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Ghaziabad News: डायरिया से बीमार बच्चों और बुजुर्गाें की बढ़ी संख्या

Ghaziabad Bureau गाजियाबाद ब्यूरो
Updated Sat, 06 Sep 2025 01:44 AM IST
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Increase in number of children and elderly people suffering from diarrhea
जिला अस्पताल की ओपीडी में उमड़ी मरीजों की भीड़। संवाद
गाजियाबाद। लगातार हो रही बरसात और वातावरण में बढ़ी नमी से जिले में डायरिया के मामलों में तेजी से इजाफा हो रहा है। एमएमजी अस्पताल में रोजाना 10 से 15 मरीज भर्ती हो रहे हैं। इनमें बड़ी संख्या बच्चों और बुजुर्गों की है। चिकित्सकों का कहना है कि बरसात के मौसम में दूषित पानी और संक्रमित खाद्य पदार्थों के सेवन से उल्टी-दस्त और पेट संबंधी बीमारियों का खतरा बढ़ा है। कमजोर प्रतिरोधक क्षमता वाले लोगों को इसका सबसे अधिक नुकसान हो रहा है।
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बैक्टीरिया की सक्रियता से बिगड़ रही स्वास्थ्य व्यवस्था
एमएमजी अस्पताल के वरिष्ठ फिजिशियन डॉ. संतराम वर्मा ने बताया कि बरसात के मौसम में जलभराव, गंदगी और नमी के कारण बैक्टीरिया व वायरस तेजी से सक्रिय हो जाते हैं। ऐसे में अगर लोग साफ-सफाई का ध्यान न रखें और खुले में बिक रहे खाद्य पदार्थों या संक्रमित पानी का सेवन करें, तो पेट की बीमारियों से ग्रसित होना तय है। डॉ. वर्मा ने कहा कि वर्तमान में अस्पताल में आने वाले मरीजों में बच्चों और बुजुर्गों की संख्या अधिक है क्योंकि इनकी प्रतिरोधक क्षमता अपेक्षाकृत कमजोर होती है।
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सड़क किनारे बिक रहे खाद्य पदार्थ खाने से बचें
फैमिली फिजिशियन एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. रमन कुमार का कहना है कि डायरिया से बचाव संभव है। लोग खानपान और सफाई को लेकर सतर्क रहें। उन्होंने कहा कि बरसात में सड़क किनारे मिलने वाले चाट, गोलगप्पे, कटे फल और ठंडे पेय पदार्थों से परहेज करना चाहिए। साथ ही पानी को उबालकर या फिल्टर करके ही पीना चाहिए। घर में बना ताजा खाना ही सबसे सुरक्षित होता है।
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तली-भुनी चीजों से करें परहेज, हल्का खाना खाएं
डॉ. रमन कुमार ने बताया कि इस मौसम में तली-भुनी चीजों से परहेज करना चाहिए। हल्का भोजन करें, जैसे खिचड़ी, दाल-चावल और हरी सब्जियां। दही, छाछ, नींबू पानी जैसे प्राकृतिक प्रोबायोटिक्स पेट को स्वस्थ रखने में मदद करते हैं। कटे फल, खासकर खुले में बिक रहे फल और सलाद का सेवन न करें। बाहर की आइसक्रीम, ठंडे पेय और मिलावटी जूस से दूरी बनाकर रखें।


स्वच्छता का रखें विशेष ध्यान
जिला सर्विलांस अधिकारी डॉ. राकेश गुप्ता का कहना है कि थोड़ी सी सतर्कता से इस बीमारी से बचा जा सकता है। घरों में साफ-सफाई बनाए रखें, बच्चों को गंदे पानी में खेलने से रोकें। अगर उल्टी-दस्त के लक्षण दिखें तो घरेलू इलाज के बजाय तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। समय रहते इलाज शुरू हो जाने पर डायरिया जैसे संक्रमण पर आसानी से काबू पाया जा सकता है।
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