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Ghaziabad News: शहीद भगत सिंह की प्रतिमा ढकने पर भड़की भाजपा की अंदरूनी रार, पूर्व महापौर ने कसा तंज
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गाजियाबाद। शहीद-ए-आजम भगत सिंह की प्रतिमा के सामने लगाए गए राजनीतिक होर्डिंग्स को लेकर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के भीतर अंदरूनी सियासत और गुटबाजी एक बार फिर सरेआम हो गई है।
पूर्व महापौर आशु कुमार वर्मा ने सोशल मीडिया पर प्रतिमा के ढके होने पर कड़ा ऐतराज जताते हुए होर्डिंग लगाने वालों के खिलाफ ''''चाटुकार'''' शब्द का प्रयोग किया है। बिना किसी का नाम लिए सोशल मीडिया पर की गई इस पोस्ट के बाद स्थानीय भाजपा कार्यकर्ताओं और नेताओं के बीच खलबली मच गई है।
फेसबुक पोस्ट से उपजा विवाद
पूर्व महापौर आशु वर्मा ने अपने फेसबुक अकाउंट पर प्रतिमा के सामने लगे होर्डिंग्स और पोस्टरों की तस्वीरें साझा करते हुए लिखा कि देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ऐसे महान नेता हैं जो इस तरह के कृत्य को कभी पसंद नहीं करेंगे। उन्होंने आगे तंज कसते हुए लिखा कि यदि शीर्ष नेतृत्व को पता चला कि चाटुकारों ने शहीद-ए-आजम की प्रतिमा को ही होर्डिंग से ढक दिया है, तो उन्हें पार्टी से बाहर का रास्ता भी दिखाया जा सकता है।
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होर्डिंग्स में महापौर और महानगर अध्यक्ष के चित्र
जिन होर्डिंग्स और पोस्टरों को लेकर यह विवाद खड़ा हुआ है, उनमें वर्तमान महापौर सुनीता दयाल और भाजपा महानगर अध्यक्ष मयंक गोयल की तस्वीरें साफ नजर आ रही हैं। हालांकि, अपनी सफाई और पक्ष में पूर्व महापौर आशु वर्मा का कहना है कि उनकी यह टिप्पणी किसी व्यक्ति विशेष पर व्यक्तिगत हमला नहीं है, बल्कि शहीदों के सम्मान की रक्षा के लिए एक उठाई गई आवाज है।
महापौर ने दिया करारा जवाब
उधर, विवाद बढ़ने पर वर्तमान महापौर सुनीता दयाल ने पूरे मामले पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि वह स्वयं शहीदों की प्रतिमाओं के सामने अवैध रूप से होर्डिंग या बैनर लगाने के सख्त खिलाफ रही हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि करीब दो महीने पहले भी उन्होंने एक सार्वजनिक कार्यक्रम के मंच से स्पष्ट निर्देश दिए थे कि कोई भी कार्यकर्ता या व्यक्ति शहीदों की प्रतिमाओं को कवर करके बैनर नहीं लगाएगा।
महापौर ने कहा कि प्रतिमा के आगे यह विशिष्ट होर्डिंग किसने और किस मंशा से लगाया, इसकी जानकारी उन्हें नहीं है। ''''चाटुकार'''' कहे जाने के सवाल पर उन्होंने कहा कि कुछ लोग उनकी राजनीति, जनसेवा और महापौर के रूप में किए जा रहे विकास कार्यों से चिढ़ते हैं, इसीलिए इस तरह की अनर्गल बयानबाजी कर रहे हैं, जिसकी वह बिल्कुल परवाह नहीं करती हैं।
महानगर अध्यक्ष ने दी सफाई, हटवाया होर्डिंग
उधर, भाजपा महानगर अध्यक्ष मयंक गोयल ने भी पूरे मामले पर अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि उनकी या पार्टी की मंशा शहीदों के अपमान करने की बिल्कुल नहीं है। उन्होंने बताया कि यह होर्डिंग उनके द्वारा नहीं लगाया गया था, बल्कि किसी कार्यकर्ता ने देर रात इसे लगा दिया था। जैसे ही उन्हें सुबह प्रतिमा के सामने होर्डिंग लगे होने की जानकारी मिली, उन्होंने तत्काल संज्ञान लेते हुए सवेरे ही उसे वहां से हटवा दिया था। बावजूद, सोशल मीडिया पर शुरू हुई यह तनातनी फिलहाल संगठन के भीतर काफी चर्चा का विषय बनी हुई है।
