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वैशाली से मोहननगर रूट पर चलेगा रोपवे, कमेटी की मुहर
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वैशाली से मोहननगर रूट पर चलेगा रोपवे, कमेटी की मुहर
गाजियाबाद। महानगर में सबसे पहले वैशाली से मोहननगर रूट पर रोपवे प्रोजेक्ट शुरू होगा। रोपवे प्रोजेक्ट का रूट तय करने के लिए डीएम राकेश कुमार सिंह की अध्यक्षता में बनी चार सदस्यीय कमेटी ने मुहर लगा दी है। प्रोजेक्ट का निर्माण के चयनित एनएचएआई की स्पेेशल परपज व्हीकल (एसपीवी) कंपनी राष्ट्रीय राजमार्ग रसद प्रबंधन लिमिटेड (एनएचएलएमएल) ने जीडीए से पूर्व में तैयार की गई डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट मांगी है। 450 करोड़ की तैयार की गई पुरानी डीपीआर में फंड किन-किन मदों में दर्शाया गया है, इसका एनएचएलएमएल की ओर से अध्ययन किया जाएगा।
डीपीआर का अध्ययन करने के बाद एनएचएलएमएल प्रोजेक्ट की नए सिरे से संशोधित डीपीआर तैयार करेगा। ऐसे में प्राधिकरण ने अपनी सलाहकार फर्म से पुरानी डीपीआर की मांग की है। वैशाली से मोहननगर रूट का एनएचएलएमएल की ओर जमीनी सर्वे पूरा किया जा चुका है। सर्वे में रूट पर यात्रियों की संख्या की पड़ताल के साथ निर्माण संबंधी संभावनाओं को जांचा जा चुका है। रूट को कमेटी की मंजूरी मिलने के बाद कार्य एक कदम आगे बढ़ गया है।
कमेटी में डीएम व जीडीए उपाध्यक्ष के अलावा प्राधिकरण सीएटीपी और जीडीए बोर्ड सदस्य शामिल थे। रोपवे के लिए वैशाली से मोहननगर के अलावा नया बस अड्डा मेट्रो से गाजियाबाद रेलवे स्टेशन, वैशाली मेट्रो स्टेशन से सेक्टर-62 नोएडा मेट्रो स्टेशन और राजनगर एक्सटेंशन चौराहे से हिंडन रिवर मेट्रो स्टेशन रूट शामिल थे। वैशाली से मोहननगर रूट में निर्माण संबंधी कोई बाधा न होने, रूट का विस्तृत अध्ययन के साथ डीपीआर तैयार होने और एनएचएलएमएल की ओर से भी सहमति जताए जाने के बाद रूट का चुनाव किया गया है।
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रोपवे प्रोजेक्ट के विरोध में आंदोलन जारी
वैशाली, इंदिरापुरम और वसुंधरा की विभिन्न सोसायटियों के लोगों की ओर से वैशाली से मोहननगर रोपवे प्रोजेक्ट का विरोध किया जा रहा है। रोपवे प्रोजेक्ट की लागत मेट्रो से चार गुना कम होने के कारण प्राधिकरण प्राथमिकता के आधार पर काम कर रहा है। अब रोपवे का रूट तय होने के बाद विरोध तेज होने की संभावनाएं बढ़ने लगी है।
प्रोजेक्ट में कई विभागों की जमीन, ली जाएगी मंजूरी:
जीडीए मुख्य अभियंता राकेश कुमार गुप्ता का कहना है कि वैशाली से मोहननगर रूट पर सहमति बनने के बाद अब सलाहकार फर्म से एनएचएलएमएल को देने के लिए विस्तृत डीपीआर मांगी गई है। करीब 5.17 किमी लंबे रोपवे प्रोजेक्ट में कई विभागों की जमीन आ रही है। ऐसे में निर्माण से पहले विभागों से मंजूरी ली जाएगी।
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गाजियाबाद। महानगर में सबसे पहले वैशाली से मोहननगर रूट पर रोपवे प्रोजेक्ट शुरू होगा। रोपवे प्रोजेक्ट का रूट तय करने के लिए डीएम राकेश कुमार सिंह की अध्यक्षता में बनी चार सदस्यीय कमेटी ने मुहर लगा दी है। प्रोजेक्ट का निर्माण के चयनित एनएचएआई की स्पेेशल परपज व्हीकल (एसपीवी) कंपनी राष्ट्रीय राजमार्ग रसद प्रबंधन लिमिटेड (एनएचएलएमएल) ने जीडीए से पूर्व में तैयार की गई डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट मांगी है। 450 करोड़ की तैयार की गई पुरानी डीपीआर में फंड किन-किन मदों में दर्शाया गया है, इसका एनएचएलएमएल की ओर से अध्ययन किया जाएगा।
डीपीआर का अध्ययन करने के बाद एनएचएलएमएल प्रोजेक्ट की नए सिरे से संशोधित डीपीआर तैयार करेगा। ऐसे में प्राधिकरण ने अपनी सलाहकार फर्म से पुरानी डीपीआर की मांग की है। वैशाली से मोहननगर रूट का एनएचएलएमएल की ओर जमीनी सर्वे पूरा किया जा चुका है। सर्वे में रूट पर यात्रियों की संख्या की पड़ताल के साथ निर्माण संबंधी संभावनाओं को जांचा जा चुका है। रूट को कमेटी की मंजूरी मिलने के बाद कार्य एक कदम आगे बढ़ गया है।
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कमेटी में डीएम व जीडीए उपाध्यक्ष के अलावा प्राधिकरण सीएटीपी और जीडीए बोर्ड सदस्य शामिल थे। रोपवे के लिए वैशाली से मोहननगर के अलावा नया बस अड्डा मेट्रो से गाजियाबाद रेलवे स्टेशन, वैशाली मेट्रो स्टेशन से सेक्टर-62 नोएडा मेट्रो स्टेशन और राजनगर एक्सटेंशन चौराहे से हिंडन रिवर मेट्रो स्टेशन रूट शामिल थे। वैशाली से मोहननगर रूट में निर्माण संबंधी कोई बाधा न होने, रूट का विस्तृत अध्ययन के साथ डीपीआर तैयार होने और एनएचएलएमएल की ओर से भी सहमति जताए जाने के बाद रूट का चुनाव किया गया है।
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रोपवे प्रोजेक्ट के विरोध में आंदोलन जारी
वैशाली, इंदिरापुरम और वसुंधरा की विभिन्न सोसायटियों के लोगों की ओर से वैशाली से मोहननगर रोपवे प्रोजेक्ट का विरोध किया जा रहा है। रोपवे प्रोजेक्ट की लागत मेट्रो से चार गुना कम होने के कारण प्राधिकरण प्राथमिकता के आधार पर काम कर रहा है। अब रोपवे का रूट तय होने के बाद विरोध तेज होने की संभावनाएं बढ़ने लगी है।
प्रोजेक्ट में कई विभागों की जमीन, ली जाएगी मंजूरी:
जीडीए मुख्य अभियंता राकेश कुमार गुप्ता का कहना है कि वैशाली से मोहननगर रूट पर सहमति बनने के बाद अब सलाहकार फर्म से एनएचएलएमएल को देने के लिए विस्तृत डीपीआर मांगी गई है। करीब 5.17 किमी लंबे रोपवे प्रोजेक्ट में कई विभागों की जमीन आ रही है। ऐसे में निर्माण से पहले विभागों से मंजूरी ली जाएगी।