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दुहाई में बनेगा हाईस्पीड ट्रेन का डिपो
ब्यूरो, अमर उजाला /गाजियाबाद
Updated Tue, 17 Jan 2017 12:52 AM IST
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हाई स्पीड ट्रेन
- फोटो : अमर उजाला
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रीजनल रैपिड ट्रांसपोर्ट सिस्टम (आरआरटीएस) के सरायकाले खां/निजामुद्दीन-मेरठ कॉरिडोर में यूपी क्षेत्र में हाईस्पीड ट्रेन के दो डिपो बनेंगे। इनमें एक डिपो गाजियाबाद के दुहाई में बनाया जाना तय हो गया है।
गाजियाबाद में हाईस्पीड ट्रेन का ट्रैक एलिवेटेड होगा, लेकिन डिपो एट ग्रेड लेवल (ग्राउंड लेवल) पर बनाया जाएगा। तीन चरणों में पूरा होने वाले हाईस्पीड ट्रेन के प्रोजेक्ट का सबसे पहला चरण गाजियाबाद में शुरू होगा और यह 2023 तक पूरा हो जाएगा।
92.05 किलोमीटर लंबे सरायकाले खां-मेरठ हाईस्पीड ट्रेन कोरिडोर में कुल 17 स्टेशन होंगे। इनमें से सात स्टेशन गाजियाबाद क्षेत्र में होंगे। हाईस्पीड ट्रेन का ट्रैक कौशांबी एलिवेटेड हो जाएगा और गाजियाबाद क्षेत्र में पिलर्स पर ही रहेगा।
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लेकिन दुहाई में बनने वाला डिपो ग्राउंड लेवल पर रहेगा। एनसीआरटीसी (नेशनल कैपिटल रीजन ट्रांसपोर्ट कारपोरेशन) ने जो रिवाइज्ड डीपीआर (डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट) शासन को भेजी है, उसमें इसका जिक्र किया गया है।
हाईस्पीड ट्रेन के डिपो के लिए शासन स्तर पर जमीन उपलब्ध कराई जाएगी। मुमकिन है कि इसके लिए कुछ किसानों से भी जमीन खरीदी जाए। डीपीआर में जमीन की खरीद के लिए भी फंड के इंतजाम किए गए हैं।
दुहाई के अलावा अलावा मेरठ में भी एक डिपो बनाया जाएगा। सबसे पहले कौशांबी के पैसिफिक मॉल के पास से परतापुर तक 38 किलोमीटर लंबे रूट का निर्माण शुरू होगा।
अतिरिक्त कोच रहेंगे डिपो में
दुहाई और मेरठ में बनने वाले डिपो में हाईस्पीड ट्रेन के अतिरिक्त कोच रहेंगे। इसके अलावा मेंटेनेंस का काम भी डिपो में किया जाएगा। हालांकि डीपीआर में इसकी डिटेल नहीं दी गई है, लेकिन माना जा रहा है कि ऑफ टाइम में ट्रेनों की संख्या रूट पर कम करके डिपो में लाई जाएंगी ओर पीक टाइम में रूट पर ट्रेनों की संख्या बढ़ा दी जाएगी।
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एक नजर में हाईस्पीड ट्रेन का प्रोजेक्ट
कुल लंबाई 90 किलोमीटर
स्टेशन की संख्या 17 (11 एलिवेटेड और 6 अंडरग्राउंड)
गाजियाबाद में स्टेशन की संख्या 07
ट्रेन में अधिकतम कोच 12
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हाईस्पीड ट्रेन की खासियत
. हवाई जहाज जैसी सीटें होंगी, हर 10 से 15 मिनट में मिलेगी ट्रेन
. प्रत्येक ट्रेन में 2400 पैसेंजर कर सकेंगे सफर
. आग लगने की दशा में तुरंत सूचना देने की तकनीक से लैस होगी ट्रेन।
