्य में ही स्टीकर बेचने का निर्देश दे।
उनका कहना है कि जो स्टीकर 12.15 रुपये में मिलना चाहिए वो जबरन 141.60 रुपये में बेचा जा रहा है जो असल दाम से दस गुने से भी ज्यादा है। वह चाहते हैं कि कोर्ट इसका संज्ञान लेकर सरकार को निश्चित मूल्य में ही स्टीकर बेचने का निर्देश दे।