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दाढ़ी काटने का मामला: ट्विटर के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंची गाजियाबाद पुलिस, एसएलपी में दिया यह तर्क
Mon, 28 Jun 2021 11:50 PM IST
शाहरुख खान
अमर उजाला नेटवर्क, गाजियाबाद
अमर उजाला नेटवर्क, गाजियाबाद
Published by: शाहरुख खान
Updated Mon, 28 Jun 2021 11:50 PM IST
सार
पुलिस का तर्क है कि तथ्यों को छिपाते हुए मनीष माहेश्वरी ने कर्नाटक हाईकोर्ट से राहत हासिल की है। पुलिस सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के लिए एसएलपी सूचीबद्ध होने का इंतजार कर रही है।
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सर्वोच्च न्यायालय
- फोटो : पीटीआई
विस्तार
ट्विटर इंडिया के एमडी मनीष माहेश्वरी को कर्नाटक हाईकोर्ट से मिली राहत के खिलाफ गाजियाबाद पुलिस सोमवार को सुप्रीम कोर्ट पहुंची। पुलिस की तरफ से सीओ लोनी अतुल कुमार सोनकर एसएलपी (स्पेशल लीव पिटीशन) दाखिल करने पहुंचे।
पुलिस का तर्क है कि तथ्यों को छिपाते हुए मनीष माहेश्वरी ने कर्नाटक हाईकोर्ट से राहत हासिल की है। पुलिस सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के लिए एसएलपी सूचीबद्ध होने का इंतजार कर रही है।
पुलिस का कहना है कि ट्विटर इंडिया के एमडी मनीष माहेश्वरी को धारा 41ए के तहत नोटिस भेजकर भड़काऊ ट्वीट के संबंध में अपने बयान दर्ज करने के लिए बुलाया गया था। उन्हें 24 जून को लोनी बॉर्डर थाने पहुंचना था। अधिवक्ता के माध्यम से मनीष थाने आने की बात कहते रहे, लेकिन ऐनवक्त पर वह थाने आने की बजाय कर्नाटक हाईकोर्ट पहुंच गए।
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कर्नाटक हाईकोर्ट ने अगली सुनवाई (29 जून) तक एमडी के खिलाफ सख्त कार्रवाई न करने के निर्देश दिए थे। एमडी को मिली राहत के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जाने का फैसला लिया था। इसी कड़ी में गाजियाबाद पुलिस सोमवार को सुप्रीम कोर्ट पहुंची और एसएलपी दाखिल करने की प्रक्रिया शुरू की। सीओ लोनी अतुल कुमार सोनकर ने सुप्रीम कोर्ट में स्टैंडिंग काउंसिल का वकालतनामा दाखिल किया।
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पुलिस का तर्क है कि तथ्यों को छिपाते हुए मनीष माहेश्वरी ने कर्नाटक हाईकोर्ट से राहत हासिल की है। पुलिस सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के लिए एसएलपी सूचीबद्ध होने का इंतजार कर रही है।
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पुलिस का कहना है कि ट्विटर इंडिया के एमडी मनीष माहेश्वरी को धारा 41ए के तहत नोटिस भेजकर भड़काऊ ट्वीट के संबंध में अपने बयान दर्ज करने के लिए बुलाया गया था। उन्हें 24 जून को लोनी बॉर्डर थाने पहुंचना था। अधिवक्ता के माध्यम से मनीष थाने आने की बात कहते रहे, लेकिन ऐनवक्त पर वह थाने आने की बजाय कर्नाटक हाईकोर्ट पहुंच गए।
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कर्नाटक हाईकोर्ट ने अगली सुनवाई (29 जून) तक एमडी के खिलाफ सख्त कार्रवाई न करने के निर्देश दिए थे। एमडी को मिली राहत के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जाने का फैसला लिया था। इसी कड़ी में गाजियाबाद पुलिस सोमवार को सुप्रीम कोर्ट पहुंची और एसएलपी दाखिल करने की प्रक्रिया शुरू की। सीओ लोनी अतुल कुमार सोनकर ने सुप्रीम कोर्ट में स्टैंडिंग काउंसिल का वकालतनामा दाखिल किया।
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एसएलपी में पुलिस का यह तर्क
- मामला गाजियाबाद में दर्ज हुआ है। न्यायिक परिक्षेत्र गाजियाबाद जिला न्यायालय या प्रयागराज हाईकोर्ट के क्षेत्र में आता है। कर्नाटक हाईकोर्ट ने अपने कार्यक्षेत्र से बाहर जाकर ट्विटर इंडिया के एमडी को राहत दी है।
- एमडी ने कर्नाटक हाईकोर्ट में गलत तथ्य दिया है कि यूपी में अग्रिम जमानत का प्रावधान नहीं है।
- एमडी ने गलत तर्क दिया कि गाजियाबाद पुलिस नोटिस के जरिये बुलाकर उन्हें गिरफ्तार कर सकती है। जबकि 41ए का नोटिस उन्हीं को भेजा जाता है, जिनकी गिरफ्तारी नहीं करनी होती।
- एमडी ने गाजियाबाद पुलिस से वर्चुअली प्रक्रिया शुरू करने की मांग रखी। जबकि दस्तावेजों से संबंधित विवेचना वर्चुअली नहीं हो सकती।
कर्नाटक हाईकोर्ट में दूसरी सुनवाई का भी इंतजार
कर्नाटक हाईकोर्ट ने ट्विटर एमडी की अर्जी पर 29 जून को सुनवाई की तारीख निर्धारित की थी। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मंगलवार को कर्नाटक हाईकोर्ट अपनी दूसरी सुनवाई में क्या आदेश देती है, इसका भी इंतजार किया जा रहा है। सुप्रीम कोर्ट में दाखिल होने जा रही विशेष अनुमति याचिका को इसी आदेश के बाद अंतिम रूप दिया जाएगा।
सुप्रीम कोर्ट में डायरी नंबर जनरेट हुआ : एसएसपी
एसएसपी अमित पाठक का कहना है कि पुलिस के पास ट्विटर इंडिया के एमडी मनीष माहेश्वरी को मिली राहत के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जाने का रास्ता खुला है। सोमवार को एसएलपी दाखिल करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। अभी सिर्फ डायरी नंबर जनरेट हुआ है। सुनवाई के लिए केस लिस्टेड होने का इंतजार किया जा रहा है।