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पर्यावरण के लिए ठीक नहीं इंटरलॉकिंग

Wed, 06 Jul 2016 12:21 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, गाजियाबाद
ब्यूरो/अमर उजाला, गाजियाबाद Updated Wed, 06 Jul 2016 12:21 AM IST
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Not good for the environment Interlocking
सड़क निर्माण कार्य - फोटो : अमर उजाला

गाजियाबाद। अब रोड किनारे या पार्कों में इंटरलॉकिंग टाइल्स बिछाने का काम मुश्किल होगा। जिला प्रशासन, जीडीए व नगर निगम ने इस बात पर संयुक्त रूप से सहमति जताई है कि इंटरलॉकिंग का उपयोग पर्यावरण के लिहाज से उचित नहीं है।

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इससे बरसात का पानी जमीन के अंदर नहीं जा पाता। इस संबंध में डीएम की अध्यक्षता वाली एक कमेटी ने एनजीटी को एक प्रस्ताव दिया है। एनजीटी इस पर 7 जुलाई को सुनवाई करेगी।
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पर्यावरण संरक्षक आकाश वशिष्ठ ने 2013 में पथरीकरण् ा(कंक्रीटाइजेशन) के खिलाफ एनजीटी में एक याचिका दायर की थी। इस पर एनजीटी ने प्रशासन को एक कमेटी बनाकर जल संरक्षण के नए मानक तैयार करने के आदेश दिए थे।
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गत साल 17 अगस्त को जिला प्रशासन, जीडीए व नगर निगम के अधिकारियों, आईआईटी दिल्ली के प्रोफेसर विश्वजीत भट्टाचार्य और आकाश वशिष्ठ की एक संयुक्त कमेटी बनाई गई थी। कमेटी ने अपनी रिपोर्ट सोमवार को एनजीटी में पेश की।

श्री वशिष्ठ ने बताया कि कमेटी द्वारा तैयार किए गए नए मानक के अनुसार रोड किनारे, पार्कों व तालाब के कोनों पर इंटरलॉकिंग टाइल्स नहीं बिछाई जाएंगी। जिन सड़कों पर फुटपाथ का प्रावधान है वहां टाइल्स या खड़ंजा लगाया जा सकता है लेकिन फुटपाथ डेढ़ मीटर से ज्यादा चौड़ी नहीं होगी।


जलाशयों, तालाबों, झीलों के चारों ओर इंटरलॉकिंग टाइल्स की जगह मिट्टी का पुश्ता उपयोग में लाया जाए। पार्क के सिर्फ पांच प्रतिशत हिस्से में ही दीवार, फव्वारा, जनसुविधा आदि का निर्माण हो। वशिष्ठ ने बताया कि कमेटी की इस रिपोर्ट पर एनजीटी 7 जुलाई को सुनवाई करेगी।

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