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Ghaziabad News: सरकार की नीतियों में सुधार से आसान होगा उद्योग चलाना
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गाजियाबाद। एमएसएमई उद्यमियों ने केंद्र और प्रदेश सरकार के कार्यकाल में औद्योगिक विकास के लिए किए गए प्रयासों की सराहना करते हुए उद्योगों से जुड़ी व्यवस्थाओं में सुधार की मांग की है। उद्यमियों का कहना है कि सड़क, सुरक्षा और बिजली जैसी सुविधाओं से औद्योगिक विकास को गति मिली है लेकिन छोटे उद्योगों के सामने अब भी कई व्यावहारिक समस्याएं हैं। सरकार को ईज ऑफ डूइंग मैन्युफैक्चरिंग को प्राथमिकता देते हुए ऐसी बाधाएं दूर करनी चाहिए।
शुक्रवार को कई औद्योगिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और सीएक्यूएम की सख्त कार्रवाई, यूपीसीडा के नियमों और विकास शुल्क में असमानता का मुद्दा उठाया। मेरठ रोड औद्योगिक क्षेत्र में आयोजित बैठक में उद्यमियों ने कहा कि यूपीसीडा की अनुमति संबंधी जटिलताओं से उद्योगों का संचालन प्रभावित हो रहा है। उद्यमी अपने बेटे को भी उद्योग में पार्टनर या निदेशक बनाने में कठिनाइयां महसूस कर रहे हैं। वेयरहाउसिंग को उद्योग की श्रेणी में शामिल करने के बावजूद इसकी अनुमति नहीं मिलने से औद्योगिक भूमि का पूरा उपयोग नहीं हो पा रहा है।
यूपीसीडा और विकास प्राधिकरण के विकास शुल्क में अंतर से नाराज उद्यमी
उद्यमी संजीव सचदेव ने बताया कि यूपीसीडा औद्योगिक भूखंडों के नक्शे की स्वीकृति के लिए करीब 125 रुपये प्रति वर्गमीटर शुल्क लेता है, जबकि नगरीय विकास प्राधिकरणों में यही शुल्क ग्रामीण क्षेत्रों में 750 और शहरी क्षेत्रों में 2500 रुपये तक है। उन्होंने इसे शुल्क में बड़ी असमानता बताते हुए एक समान और तर्कसंगत व्यवस्था बनाने की मांग की। कहा कि इसको लेकर उद्यमियों में नाराजगी हैं। एमएसएमई में पंजीकृत दरअसल उद्योगपति नहीं बल्कि औद्योगिक किसान हैं।
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शिकायत निवारण तंत्र जरूरी
ऑल इंडिया मैन्युफैक्चरर्स ऑर्गेनाइजेशन यूपी स्टेट के अध्यक्ष उपेंद्र गोयल ने कहा कि एमएसएमई के लिए बीमार इकाइयों के पुनर्वासन की नीति बनाने, युवाओं को प्रोत्साहित करने के लिए औद्योगिक भूमि और शेड किराये पर उपलब्ध कराने और उद्यमियों की समस्याओं के समाधान के लिए राज्यस्तरीय समिति गठित करने की मांग भी की गई। उद्यमियों ने कहा कि प्रदेश में 96 लाख पंजीकृत एमएसएमई हैं, ऐसे में उनकी समस्याएं सुनने और निस्तारित करने के लिए प्रभावी शिकायत निवारण तंत्र जरूरी है। उन्होंने कहा कि सरकार की कई औद्योगिक घोषणाओं में व्यावहारिक पहलुओं का ध्यान नहीं रखा गया है। बंद फैक्ट्रियों के पुनर्विकास और औद्योगिक संपत्तियों के रक्त संबंधियों के नाम हस्तांतरण संबंधी प्रावधानों में भी स्पष्टता की जरूरत है। उद्यमियों ने मुख्यमंत्री और केंद्रीय पर्यावरण मंत्री से इन मुद्दों पर संवाद की पहल करने का आग्रह किया।
