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हाउसिंग प्रोजेक्ट में आ चुकी सरकारी जमीन को लेंगे बिल्डर
ब्यूरो/अमर उजाला, गाजियाबाद
Updated Sat, 16 Jul 2016 01:09 AM IST
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- फोटो : अमर उजाला
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गाजियाबाद। चार साल बाद नगर निगम ने बिल्डरों के लिए लैंड एक्सचेंज का रास्ता फिर खोल दिया है। अब अपने हाउसिंग प्रोजेक्ट के बीच आ रही सरकारी जमीन को बिल्डर ले सकेंगे, लेकिन इसके बदले में उन्हें समान रेट की जमीन नगर निगम को देनी होगी।
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वर्ष 2012 में तत्कालीन नगर आयुक्त द्वारा बिना बोर्ड की स्वीकृति के लैंड एक्सचेंज किए जाने पर हुए बवाल के बाद से ऐसे मामलों पर रोक लगी हुई थी। अब सदन ने ऐसे मामलों को फिर से सैद्धांतिक सहमति दे दी है। ऐसे में नूरनगर, सिहानी, डूंडाहेड़ा समेत कई गांवों में लैंड एक्सचेंज के अटके मामले सुलझ सकते हैं।
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यह है नियम
नाली, चकरोड, बंजर नवैयत की ऐसी सरकारी जमीन जो बिल्डर प्रोजेक्ट के बीच आ गई हो और उसके लिए कोई रास्ता न हो तो बिल्डरों या संबंधित संस्था से लैंड एक्सचेंज की जा सकती है। नियम के मुताबिक बिल्डर को इन सभी जमीनों के बराबर एकमुश्त जमीन प्रोजेक्ट में ही मुख्य मार्ग पर देनी होगी।
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दोनों जमीनों की कीमत में 10 फीसदी से ज्यादा का अंतर नहीं होना चाहिए। लैंड एक्सचेंज से पहले नगर निगम कार्यकारिणी और बोर्ड से इसकी सहमति लेनी होगी। निगम से प्रस्ताव पास होने के बाद शासन से मंजूरी लेकर एसडीएम कोर्ट से लैंड एक्सचेंज की कार्रवाई पूरी हो सकती है।
ये मामले थे अटके
महेंद्रा एंड एसोसिएट्स प्रा. लिमिटेड की ओर से बोंझा में नगर निगम को लैंड एक्सचेंज का प्रस्ताव दिया गया था। यह प्रस्ताव वर्ष 2014-15 से अटका हुआ है। निपुन बिल्डर की ओर से निगम को 5270 वर्ग मीटर जमीन का एक्सचेंज करने का प्रस्ताव दिया हुआ है।
पसौंडा के खसरा नंबर- 1723 और 1725 की यह जमीन बिल्डर अपने हाउसिंग प्रोजेक्ट में लेना चाहता है। इसके बदले वह समान सेक्टर रेट की जमीन दूसरी जगह देने को तैयार है। एक सहकारी आवास समिति ने भी नगर निगम को लैंड एक्सचेंज का प्रस्ताव दे रखा है।
इसके अलावा राजनगर एक्सटेंशन की वीवीआईपी होम प्राइवेट लिमिटेड की ओर से 2808 वर्ग मीटर जमीन का एक्सचेंज करने का प्रस्ताव दिया गया है। हालांकि बिल्डर की ओर से एनओसी मिलने से पहले ही निगम की जमीन पर निर्माण कर लिया गया है और इसके बदले जमीन अलग छोड़ दी गई है।
निगम को भी होगा फायदा
लैंड एक्सचेंज से बिल्डरों को ही नहीं नगर निगम को भी फायदा होगा। बिल्डर के प्रोजेक्ट में टुकड़ों में मौजूद जमीन एक जगह मिलने पर नगर निगम इसमें अपना कोई हाउसिंग या कामर्शियल प्रोजेक्ट ला सकता है। इस जमीन का उपयोग सामुदायिक सुविधाओं के लिए भी किया जा सकता है।
लैंड एक्सचेंज को बोर्ड से सहमति मिल गई है। बिल्डर को न केवल एकमुश्त समान दर की जमीन देनी होगी, उसकी बाउंड्रीवाल भी करानी होगी। बिल्डरों से डिटेल प्रस्ताव मिलने पर इसे कार्यकारिणी और सदन से पास कराकर शासन को भेजा जाएगा। सभी औपचारिकताएं पूरी होने पर ही लैंड एक्सचेंज के लिए एनओसी दी जाएगी। - अब्दुल समद, नगर आयुक्त