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नेपाली और बांग्लादेशियों के बना दिए 30 हजार फर्जी आधार कार्ड
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नेपाली और बांग्लादेशियों के बना दिए 30 हजार फर्जी आधार कार्ड
गाजियाबाद। फर्जी तरीके से नेपाली व बांग्लादेशियों के 30 हजार आधार कार्ड बनाने वाले गिरोह का पुलिस ने पर्दाफाश किया है। गिरोह के आठ सदस्यों को मौके से गिरफ्तार किया गया है। उनके पास से लैपटॉप, मोबाइल, आई व थंब प्रिंट स्कैनर, आई रेटिना क्लोन, सुपरवाइजर फार्म बरामद किया है। आरोपी यूआईडीएआई (यूनीक आईडेंटिफिकेशन अथॉरिटी ऑफ इंडिया) की लॉगिन आईडी बनाने वाली असम की एक कंपनी से जुड़कर सुपरवाइजर और ऑपरेटर बन गए। इसके बाद जगह-जगह आधार कार्ड बनाने के लिए सेंटर खोल दिए। मामले की यूआईडीएआई को भी सूचना दी गई है।
बस अड्डा क्षेत्र चल रहा फर्जीवाड़ा
पुलिस ने बताया कि आरोपी लंबे समय से बस अड्डा चौकी क्षेत्र में एक्सप्रेस मार्केट में यमनोत्री मार्केट बिल्डिंग में तीन ऑफिस बनाकर आधार कार्ड बनाने का सेंटर चला रहे थे। पुलिस ने सेंटर पर छापा मारा, जहां आरोपी फर्जी आधार कार्ड बनाते मिले। मौके से गोविंदपुरम निवासी अंकित गुप्ता, संजयनगर बापूधाम निवासी शिवम, सिहानी गेट नंदग्राम निवासी मोनू गुप्ता, मधुबन बापूधाम निवासी सचिन, पिलखुवा निवासी विशाल रघुवंशी, दिल्ली गेट गाजियाबाद निवासी लक्ष्य शर्मा, शास्त्री नगर निवासी पूजा रावत, मिसलगढ़ी डासना निवासी सुजीता को गिरफ्तार किया है।
गिरोह का सरगना अंकित बीएससी पास
आरोपी बिना किसी मूल दस्तावेजों के किसी भी जिले व शहर का आधार कार्ड बना देते थे। गिरोह के सदस्य झुग्गी झोपड़ियों में रहने वाले लोगों को टारगेट करके उनके आधार कार्ड बनाते थे। पते का सत्यापन करने के लिए प्रधानाचार्य व पार्षदों की फर्जी मोहर का इस्तेमाल करते थे। पुलिस ने बताया कि आरोपी अंकित गुप्ता गिरोह का सरगना है। अंकित बीएससी पास है। वह अपने साथियों के साथ मिलकर कंपनी की कर्मचारी जया चौहान से सहयोग कर असम की आसुजा कंपनी के जरिये फ्रंटेक सॉल्यूशन प्राइवेट लिमिटेड नाम की फर्जी फर्म दिखाकर आधार कार्ड सेंटर के लिए खुद व अपने साथियों को सुपरवाइजर और ऑपरेटर बनवाया।
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फर्जी आधार कार्ड बनाने के 5 से 6 हजार और नाम व पता बदलने के 2 से 3 हजार रुपये लेते थे। पुलिस का कहना है कि गिरोह ने एक सुपरवाइजर आईडी के जरिये कितनी लॉगिन आईडी बनाई है, आरोपियों से पूछताछ की जा रही है। आरोपियों ने नेपाली, बांग्लादेशी व अन्य विदेशी नागरिकों के आधार कार्ड बनाए हैं। सीओ प्रथम ने बताया कि जिन लोगों के कार्ड बनाए गए हैं उन लोगों को चिन्हित किया जा रहा है।
असम का फर्जी आधार कार्ड बनाकर ली आईडी
आरोपी अंकित ने पुलिस को बताया कि उसने और मोनू गुप्ता और सुजिता ने अपना असम के फर्जी पते पर आधार कार्ड बनवाकर यूआईडीएआई आईडी आसुजा कंपनी से बनवा ली। इसके बाद आरोपी असम की यूआईडीएआई की आईडी को गाजियाबाद में संचालित कर रहे थे। वहीं पूछताछ में यह भी सामने आया है कि असम के पते पर ली गई सुपरवाइजर की आईडी के आधार पर कई सेंटर के लिए आईडी जनरेट की गई है। जिनकी आईडी लॉगिन करने के लिए उनके आई रेटिना की फोटो व फिंगर प्रिंट का क्लोन बनाकर गाजियाबाद में इस्तेमाल किया जा रहा था।
