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सामूहिक दुष्कर्म में निर्दोष साबित होने में लग गए आठ साल
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सामूहिक दुष्कर्म में निर्दोष साबित होने में लग गए आठ साल
गाजियाबाद। सामूहिक दुष्कर्म के आरोप में डासना जेल में बंद दो युवकों को निर्दोष साबित करने में आठ साल लग गए। अदालत ने मेडिकल रिपोर्ट और किशोरी व उसके परिजनों के बयानों में विरोधाभास होने पर दोनों को बरी करने का आदेश दिया। पाक्सो कोर्ट के विशेष न्यायाधीश विवेकानंद विश्वकर्मा ने युवकों पर लगे दुष्कर्म के आरोप, पाक्सो और एसएसटी की धारा से भी मुक्त कर दिया।
विरेंद्र नागर ने बताया कि चार जुलाई 2014 को सिहानी गेट थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी। वह मेरठ रोड पर एक कॉलोनी में किराए पर रहती है। चार जुलाई को वह अपने दो बेटों के साथ स्थानीय बाजार में सामान लेने गई थी। उनकी 14 वर्षीय बेटी अपनी छोटी बहन के साथ घर सो रही थी। उसी दौरान पड़ोस में रहने वाले जितेंद्र अपने साथी सरबजीत के साथ 11.20 बजे घर में घुसकार बेटी से सामूहिक दुष्कर्म किया था। पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज कर दोनों को जेल भेज दिया था। तभी से जितेंद्र और सरबजीत जेल में ही बंद हैं। विरेंद्र ने बताया कि सुनवाई के दौरान 14 गवाह पेश किए थे, लेकिन पीड़िता और उसके परिजनों ने अदालत में विरोधाभासी बयान दर्ज कराया था। इसके अलावा दोनों युवकों और किशोरी के चिकित्सकीय परीक्षण में दुष्कर्म की पुष्टि नहीं हुई थी। इसी आधार पर अदालत ने दोनों को किशोरी से सामूहिक दुष्कर्म से जुड़े सभी मामलों में बरी कर दिया।
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गाजियाबाद। सामूहिक दुष्कर्म के आरोप में डासना जेल में बंद दो युवकों को निर्दोष साबित करने में आठ साल लग गए। अदालत ने मेडिकल रिपोर्ट और किशोरी व उसके परिजनों के बयानों में विरोधाभास होने पर दोनों को बरी करने का आदेश दिया। पाक्सो कोर्ट के विशेष न्यायाधीश विवेकानंद विश्वकर्मा ने युवकों पर लगे दुष्कर्म के आरोप, पाक्सो और एसएसटी की धारा से भी मुक्त कर दिया।
विरेंद्र नागर ने बताया कि चार जुलाई 2014 को सिहानी गेट थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी। वह मेरठ रोड पर एक कॉलोनी में किराए पर रहती है। चार जुलाई को वह अपने दो बेटों के साथ स्थानीय बाजार में सामान लेने गई थी। उनकी 14 वर्षीय बेटी अपनी छोटी बहन के साथ घर सो रही थी। उसी दौरान पड़ोस में रहने वाले जितेंद्र अपने साथी सरबजीत के साथ 11.20 बजे घर में घुसकार बेटी से सामूहिक दुष्कर्म किया था। पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज कर दोनों को जेल भेज दिया था। तभी से जितेंद्र और सरबजीत जेल में ही बंद हैं। विरेंद्र ने बताया कि सुनवाई के दौरान 14 गवाह पेश किए थे, लेकिन पीड़िता और उसके परिजनों ने अदालत में विरोधाभासी बयान दर्ज कराया था। इसके अलावा दोनों युवकों और किशोरी के चिकित्सकीय परीक्षण में दुष्कर्म की पुष्टि नहीं हुई थी। इसी आधार पर अदालत ने दोनों को किशोरी से सामूहिक दुष्कर्म से जुड़े सभी मामलों में बरी कर दिया।
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