. अचानक बिजली से संपर्क खत्म होने पर भी 90 मिनट तक ट्रेन में वेंटिलेशन की दिक्कत नहीं होगी।
. ओवरहेड वॉयर से बिजली मिलनी बंद होने पर तीन घंटे तक लाइट और उद्घोषणा उपकरण काम करेंगे
. ट्रेन एक सेकेंड में 1.3 मीटर की रफ्तार पकड़ लेगी।
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गाजियाबाद में हाईस्पीड ट्रेन का ट्रैक एलिवेटेड होगा, लेकिन डिपो एट ग्रेड लेवल (ग्राउंड लेवल) पर बनाया जाएगा। तीन चरणों में पूरा होने वाले हाईस्पीड ट्रेन के प्रोजेक्ट का सबसे पहला चरण गाजियाबाद में शुरू होगा और यह 2023 तक पूरा हो जाएगा।
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92.05 किलोमीटर लंबे सरायकाले खां-मेरठ हाईस्पीड ट्रेन कोरिडोर में कुल 17 स्टेशन होंगे। इनमें से सात स्टेशन गाजियाबाद क्षेत्र में होंगे। हाईस्पीड ट्रेन का ट्रैक कौशांबी एलिवेटेड हो जाएगा और गाजियाबाद क्षेत्र में पिलर्स पर ही रहेगा।
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लेकिन दुहाई में बनने वाला डिपो ग्राउंड लेवल पर रहेगा। एनसीआरटीसी (नेशनल कैपिटल रीजन ट्रांसपोर्ट कारपोरेशन) ने जो रिवाइज्ड डीपीआर (डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट) शासन को भेजी है, उसमें इसका जिक्र किया गया है।
हाईस्पीड ट्रेन के डिपो के लिए शासन स्तर पर जमीन उपलब्ध कराई जाएगी। मुमकिन है कि इसके लिए कुछ किसानों से भी जमीन खरीदी जाए। डीपीआर में जमीन की खरीद के लिए भी फंड के इंतजाम किए गए हैं।
दुहाई के अलावा अलावा मेरठ में भी एक डिपो बनाया जाएगा। सबसे पहले कौशांबी के पैसिफिक मॉल के पास से परतापुर तक 38 किलोमीटर लंबे रूट का निर्माण शुरू होगा।
अतिरिक्त कोच रहेंगे डिपो में
दुहाई और मेरठ में बनने वाले डिपो में हाईस्पीड ट्रेन के अतिरिक्त कोच रहेंगे। इसके अलावा मेंटेनेंस का काम भी डिपो में किया जाएगा। हालांकि डीपीआर में इसकी डिटेल नहीं दी गई है, लेकिन माना जा रहा है कि ऑफ टाइम में ट्रेनों की संख्या रूट पर कम करके डिपो में लाई जाएंगी ओर पीक टाइम में रूट पर ट्रेनों की संख्या बढ़ा दी जाएगी।
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एक नजर में हाईस्पीड ट्रेन का प्रोजेक्ट
कुल लंबाई 90 किलोमीटर
स्टेशन की संख्या 17 (11 एलिवेटेड और 6 अंडरग्राउंड)
गाजियाबाद में स्टेशन की संख्या 07
ट्रेन में अधिकतम कोच 12
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हाईस्पीड ट्रेन की खासियत
. हवाई जहाज जैसी सीटें होंगी, हर 10 से 15 मिनट में मिलेगी ट्रेन
. प्रत्येक ट्रेन में 2400 पैसेंजर कर सकेंगे सफर
. आग लगने की दशा में तुरंत सूचना देने की तकनीक से लैस होगी ट्रेन।
. अचानक बिजली से संपर्क खत्म होने पर भी 90 मिनट तक ट्रेन में वेंटिलेशन की दिक्कत नहीं होगी।
. ओवरहेड वॉयर से बिजली मिलनी बंद होने पर तीन घंटे तक लाइट और उद्घोषणा उपकरण काम करेंगे
. ट्रेन एक सेकेंड में 1.3 मीटर की रफ्तार पकड़ लेगी।