{"_id":"581f6ed24f1c1bf67eb3766e","slug":"smog-in-the-homes-of-people-imprisoned","type":"story","status":"publish","title_hn":"स्मॉग ने लोगों को घरों में किया कैद","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
स्मॉग ने लोगों को घरों में किया कैद
ब्यूरो , अमर उजाला गाजियाबाद
Updated Sun, 06 Nov 2016 11:26 PM IST
विज्ञापन
स्मॉग
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
वीकेंड पर भी शहर को स्मॉग से राहत नहीं मिली। रविवार को भी शहर धुंध और धुएं की ‘चादर’ में लिपटा रहा। इसकी वजह से रविवार को मॉल्स-मल्टीप्लेक्स में भीड़ कम रही। लोग बच्चों को लेकर घरों से बाहर निकलने से बचते रहे। दूसरी ओर, ट्रेनों और बसों में भी यात्रियों की संख्या कम रही।
विज्ञापन
रविवार को सुबह स्मॉग कम रहा, लेकिन हवा की गति कम होने की वजह से दिन चढ़ने के साथ-साथ प्रदूषण भी बढ़ता गया। दोपहर तक पूरे शहर में धुंध और धुएं की एक सफेद ‘चादर’ जैसी परत और मजबूत हो गई। आबोहवा में घुल रहे इसी ‘जहर’ के कारण वायु प्रदूषण खतरनाक स्तर तक पहुंच गया है।
विज्ञापन
इसके दुष्परिणाम भी सामने आने लगे हैं। अधिकांश लोग गले, आंख और नाक के इंफेक्शन की चपेट में आ रहे हैं। बीते कई वर्षों में ऐसे हालात पहली बार हुए हैं कि स्मॉग की परत की वजह से लोगों का सड़कों पर निकलना मुश्किल हो गया हो। लोग खुद भी एहतियात बरत रहे हैं।
विज्ञापन
यही वजह रही कि वीकेंड पर भीड़ से गुलजार रहने वाले मॉल्स और मल्टीप्लेक्स में भी इस बार अन्य रविवार की अपेक्षा लोगों की संख्या कम रही। केवल वही लोग मॉल्स पहुंचे जिन्हें खरीदारी करनी थी। घूमने-सैर सपाटे के लिए मॉल्स-मल्टीप्लेक्स पहुंचने वाले अधिकांश लोग इस रविवार घरों से ही नहीं निकले।
ऑप्यूलेंट मॉल के मैनेजर रवीश त्यागी का कहना है कि इस रविवार मॉल में फुट फॉल कम रहा। इसका एक कारण स्मॉग भी है। मॉल में बच्चों की संख्या भी रविवार को बेहद कम रही।
स्मॉग के सबसे ज्यादा दिक्कत दुपहिया वाहन चालकों और पैदल यात्रियों को झेलनी पड़ रही हैं। फील्ड वर्क की नौकरी करने वाले लोगों को बाइक्स का इस्तेमाल करना पड़ रहा है, लेकिन हेल्मेट लगाने के बावजूद उन्हें स्मॉग से राहत नहीं मिल रही। रविवार को हालात यह रहे कि एक किलोमीटर बाइक चलाना भी लोगों के लिए मुश्किल हो रहा था।
आंखों में जलन और सांस लेने में दिक्कत हो रही थी।
हापुड़ से गाजियाबाद बाइक से आने के दौरान आंखों में इतनी जलन हुई कि बीच में कई जगह रुकना पड़ा। गले में खराश होने लगी। - शिब्बू, हापुड़ निवासी
काम की वजह से बाइक चलाना मजबूरी है, लेकिन तीन-चार दिनों से बड़ी मुश्किल हो रही है। हेल्मेट लगाने के बावजूद आंखों में जलन, पानी आने की दिक्कत हो रही है। - राजेश कुमार, कालका गढ़ी निवासी
स्मॉग के चलते रविवार को भी बसों और ट्रेनों में यात्रियों की संख्या कम रही। आमदिनों में जहां बस स्टैंड पर यात्रियों की संख्या अच्छी-खासी रहती थी, रविवार को बस अड्डा भी सूना सा रहा। रेलवे स्टेशन पर भी यात्रियों की संख्या में करीब 25 से 30 फीसदी गिरावट आई।
बच्चों को इंफेक्शन का खतरा ज्यादा
वायु प्रदूषण का खतरा बड़े लोगों से ज्यादा बच्चों को हो रहा है। बच्चों में रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होने की वजह से जल्द ही इंफेक्शन शुरू हो जाता है। वहीं मौसम बदलने की वजह से भी बच्चों में रोग प्रतिरोधक क्षमता कम हो रही है। ऐसे में उनका घरों से बाहर ज्यादा देर तक रहना परेशानी पैदा कर सकता है। वह बीमारी की चपेट में आ सकते हैं।