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...चलाकर पान की दुकान, अंजलि बनीं परिवार की शान

Sat, 25 Jun 2016 03:50 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो /गाजियाबाद
अमर उजाला ब्यूरो /गाजियाबाद Updated Sat, 25 Jun 2016 03:50 PM IST
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Sick father, daughter handled by family
पान की दुकान पर पढ़ाई करती अंजल‌ि - फोटो : अमर उजाला

मिसलगढ़ी में रहने वाली इंटर की एक छात्रा ने इलाके में मिसाल कायम की है। पिता के बीमार होने के बाद से ही पिछले करीब छह साल से वह न केवल अपनी पढ़ाई जारी रखे हुए है, बल्कि पान-बीड़ी की दुकान चलाकर पूरे परिवार का खर्च भी उठा रही है।

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अंजली नामक इंटर की इस छात्रा ने अपनी बड़ी बहन को पहले एलएलबी कराई और बाद में उसकी शादी भी करा दी। छोटा भाई भीं नौवीं कक्षा का स्टूडेंट है। दिन में अंबेडकर इंटर कॉलेज जाने वाली अंजली शाम चार बजे के बाद से अपनी दुकान पर जा बैठती है। घर का खर्च चलाने के लिए प्रतिदिन दुकान खोलती है और अपनी पढ़ाई भी वहीं पर करती है।
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हापुड़ रोड पर गोविंदपुरम स्थित पेट्रोल पंप के पास ही पान-बीड़ी की दुकान चलाने वाली अंजली ने बताया कि जब वह छोटी थी, तभी से अपने पिता नानकचंद के साथ इस दुकान पर रहती थी। करीब छह साल पहले उसके पिता दमा के रोगी हो गए। ऐसी हालत में दुकान पर बैठ नहीं पाते थे।
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परिवार के सामने दो जून की रोटी की समस्या बनी तो वह खुद ही दुकान पर बैठने लगी। शुरू में परिवार वालों ने उसे ऐसा करने से मना किया था, मगर इसके सिवाय कोई चारा नहीं था। ऐसे में तब से वह प्रतिदिन शाम से रात साढे़ 11 बजे तक दुकान पर बैठती है और यहीं पढ़ाई करती है।

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