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चार महीने से बिना किताबों के पढ़ रहे १.१८ लाख छात्र-छात्राएं
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चार महीने से बिना किताबों के पढ़ रहे 1.18 लाख छात्र-छात्राएं
गाजियाबाद। बेसिक शिक्षा विभाग के 1.18 लाख छात्र-छात्राएं बिना किताबों के ही पढ़ाई कर रहे हैं। चार महीने से विभाग और सरकार ने उन्हें किताबें उपलब्ध नहीं कराई हैं। ऑनलाइन कक्षाओं के कारण पहले ही 70 फीसदी छात्र पढ़ाई से वंचित हैं। रही सही कसर किताबें न मिलने केकारण पूरी हो गई है।
बेसिक शिक्षा विभाग के प्राथमिक, उच्च प्राथमिक, कंपोजिट एवं सहायता प्राप्त विद्यालयों में पढ़ने वाले 1.18 लाख छात्र-छात्राओं को सरकार की तरफ से निशुल्क किताबें दी जाती हैं। उन्हीं किताबों से छात्र-छात्राओं की पढ़ाई होती है। एक अप्रैल से शैक्षिक सत्र शुरू होते ही 15 दिन के अंदर किताबें उपलब्ध करानी होती हैं। इस बार चार महीने बीतने के बाद भी छात्र-छात्राओं को किताबें नहीं मिली हैं। बच्चे बिना किताबों के ही पढ़ाई कर रहे हैं। विभागीय अधिकारियों ने बताया कि किताब अप्रैल में ही आनी थीं। सरकार ही इसका टेंडर करके किताबों को लखनऊ से भिजवाती है। जिलास्तर पर किताबों से लेना देना नहीं होता है। यहां किताबें आने के बाद सत्यापन करके संबंधित बीआरसी पर भेज दी जाती है। वहां से सभी स्कूलों को किताबें पहुंचती हैं।
सरकार ने ही देरी से की डिमांड
शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने बताया कि प्रत्येक वर्ष मार्च या अप्रैल के शुरू में किताबों की डिमांड की जाती है। उसके आधार पर किताबें संबंधित जिलों को पहुंच जाती हैं। इस बार शासन से डिमांड ही जून में मांगी गई। इस कारण किताबें नहीं पहुंच पाईं।
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ऑनलाइन पढ़ाई से भी वंचित
एंड्रायड फोन न होने के कारण बच्चे ऑनलाइन कक्षाएं नहीं ले पा रहे हैं। घर में एक ही एंड्रायड फोन है। उसे लेकर पिता ड्यूटी चले जाते हैं। गांव में आते हैं तो नेटवर्क दिक्कत करता है। पहले से ही हमारे बच्चे ऑनलाइन कक्षाओं से वंचित हैं। अब चार महीने से किताबें नहीं मिली हैं। इससे बच्चों की पढ़ाई ही नहीं हो रही है।
अंजू वर्मा, अभिभावक
आजकल कहकर टाला जा रहा
मोबाइल फोन न होने के कारण ऑनलाइन कक्षा नहीं ले पा रही हूं। पढ़ाई केलिए किताबों का इंतजार कर रही हूं, लेकिन अभी तक हमें किताब नहीं मिली हैं। स्कूल के शिक्षकों से भी संपर्क किया गया है। वह आज कल कहकर टाल देते हैं।
अलिशा, छात्रा कक्षा सात
ऑनलाइन पढ़ाई बंद है
ड्यूटी करके जब पापा घर आते हैं तो व्हाट्सएप पर जो वीडियो आती हैं, उन्हें देख लेते हैं। ऑनलाइन पढ़ाई पूरी तरह से बंद है। किताबों के माध्यम से ही पढ़ाई करते हैं, लेकिन वह भी नहीं मिली हैं। जब तक किताबें नहीं मिलेंगी, तब तक पढ़ाई बंद रहेगी।
अल्तमश, छात्र कक्षा आठ
बच्चे परेशान हैं
नया सत्र होने के चार माह बाद भी बच्चों को नि:शुल्क पुस्तकें नहीं मिली हैं, जिसके कारण बच्चे ई-पाठशाला का शत प्रतिशत लाभ नहीं ले पा रहे हैं। पुस्तकें न होने से बच्चों को ई पाठशाला की विषय वस्तु को समझने में कठिनाई हो रही है। शासन को सत्र प्रारंभ होने के 15 दिन में प्राथमिकता से निशुल्क पाठ्य पुस्तकों का वितरण करा देना चाहिए था।
डॉ अनुज त्यागी, प्रांतीय उपाध्यक्ष, उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ
कुछ किताबें आ गई हैं
कुछ किताबें शासन से आ गई हैं। उनका सत्यापन कराया जा रहा है। सत्यापन के बाद स्कूलों में किताबों को भेज दिया जाएगा। निशुल्क किताबें शासन से ही आती हैं। कोरोना के कारण वहां से डिमांड भी लेट मांगी गई थी।