एक सुपरवाइजर बना सकता है कितनी भी यूआईडीएआई आईडी
पुलिस ने बताया कि यूआईडीएआई आईडी बनवाने के लिए एनएसईआईटी (नेशनल स्टॉक एक्सचेंज फॉर इंफारमेशन एंड टेकभनालॉजी) की परीक्षा देनी होती है। इसके बाद यूआईडीएआई आईडी मिलती है। इसके बाद आरोपियों ने आधार कार्ड सेंटर के लिए कितनी आईडी बनाई है। आरोपियों से पूछताछ की जा रही है। हालांकि आरोपियों के पास से अभी 29 सुपरवाइजर व ऑपरेटर की आईडी मिली है।
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ये सामान किए बरामद
209 अंगूठा निशान रबर के बने हुए, 137 आधार कार्ड, 61 आई रेटीना क्लोन, 67 आधार रसीद अपडेट, 33 सुपरवाइजर फार्म सीट, 30 लैपटॉप, 9 मोबाइल फोन, 5 आई स्कैनर, 3 थम स्कैनर, 6 फिंगर स्कैनर, 11 सीपीयू व मॉनिटर स्क्रीन, 8 मोहर, 25 नए आधार कार्ड रसीद, 1 सवीवी प्रिंटर, 30 खाली आधार कार्ड, 9 गलो स्टिक, 1 गलू गन, 5 चेक बुक, 5 पास बुक, 22 एटीएम कार्ड, विजिटिंग कार्ड बरामद किए हैं।
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फर्जी आधार कार्ड बनाना नियमों के खिलाफ है। गिरोह ने अब तक किन-किन लोगों के आधार कार्ड बनाए हैं। उन्हें चिन्हित करने के लिए यूआईडीएआई को सूचना दी गई है। वहीं असम व नोएडा की कंपनी से भी पूछताछ के लिए टीम बनाई जा रही है। साथ ही एटीएस व अन्य एजेंसियों से संपर्क किया जा रहा है।
-स्वतंत्र सिंह, सीओ प्रथम
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गाजियाबाद। फर्जी तरीके से नेपाली व बांग्लादेशियों के 30 हजार आधार कार्ड बनाने वाले गिरोह का पुलिस ने पर्दाफाश किया है। गिरोह के आठ सदस्यों को मौके से गिरफ्तार किया गया है। उनके पास से लैपटॉप, मोबाइल, आई व थंब प्रिंट स्कैनर, आई रेटिना क्लोन, सुपरवाइजर फार्म बरामद किया है। आरोपी यूआईडीएआई (यूनीक आईडेंटिफिकेशन अथॉरिटी ऑफ इंडिया) की लॉगिन आईडी बनाने वाली असम की एक कंपनी से जुड़कर सुपरवाइजर और ऑपरेटर बन गए। इसके बाद जगह-जगह आधार कार्ड बनाने के लिए सेंटर खोल दिए। मामले की यूआईडीएआई को भी सूचना दी गई है।
बस अड्डा क्षेत्र चल रहा फर्जीवाड़ा
पुलिस ने बताया कि आरोपी लंबे समय से बस अड्डा चौकी क्षेत्र में एक्सप्रेस मार्केट में यमनोत्री मार्केट बिल्डिंग में तीन ऑफिस बनाकर आधार कार्ड बनाने का सेंटर चला रहे थे। पुलिस ने सेंटर पर छापा मारा, जहां आरोपी फर्जी आधार कार्ड बनाते मिले। मौके से गोविंदपुरम निवासी अंकित गुप्ता, संजयनगर बापूधाम निवासी शिवम, सिहानी गेट नंदग्राम निवासी मोनू गुप्ता, मधुबन बापूधाम निवासी सचिन, पिलखुवा निवासी विशाल रघुवंशी, दिल्ली गेट गाजियाबाद निवासी लक्ष्य शर्मा, शास्त्री नगर निवासी पूजा रावत, मिसलगढ़ी डासना निवासी सुजीता को गिरफ्तार किया है।
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गिरोह का सरगना अंकित बीएससी पास