पूर्व महापौर आशु कुमार वर्मा ने सोशल मीडिया पर प्रतिमा के ढके होने पर कड़ा ऐतराज जताते हुए होर्डिंग लगाने वालों के खिलाफ ''''चाटुकार'''' शब्द का प्रयोग किया है। बिना किसी का नाम लिए सोशल मीडिया पर की गई इस पोस्ट के बाद स्थानीय भाजपा कार्यकर्ताओं और नेताओं के बीच खलबली मच गई है।
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फेसबुक पोस्ट से उपजा विवाद
पूर्व महापौर आशु वर्मा ने अपने फेसबुक अकाउंट पर प्रतिमा के सामने लगे होर्डिंग्स और पोस्टरों की तस्वीरें साझा करते हुए लिखा कि देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ऐसे महान नेता हैं जो इस तरह के कृत्य को कभी पसंद नहीं करेंगे। उन्होंने आगे तंज कसते हुए लिखा कि यदि शीर्ष नेतृत्व को पता चला कि चाटुकारों ने शहीद-ए-आजम की प्रतिमा को ही होर्डिंग से ढक दिया है, तो उन्हें पार्टी से बाहर का रास्ता भी दिखाया जा सकता है।
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होर्डिंग्स में महापौर और महानगर अध्यक्ष के चित्र
जिन होर्डिंग्स और पोस्टरों को लेकर यह विवाद खड़ा हुआ है, उनमें वर्तमान महापौर सुनीता दयाल और भाजपा महानगर अध्यक्ष मयंक गोयल की तस्वीरें साफ नजर आ रही हैं। हालांकि, अपनी सफाई और पक्ष में पूर्व महापौर आशु वर्मा का कहना है कि उनकी यह टिप्पणी किसी व्यक्ति विशेष पर व्यक्तिगत हमला नहीं है, बल्कि शहीदों के सम्मान की रक्षा के लिए एक उठाई गई आवाज है।
महापौर ने दिया करारा जवाब
उधर, विवाद बढ़ने पर वर्तमान महापौर सुनीता दयाल ने पूरे मामले पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि वह स्वयं शहीदों की प्रतिमाओं के सामने अवैध रूप से होर्डिंग या बैनर लगाने के सख्त खिलाफ रही हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि करीब दो महीने पहले भी उन्होंने एक सार्वजनिक कार्यक्रम के मंच से स्पष्ट निर्देश दिए थे कि कोई भी कार्यकर्ता या व्यक्ति शहीदों की प्रतिमाओं को कवर करके बैनर नहीं लगाएगा।
महापौर ने कहा कि प्रतिमा के आगे यह विशिष्ट होर्डिंग किसने और किस मंशा से लगाया, इसकी जानकारी उन्हें नहीं है। ''''चाटुकार'''' कहे जाने के सवाल पर उन्होंने कहा कि कुछ लोग उनकी राजनीति, जनसेवा और महापौर के रूप में किए जा रहे विकास कार्यों से चिढ़ते हैं, इसीलिए इस तरह की अनर्गल बयानबाजी कर रहे हैं, जिसकी वह बिल्कुल परवाह नहीं करती हैं।
महानगर अध्यक्ष ने दी सफाई, हटवाया होर्डिंग
उधर, भाजपा महानगर अध्यक्ष मयंक गोयल ने भी पूरे मामले पर अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि उनकी या पार्टी की मंशा शहीदों के अपमान करने की बिल्कुल नहीं है। उन्होंने बताया कि यह होर्डिंग उनके द्वारा नहीं लगाया गया था, बल्कि किसी कार्यकर्ता ने देर रात इसे लगा दिया था। जैसे ही उन्हें सुबह प्रतिमा के सामने होर्डिंग लगे होने की जानकारी मिली, उन्होंने तत्काल संज्ञान लेते हुए सवेरे ही उसे वहां से हटवा दिया था। बावजूद, सोशल मीडिया पर शुरू हुई यह तनातनी फिलहाल संगठन के भीतर काफी चर्चा का विषय बनी हुई है।