बृजभूषण चौधरी, बीएसए
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गाजियाबाद। बेसिक शिक्षा विभाग के 1.18 लाख छात्र-छात्राएं बिना किताबों के ही पढ़ाई कर रहे हैं। चार महीने से विभाग और सरकार ने उन्हें किताबें उपलब्ध नहीं कराई हैं। ऑनलाइन कक्षाओं के कारण पहले ही 70 फीसदी छात्र पढ़ाई से वंचित हैं। रही सही कसर किताबें न मिलने केकारण पूरी हो गई है।
बेसिक शिक्षा विभाग के प्राथमिक, उच्च प्राथमिक, कंपोजिट एवं सहायता प्राप्त विद्यालयों में पढ़ने वाले 1.18 लाख छात्र-छात्राओं को सरकार की तरफ से निशुल्क किताबें दी जाती हैं। उन्हीं किताबों से छात्र-छात्राओं की पढ़ाई होती है। एक अप्रैल से शैक्षिक सत्र शुरू होते ही 15 दिन के अंदर किताबें उपलब्ध करानी होती हैं। इस बार चार महीने बीतने के बाद भी छात्र-छात्राओं को किताबें नहीं मिली हैं। बच्चे बिना किताबों के ही पढ़ाई कर रहे हैं। विभागीय अधिकारियों ने बताया कि किताब अप्रैल में ही आनी थीं। सरकार ही इसका टेंडर करके किताबों को लखनऊ से भिजवाती है। जिलास्तर पर किताबों से लेना देना नहीं होता है। यहां किताबें आने के बाद सत्यापन करके संबंधित बीआरसी पर भेज दी जाती है। वहां से सभी स्कूलों को किताबें पहुंचती हैं।
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सरकार ने ही देरी से की डिमांड
शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने बताया कि प्रत्येक वर्ष मार्च या अप्रैल के शुरू में किताबों की डिमांड की जाती है। उसके आधार पर किताबें संबंधित जिलों को पहुंच जाती हैं। इस बार शासन से डिमांड ही जून में मांगी गई। इस कारण किताबें नहीं पहुंच पाईं।
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ऑनलाइन पढ़ाई से भी वंचित
एंड्रायड फोन न होने के कारण बच्चे ऑनलाइन कक्षाएं नहीं ले पा रहे हैं। घर में एक ही एंड्रायड फोन है। उसे लेकर पिता ड्यूटी चले जाते हैं। गांव में आते हैं तो नेटवर्क दिक्कत करता है। पहले से ही हमारे बच्चे ऑनलाइन कक्षाओं से वंचित हैं। अब चार महीने से किताबें नहीं मिली हैं। इससे बच्चों की पढ़ाई ही नहीं हो रही है।
अंजू वर्मा, अभिभावक
आजकल कहकर टाला जा रहा
मोबाइल फोन न होने के कारण ऑनलाइन कक्षा नहीं ले पा रही हूं। पढ़ाई केलिए किताबों का इंतजार कर रही हूं, लेकिन अभी तक हमें किताब नहीं मिली हैं। स्कूल के शिक्षकों से भी संपर्क किया गया है। वह आज कल कहकर टाल देते हैं।
अलिशा, छात्रा कक्षा सात
ऑनलाइन पढ़ाई बंद है
ड्यूटी करके जब पापा घर आते हैं तो व्हाट्सएप पर जो वीडियो आती हैं, उन्हें देख लेते हैं। ऑनलाइन पढ़ाई पूरी तरह से बंद है। किताबों के माध्यम से ही पढ़ाई करते हैं, लेकिन वह भी नहीं मिली हैं। जब तक किताबें नहीं मिलेंगी, तब तक पढ़ाई बंद रहेगी।
अल्तमश, छात्र कक्षा आठ
बच्चे परेशान हैं
नया सत्र होने के चार माह बाद भी बच्चों को नि:शुल्क पुस्तकें नहीं मिली हैं, जिसके कारण बच्चे ई-पाठशाला का शत प्रतिशत लाभ नहीं ले पा रहे हैं। पुस्तकें न होने से बच्चों को ई पाठशाला की विषय वस्तु को समझने में कठिनाई हो रही है। शासन को सत्र प्रारंभ होने के 15 दिन में प्राथमिकता से निशुल्क पाठ्य पुस्तकों का वितरण करा देना चाहिए था।
डॉ अनुज त्यागी, प्रांतीय उपाध्यक्ष, उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ
कुछ किताबें आ गई हैं
कुछ किताबें शासन से आ गई हैं। उनका सत्यापन कराया जा रहा है। सत्यापन के बाद स्कूलों में किताबों को भेज दिया जाएगा। निशुल्क किताबें शासन से ही आती हैं। कोरोना के कारण वहां से डिमांड भी लेट मांगी गई थी।
बृजभूषण चौधरी, बीएसए