आरोपी बिना किसी मूल दस्तावेजों के किसी भी जिले व शहर का आधार कार्ड बना देते थे। गिरोह के सदस्य झुग्गी झोपड़ियों में रहने वाले लोगों को टारगेट करके उनके आधार कार्ड बनाते थे। पते का सत्यापन करने के लिए प्रधानाचार्य व पार्षदों की फर्जी मोहर का इस्तेमाल करते थे। पुलिस ने बताया कि आरोपी अंकित गुप्ता गिरोह का सरगना है। अंकित बीएससी पास है। वह अपने साथियों के साथ मिलकर कंपनी की कर्मचारी जया चौहान से सहयोग कर असम की आसुजा कंपनी के जरिये फ्रंटेक सॉल्यूशन प्राइवेट लिमिटेड नाम की फर्जी फर्म दिखाकर आधार कार्ड सेंटर के लिए खुद व अपने साथियों को सुपरवाइजर और ऑपरेटर बनवाया।
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फर्जी आधार कार्ड बनाने के 5 से 6 हजार और नाम व पता बदलने के 2 से 3 हजार रुपये लेते थे। पुलिस का कहना है कि गिरोह ने एक सुपरवाइजर आईडी के जरिये कितनी लॉगिन आईडी बनाई है, आरोपियों से पूछताछ की जा रही है। आरोपियों ने नेपाली, बांग्लादेशी व अन्य विदेशी नागरिकों के आधार कार्ड बनाए हैं। सीओ प्रथम ने बताया कि जिन लोगों के कार्ड बनाए गए हैं उन लोगों को चिन्हित किया जा रहा है।
असम का फर्जी आधार कार्ड बनाकर ली आईडी
आरोपी अंकित ने पुलिस को बताया कि उसने और मोनू गुप्ता और सुजिता ने अपना असम के फर्जी पते पर आधार कार्ड बनवाकर यूआईडीएआई आईडी आसुजा कंपनी से बनवा ली। इसके बाद आरोपी असम की यूआईडीएआई की आईडी को गाजियाबाद में संचालित कर रहे थे। वहीं पूछताछ में यह भी सामने आया है कि असम के पते पर ली गई सुपरवाइजर की आईडी के आधार पर कई सेंटर के लिए आईडी जनरेट की गई है। जिनकी आईडी लॉगिन करने के लिए उनके आई रेटिना की फोटो व फिंगर प्रिंट का क्लोन बनाकर गाजियाबाद में इस्तेमाल किया जा रहा था।
एक सुपरवाइजर बना सकता है कितनी भी यूआईडीएआई आईडी
पुलिस ने बताया कि यूआईडीएआई आईडी बनवाने के लिए एनएसईआईटी (नेशनल स्टॉक एक्सचेंज फॉर इंफारमेशन एंड टेकभनालॉजी) की परीक्षा देनी होती है। इसके बाद यूआईडीएआई आईडी मिलती है। इसके बाद आरोपियों ने आधार कार्ड सेंटर के लिए कितनी आईडी बनाई है। आरोपियों से पूछताछ की जा रही है। हालांकि आरोपियों के पास से अभी 29 सुपरवाइजर व ऑपरेटर की आईडी मिली है।
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ये सामान किए बरामद
209 अंगूठा निशान रबर के बने हुए, 137 आधार कार्ड, 61 आई रेटीना क्लोन, 67 आधार रसीद अपडेट, 33 सुपरवाइजर फार्म सीट, 30 लैपटॉप, 9 मोबाइल फोन, 5 आई स्कैनर, 3 थम स्कैनर, 6 फिंगर स्कैनर, 11 सीपीयू व मॉनिटर स्क्रीन, 8 मोहर, 25 नए आधार कार्ड रसीद, 1 सवीवी प्रिंटर, 30 खाली आधार कार्ड, 9 गलो स्टिक, 1 गलू गन, 5 चेक बुक, 5 पास बुक, 22 एटीएम कार्ड, विजिटिंग कार्ड बरामद किए हैं।
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फर्जी आधार कार्ड बनाना नियमों के खिलाफ है। गिरोह ने अब तक किन-किन लोगों के आधार कार्ड बनाए हैं। उन्हें चिन्हित करने के लिए यूआईडीएआई को सूचना दी गई है। वहीं असम व नोएडा की कंपनी से भी पूछताछ के लिए टीम बनाई जा रही है। साथ ही एटीएस व अन्य एजेंसियों से संपर्क किया जा रहा है।
-स्वतंत्र सिंह, सीओ प्रथम