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Ghaziabad News: किसानों को व्यावसायिक जमीन देगा आवास विकास
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साहिबाबाद। वसुंधरा योजना बसाने के लिए किसानों से जिन समझौते के आधार पर जमीन ली गई थी उन्हें अब आवास विकास व्यावसायिक जमीन देने की तैयारी कर रहा है। किसानों को भूखंड उपलब्ध कराने के लिए लखनऊ में प्रक्रिया चल रही है। जल्द ही पंजीकृत 250 किसानों को 35-35 वर्ग मीटर व्यावसायिक जमीन उपलब्ध कराई जाएगी।
संपत्ति विभाग के अधिकारी सुनील शर्मा ने बताया कि विभाग में 250 किसान पंजीकृत हैं, जिनसे वसुंधरा योजना में जमीन लिए जाने का रिकॉर्ड विभाग के पास है। भूखंड किसानों को तभी उपलब्ध कराया जाएगा जब किसान अपने पुराने दस्तावेज दिखा सकेंगे। बिना दस्तावेज दिखाए किसी को भूखंड नहीं दिया जाएगा। फिलहाल निर्माण खंड-1 के माध्यम से लखनऊ में किसानों की फाइल भेजी जा चुकी है। जल्द ही भूखंड दिए जाने पर अंतिम मुहर लगेगी। हालांकि जिस कीमत पर किसानों को व्यावसायिक जमीन उपलब्ध कराए जाने की बात कही जा रही है, किसान इसके लिए राजी नहीं हैं और पुराने समझौते के मुताबिक ही जमीन दिए जाने की मांग कर रहे हैं।
इनसेट
भूखंड के कीमत पर किसानों को है एतराज
किसान नेता बलराम सिंह का कहना है कि आवास विकास किसानों को भूखंड देने की प्रक्रिया तो चला रहा है लेकिन जिस कीमत पर वह भूखंड देना चाहता है, उस पर सभी किसानों को एतराज है। दरअसल विभाग की ओर से डेढ़ लाख वर्ग मीटर तक की जमीन दी जा रही है। इस हिसाब से 35 वर्ग मीटर की कीमत 50 लाख से अधिक बैठ रही है। किसान इतने अधिक मूल्य पर जमीन नहीं ले सकेंगे।
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इनसेट
दो बार किसानों के साथ हो चुका है समझौता
बलराम सिंह का कहना है कि आवास विकास के साथ किसानों के दो समझौते हुए हैं। पहला समझौता 1999 में हुआ था, उस दौरान जमीन की कीमत महज साढ़े चार हजार से पांच हजार वर्ग मीटर ही थी। वहीं दूसरी बार वर्ष 2012 में भी भूखंड दिए जाने पर समझौता हुआ था उस दौरान भी कीमत महज 25 से 30 हजार रुपये वर्ग मीटर थी। किसानों को दोनों समझौते के बाद जमीन नहीं दी गई और जमीन के महंगे होने का इंतजार किया गया। किसानों की मांग है कि वर्ष 2012 के समझौते के मुताबिक उन्हें भूखंड दिया जाए।
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संपत्ति विभाग के अधिकारी सुनील शर्मा ने बताया कि विभाग में 250 किसान पंजीकृत हैं, जिनसे वसुंधरा योजना में जमीन लिए जाने का रिकॉर्ड विभाग के पास है। भूखंड किसानों को तभी उपलब्ध कराया जाएगा जब किसान अपने पुराने दस्तावेज दिखा सकेंगे। बिना दस्तावेज दिखाए किसी को भूखंड नहीं दिया जाएगा। फिलहाल निर्माण खंड-1 के माध्यम से लखनऊ में किसानों की फाइल भेजी जा चुकी है। जल्द ही भूखंड दिए जाने पर अंतिम मुहर लगेगी। हालांकि जिस कीमत पर किसानों को व्यावसायिक जमीन उपलब्ध कराए जाने की बात कही जा रही है, किसान इसके लिए राजी नहीं हैं और पुराने समझौते के मुताबिक ही जमीन दिए जाने की मांग कर रहे हैं।
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भूखंड के कीमत पर किसानों को है एतराज
किसान नेता बलराम सिंह का कहना है कि आवास विकास किसानों को भूखंड देने की प्रक्रिया तो चला रहा है लेकिन जिस कीमत पर वह भूखंड देना चाहता है, उस पर सभी किसानों को एतराज है। दरअसल विभाग की ओर से डेढ़ लाख वर्ग मीटर तक की जमीन दी जा रही है। इस हिसाब से 35 वर्ग मीटर की कीमत 50 लाख से अधिक बैठ रही है। किसान इतने अधिक मूल्य पर जमीन नहीं ले सकेंगे।
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दो बार किसानों के साथ हो चुका है समझौता
बलराम सिंह का कहना है कि आवास विकास के साथ किसानों के दो समझौते हुए हैं। पहला समझौता 1999 में हुआ था, उस दौरान जमीन की कीमत महज साढ़े चार हजार से पांच हजार वर्ग मीटर ही थी। वहीं दूसरी बार वर्ष 2012 में भी भूखंड दिए जाने पर समझौता हुआ था उस दौरान भी कीमत महज 25 से 30 हजार रुपये वर्ग मीटर थी। किसानों को दोनों समझौते के बाद जमीन नहीं दी गई और जमीन के महंगे होने का इंतजार किया गया। किसानों की मांग है कि वर्ष 2012 के समझौते के मुताबिक उन्हें भूखंड दिया जाए।