{"_id":"615f4e638ebc3e05ea603ec5","slug":"ghaziabad-news-ghaziabad-news-gbd2273124168","type":"story","status":"publish","title_hn":"अमनमणि के ताऊ ने बचाने के लिए की थी सिफारिश","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
अमनमणि के ताऊ ने बचाने के लिए की थी सिफारिश
विज्ञापन
अमनमणि के ताऊ ने बचाने के लिए की थी सिफारिश
गाजियाबाद। सारा मौत प्रकरण में उनकी बहन नीति मिश्रा से बचाव पक्ष ने जिरह की। नीति ने अदालत को बताया कि सारा के अंतिम संस्कार के बाद अमनमणि के ताऊ ने भतीजे को बचाने की सिफारिश की थी। नीति ने कहा कि शादी के बाद से ही अमनमणि सारा के साथ दुर्व्यवहार करता था। इसकी जानकारी वह फोन पर देती थी।
कई बार समझाने का प्रयास किया गया था, इसके बावजूद व्यवहार में कोई बदलाव नहीं हुआ। सुनवाई जारी रखते हुए अदालत ने शुक्रवार आठ अक्तूबर की तारीख लगाई है। सुनवाई के दौरान विधायक अमनमणि उपस्थित नहीं हुए। अधिवक्ता के माध्यम से हाजिरी माफी भेजी। अधिवक्ता नवनीत बयाना ने बताया बहन के मुकदमे की पैरवी और बयान दर्ज कराने के लिए नीति मिश्रा मुंबई से आकर गाजियाबाद में 21 दिन से रुकी हैं। उनके साथ मा सीमा सिंह भी रुकी हैं। सीमा ने सीबीआई पर आरोप लगाया कि वह सही तरीके से पैरवी नहीं कर रही है। सीमा सिंह ने कहा कि वह बेटी को न्याय दिलाने के लिए 21 महीने भी गाजियाबाद में रुक सकती हैं।
विज्ञापन
गाजियाबाद। सारा मौत प्रकरण में उनकी बहन नीति मिश्रा से बचाव पक्ष ने जिरह की। नीति ने अदालत को बताया कि सारा के अंतिम संस्कार के बाद अमनमणि के ताऊ ने भतीजे को बचाने की सिफारिश की थी। नीति ने कहा कि शादी के बाद से ही अमनमणि सारा के साथ दुर्व्यवहार करता था। इसकी जानकारी वह फोन पर देती थी।
कई बार समझाने का प्रयास किया गया था, इसके बावजूद व्यवहार में कोई बदलाव नहीं हुआ। सुनवाई जारी रखते हुए अदालत ने शुक्रवार आठ अक्तूबर की तारीख लगाई है। सुनवाई के दौरान विधायक अमनमणि उपस्थित नहीं हुए। अधिवक्ता के माध्यम से हाजिरी माफी भेजी। अधिवक्ता नवनीत बयाना ने बताया बहन के मुकदमे की पैरवी और बयान दर्ज कराने के लिए नीति मिश्रा मुंबई से आकर गाजियाबाद में 21 दिन से रुकी हैं। उनके साथ मा सीमा सिंह भी रुकी हैं। सीमा ने सीबीआई पर आरोप लगाया कि वह सही तरीके से पैरवी नहीं कर रही है। सीमा सिंह ने कहा कि वह बेटी को न्याय दिलाने के लिए 21 महीने भी गाजियाबाद में रुक सकती हैं।
विज्ञापन