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पुरुषार्थ से ही होते हैं सब मनोरथ पूर्ण

Amarujala Local Bureau अमर उजाला लोकल ब्यूरो
Updated Mon, 31 May 2021 04:35 PM IST
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माई सिटी रिपोर्टर
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गाजियाबाद। केन्द्रीय आर्य युवक परिषद ने "मानव जीवन में पुरुषार्थ का वैदिक स्वरुप" विषय पर ऑनलाइन गोष्ठी का आयोजन किया। मुख्य वक्ता डॉ. भारत वेदालंकार ने बताया कि साधारण पुरुष एक जीवात्मा है, परम पुरुष परमात्मा है। उन्होंने कहा कि पुरुषार्थ ही इस दुनिया में सब कामना पूरी करता है। चार प्रकार के पुरुषार्थ होते हैं,. धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष जिससे अभ्युदय, लौकिक और पारलोकिक उन्नति होती है। यज्ञ करना वेद के अनुकूल चलना धर्म है। मोक्ष हमारा अंतिम लक्ष्य है।सबसे महत्वपूर्ण है कि इसके लिए प्रयत्नशील रहना है तभी हम तीनों प्रकार के दुखों से छुटकारा प्राप्त कर अखंड आनंद को प्राप्त कर सकते हैं। मुख्य अतिथि आचार्य गवेंद्र शास्त्री ने कहा कि मनुष्य परमात्मा की श्रेष्ठ कृति है। केन्द्रीय आर्य युवक परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष अनिल आर्य ने कहा कि कर्मशील मनुष्य ही मनोकामना पूर्ण कर सुख पाते है। कर्म ही सब सुखों का मूल है। परिषद के उत्तर प्रदेश के प्रांतीय महामंत्री प्रवीण आर्य ने कहा कि "प्रभु न बिसारिये, हिम्मत न हारिये, हंसते मुस्कुराते हुए जिंदगी गुजारिये " यही जीवन जीने का ढंग है। कार्यक्रम की अध्यक्षता जनक अरोड़ा ने की। इस मौके पर प्रवीना ठक्कर, रमा नागपाल, राज मेहन, दीप्ति, कुसुम भंडारी, आनन्द प्रकाश आर्य, सौरभ गुप्ता, वीरेन्द्र आहूजा आदि मौजूद रहे।
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