{"_id":"58825b0b4f1c1b701beff278","slug":"when-kids-meet-risky-oblivious-officer","type":"story","status":"publish","title_hn":"बच्चे करते हैं जोखिम भरा सफर, अफसर बेखबर","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
बच्चे करते हैं जोखिम भरा सफर, अफसर बेखबर
ब्यूरो, अमर उजाला /गाजियाबाद
Updated Sat, 21 Jan 2017 12:22 AM IST
विज्ञापन
ऑटो में स्कूल जाते बच्चे
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
एटा में हुए स्कूल बस हादसे के बाद भी स्कूल प्रबंधन और जिम्मेदार आला अफसर नहीं चेते। इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि जिले में तकरीबन 650 स्कूली बसें बिना फिटनेस के ही फर्राटा भर रही हैं। साथ ही क्षमता से ज्यादा बच्चों को भी बैठा रही हैं।
ऐसे में घर से स्कूल तक का बच्चों का यह सफर किसी जोखिम से कम नहीं है। खास बात यह है कि इन स्कूल संचालकों के खिलाफ आज तक कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई है।
इतना ही नहीं अभिभावक भी इसके लिए काफी हद तक जिम्मेदार हैं। कम किराए के चक्कर में प्राइवेट बसों, वैन और ऑटो से बच्चों को स्कूल भेजते है, जिनमें क्षमता से ज्यादा बच्चों को भरा जाता है।
विज्ञापन
जानकारी के मुताबिक आरटीओ में 1450 स्कूली बसें रजिस्टर्ड हैं, लेकिन इनमें से 800 को ही फिटनेस सर्टिफिकेट मिला है। बाकी की 650 बसें बिना फिटनेस की ही बच्चों को बैठाकर सड़कों पर फर्राटा भर रही हैं।
शुक्रवार को ‘अमर उजाला’ ने जायजा लिया तो बगैर फिटनेस के दौड़ रही इन बसों में क्षमता से ज्यादा बच्चे दिखाई दिए। कई मारुति वैन में तो बच्चे एक के ऊपर एक लदे नजर आए।
इस ओर न आरटीओ के अफसरों की नजर जा रही है और नहीं स्कूल प्रबंधन इसे गंभीरता से ले रहा है। दो दिन पहले एटा में हुए हादसे के बाद आरटीओ ने स्कूल प्रबंधनों पर कार्रवाई के लिए एसएसपी को पत्र लिखा है।
सुप्रीम कोर्ट की गाइड लाइन का पालन नहीं
गाजियाबाद में सीबीएसई बोर्ड से संबद्ध करीब 145, यूपी बोर्ड के 200 और सीआईएससीई के24 स्कूल हैं। इसके अलावा बेसिक शिक्षा विभाग से मान्यता प्राप्त सैकड़ों स्कूल हैं। स्कूल जाने वाले अधिकांश बच्चे ऐसे वाहनों का प्रयोग करते हैं, जो उनके लिए सुरक्षित नहीं हैं।
अभिभावक कम किराये के चक्कर में अपने बच्चों को रिक्शा, टेंपो, ऑटो, वैन और यहां तक की प्राइवेट बसों में भेजते हैं, जो सुप्रीम कोर्ट की गाइड लाइन का पालन नहीं करते हैं। मारुति वैन भी एलपीजी या सीएनजी वाली होती हैं, जिनकी फिटनेस जांच तक नहीं होती है।
शासन स्तर से बिना फिटनेस वाली बसों पर कार्रवाई के लिए जुर्माने के अलावा 50 रुपये प्रतिदिन के हिसाब से पेनाल्टी लगाई गई है। विभाग जल्द ही अभियान चलाकर कार्रवाई शुरू करेगा।
विश्वजीत सिंह, एआरटीओ
- फेडरेशन बसों के फिटनेस से संबंधित सर्कुलर निकालता रहता है। यदि कोई स्कूल प्रबंधन खुद ही बच्चों की जिंदगी से खिलवाड़ कर रहा है तो फेडरेशन भी कुछ नहीं कर सकता। तब जिला प्रशासन ही कार्रवाई करे।
सुभाष जैन, अध्यक्ष इंडिपेंडेंट स्कूल फेडरेशन
विज्ञापन
ऐसे में घर से स्कूल तक का बच्चों का यह सफर किसी जोखिम से कम नहीं है। खास बात यह है कि इन स्कूल संचालकों के खिलाफ आज तक कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई है।
विज्ञापन
इतना ही नहीं अभिभावक भी इसके लिए काफी हद तक जिम्मेदार हैं। कम किराए के चक्कर में प्राइवेट बसों, वैन और ऑटो से बच्चों को स्कूल भेजते है, जिनमें क्षमता से ज्यादा बच्चों को भरा जाता है।
विज्ञापन
जानकारी के मुताबिक आरटीओ में 1450 स्कूली बसें रजिस्टर्ड हैं, लेकिन इनमें से 800 को ही फिटनेस सर्टिफिकेट मिला है। बाकी की 650 बसें बिना फिटनेस की ही बच्चों को बैठाकर सड़कों पर फर्राटा भर रही हैं।
शुक्रवार को ‘अमर उजाला’ ने जायजा लिया तो बगैर फिटनेस के दौड़ रही इन बसों में क्षमता से ज्यादा बच्चे दिखाई दिए। कई मारुति वैन में तो बच्चे एक के ऊपर एक लदे नजर आए।
इस ओर न आरटीओ के अफसरों की नजर जा रही है और नहीं स्कूल प्रबंधन इसे गंभीरता से ले रहा है। दो दिन पहले एटा में हुए हादसे के बाद आरटीओ ने स्कूल प्रबंधनों पर कार्रवाई के लिए एसएसपी को पत्र लिखा है।
सुप्रीम कोर्ट की गाइड लाइन का पालन नहीं
गाजियाबाद में सीबीएसई बोर्ड से संबद्ध करीब 145, यूपी बोर्ड के 200 और सीआईएससीई के24 स्कूल हैं। इसके अलावा बेसिक शिक्षा विभाग से मान्यता प्राप्त सैकड़ों स्कूल हैं। स्कूल जाने वाले अधिकांश बच्चे ऐसे वाहनों का प्रयोग करते हैं, जो उनके लिए सुरक्षित नहीं हैं।
अभिभावक कम किराये के चक्कर में अपने बच्चों को रिक्शा, टेंपो, ऑटो, वैन और यहां तक की प्राइवेट बसों में भेजते हैं, जो सुप्रीम कोर्ट की गाइड लाइन का पालन नहीं करते हैं। मारुति वैन भी एलपीजी या सीएनजी वाली होती हैं, जिनकी फिटनेस जांच तक नहीं होती है।
शासन स्तर से बिना फिटनेस वाली बसों पर कार्रवाई के लिए जुर्माने के अलावा 50 रुपये प्रतिदिन के हिसाब से पेनाल्टी लगाई गई है। विभाग जल्द ही अभियान चलाकर कार्रवाई शुरू करेगा।
विश्वजीत सिंह, एआरटीओ
- फेडरेशन बसों के फिटनेस से संबंधित सर्कुलर निकालता रहता है। यदि कोई स्कूल प्रबंधन खुद ही बच्चों की जिंदगी से खिलवाड़ कर रहा है तो फेडरेशन भी कुछ नहीं कर सकता। तब जिला प्रशासन ही कार्रवाई करे।
सुभाष जैन, अध्यक्ष इंडिपेंडेंट स्कूल फेडरेशन