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मुसीबतों का पैदल सफर, खाना तक नहीं मयस्सर

Amarujala Local Bureau अमर उजाला लोकल ब्यूरो
Updated Fri, 27 Mar 2020 04:18 PM IST
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Trouble walking, not even food
बहादुरगढ़ हरियाणा से पैदल गाजियाबाद पहुंचे और हाथरस जाते हुए नरेश कुमार अपने परिवार के साथ  - फोटो : AMAR UJALA
प्रद्युम्न उपाध्याय गाजियाबाद। कोरोना वायरस के कारण दिल्ली-एनसीआर की फैक्ट्री-कारखानों में काम करने वाले लोगों और मजदूरों का मुसीबतों का सफर शुरू हो गया है। दिल्ली, गुरुग्राम, सोनीपत सहित गाजियाबाद की फैक्ट्रियों में काम करने वाले लोगों ने घरों की ओर पलायन शुरू कर दिया है। घरों से खाली पेट निकले लोग भूखे ही कई किलोमीटर का सफर कर गाजियाबाद पहुंचे। लेकिन दावों के विपरीत लोगों की सुविधा और खाने के कहीं इंतजाम दिखाई नहीं दिए। महानगर के प्रमुख दिल्ली-मेरठ रोड एक्सप्रेस-वे, दिल्ली-मेरठ हाईवे और लालकुआं से एनएच-91 पर पैदल घरों की ओर जाने वालों का रेला दिखाई दिया। सभी हाईवे और जीटी रोड पर लोगों की भारी भीड़ को नियंत्रित करने के लिए बड़ी संख्या में पुलिस फोर्स तो दिखाई दी। लेकिन लोगों की परेशानी को देखते हुए जिला प्रशासन के इंतजाम नदारद दिखे। घर जाने वालों में पुरुषों के अलावा महिला, बुजुर्ग और छोटे बच्चे भी नजर आए। लेकिन पैदल चलने की थकान और भूख के चलते उनके चेहरों पर साफ परेशानी दिखाई दी। कोरोना वायरस का भय लोगों के जहन में समां गया है। ऐसे में पैदल ही सफर तय करने वाले लोग मास्क या फिर मुंह पर कपड़ा लगाए चलते हुए दिखाई दिए। सबसे ज्यादा परेशानी छोटे बच्चों को उठानी पड़ी। भूख से परेशान बच्चे अपने परिजनों से खाने की गुहार लगाते दिखाई दिए। मजबूर परिजन उन्हें सांत्वना देते हुए नजर आए। -- यात्रियों की भारी भीड़, रोडवेज बसों की 10 फीसदी भी नहीं संख्या महानगर से बाहर जाने वाले सभी हाईवे, जीटी रोड व मार्गों पर लोगों की भारी भीड़ दिखाई दी। लोगों की परेशानी को देखते हुए कुछ रोडवेज बसें सड़कों पर जरूर दिखाई दी, लेकिन यात्रियों की भारी भीड़ को देखते हुए बसों की संख्या नाकाफी रही। जो बसें जाती हुई दिखाई दी, उनमें कई बसों में भी यात्री बस के अंदर के साथ बाहर नजर आए। लेकिन कई बसों में चालक और कंडक्टर ने सोशल डिस्टेंसिंग के नियम को पालन कराते हुए दिखाई दिए। यात्रियों की भारी भीड़ होने के कारण बस चालक व कंडक्टरों को परेशानी का सामना भी करना पड़ा। --- कोई तो करें हमारी परेशानी का समाधान 1. बहादुरगढ़ में मजदूरी करने वाले नरेश अपने दो छोटे बच्चों और पत्नी के साथ यूपी के हाथरस में घर जाने के लिए बृहस्पतिवार की शाम को चार बजे घर से निकले थे। पैदल गाजियाबाद पहुंचे नरेश व उनके परिवार का बुरा हाल था। बच्चे भूखे होने से परेशान थे। नरेश ने बताया कि मजदूरी का काम बंद होने के कारण घर जाने के अलावा दूसरा विकल्प नहीं बचा है। 2. ओखला दिल्ली से गाजियाबद पहुंचे इकबाल बदायूं के लिए सुबह तड़के घर से निकले। दोपहर करीब साढ़े बारह बजे गाजियाबाद पहुंचे इकबार काफी परेशान दिखाई दिए। उन्होंने कहा कि सभी होटल बंद होने से बृहस्पतिवार से खाना नहीं खाया है। कच्चा दूध पीकर घर से निकले थे। अब न तो बस मिल रही है। मैं बहुत परेशान हूं। 3. दिल्ली के जाफराबाद में सिलाई का काम करने वाले वसीम पैदल ही मुरादाबाद के लिए सुबह चार बजे घर से साथियों के संग निकले। सुबह साढ़े ग्यारह बजे गाजियाबाद पहुंचे वसीम को पैदल ही सफर तक करना पड़ा। आगे के सफर को पूरा करने का तनाव उनके चेहरे पर साफ नजर आया। 4. दिल्ली के जाफराबाद के एक बुटीक में काम करने वाले मुबारक अली पैदल ही मुरादाबाद जाते हुए दिखाई दिए। मुबारक अली ने बताया कि उनके साथ बुटीक में काम करने वाले सैकड़ों लोग पैदल ही अपने-अपने घरों के लिए निकले हैं। उन्हें न तो अब तक कोई बस मिली है। घर कब तक पहुंचेंगे, कोई अंदाजा नहीं है। 5. नोएडा से पत्नी मीनू के साथ गाजियाबाद के एम्स के कमलानेहरूनगर स्थित व्यसन केंद्र में आए मोहन को बीमारी में भी पैदल और साइकिल से सफर करना पड़ा। डॉक्टर का अप्वॉइंटमेंट होने के कारण वह जैसे-तैसे साइकिल से नोएडा से तो आ गए। लेकिन तबीयत खराब होने के कारण पैदल ही नोएडा की ओर जाते दिखाई दिए। ---
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