बैठक में उपेंद्र गोयल, हिंदू इकोनॉमिक फोरम गाजियाबाद चैप्टर के अध्यक्ष संजीव सचदेव, इंडस्ट्रियल एरिया मैन्युफैक्चरिंग एसोसिएशन के अध्यक्ष सुशील अरोड़ा, ऑल इंडिया मैटल फोर्जिंग एसोसिएशन के अध्यक्ष बृजेश अग्रवाल, उत्तर प्रदेश उद्यमी विकास संघ के अध्यक्ष मनोज शर्मा, उद्यमी संजीव गुप्ता, अनिल गर्ग, मंजीत सिंह, संजीव अरोड़ा, राजीव गुप्ता सहित अनेक उद्यमी मौजूद रहे।
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शुक्रवार को कई औद्योगिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और सीएक्यूएम की सख्त कार्रवाई, यूपीसीडा के नियमों और विकास शुल्क में असमानता का मुद्दा उठाया। मेरठ रोड औद्योगिक क्षेत्र में आयोजित बैठक में उद्यमियों ने कहा कि यूपीसीडा की अनुमति संबंधी जटिलताओं से उद्योगों का संचालन प्रभावित हो रहा है। उद्यमी अपने बेटे को भी उद्योग में पार्टनर या निदेशक बनाने में कठिनाइयां महसूस कर रहे हैं। वेयरहाउसिंग को उद्योग की श्रेणी में शामिल करने के बावजूद इसकी अनुमति नहीं मिलने से औद्योगिक भूमि का पूरा उपयोग नहीं हो पा रहा है।
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यूपीसीडा और विकास प्राधिकरण के विकास शुल्क में अंतर से नाराज उद्यमी
उद्यमी संजीव सचदेव ने बताया कि यूपीसीडा औद्योगिक भूखंडों के नक्शे की स्वीकृति के लिए करीब 125 रुपये प्रति वर्गमीटर शुल्क लेता है, जबकि नगरीय विकास प्राधिकरणों में यही शुल्क ग्रामीण क्षेत्रों में 750 और शहरी क्षेत्रों में 2500 रुपये तक है। उन्होंने इसे शुल्क में बड़ी असमानता बताते हुए एक समान और तर्कसंगत व्यवस्था बनाने की मांग की। कहा कि इसको लेकर उद्यमियों में नाराजगी हैं। एमएसएमई में पंजीकृत दरअसल उद्योगपति नहीं बल्कि औद्योगिक किसान हैं।
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शिकायत निवारण तंत्र जरूरी
ऑल इंडिया मैन्युफैक्चरर्स ऑर्गेनाइजेशन यूपी स्टेट के अध्यक्ष उपेंद्र गोयल ने कहा कि एमएसएमई के लिए बीमार इकाइयों के पुनर्वासन की नीति बनाने, युवाओं को प्रोत्साहित करने के लिए औद्योगिक भूमि और शेड किराये पर उपलब्ध कराने और उद्यमियों की समस्याओं के समाधान के लिए राज्यस्तरीय समिति गठित करने की मांग भी की गई। उद्यमियों ने कहा कि प्रदेश में 96 लाख पंजीकृत एमएसएमई हैं, ऐसे में उनकी समस्याएं सुनने और निस्तारित करने के लिए प्रभावी शिकायत निवारण तंत्र जरूरी है। उन्होंने कहा कि सरकार की कई औद्योगिक घोषणाओं में व्यावहारिक पहलुओं का ध्यान नहीं रखा गया है। बंद फैक्ट्रियों के पुनर्विकास और औद्योगिक संपत्तियों के रक्त संबंधियों के नाम हस्तांतरण संबंधी प्रावधानों में भी स्पष्टता की जरूरत है। उद्यमियों ने मुख्यमंत्री और केंद्रीय पर्यावरण मंत्री से इन मुद्दों पर संवाद की पहल करने का आग्रह किया।
बैठक में उपेंद्र गोयल, हिंदू इकोनॉमिक फोरम गाजियाबाद चैप्टर के अध्यक्ष संजीव सचदेव, इंडस्ट्रियल एरिया मैन्युफैक्चरिंग एसोसिएशन के अध्यक्ष सुशील अरोड़ा, ऑल इंडिया मैटल फोर्जिंग एसोसिएशन के अध्यक्ष बृजेश अग्रवाल, उत्तर प्रदेश उद्यमी विकास संघ के अध्यक्ष मनोज शर्मा, उद्यमी संजीव गुप्ता, अनिल गर्ग, मंजीत सिंह, संजीव अरोड़ा, राजीव गुप्ता सहित अनेक उद्यमी मौजूद रहे।