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24 घंटे से बिस्कुट खाकर रोमानिया बॉर्डर पर घर वापसी का इंजतार कर रहे छात्र
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24 घंटे से बिस्कुट खाकर रोमानिया बॉर्डर पर घर वापसी का इंजतार कर रहे छात्र
गाजियाबाद। डूंडाहेड़ा के रहने वाले भव्य त्यागी के माता-पिता की चिंताएं काफी बढ़ गई हैं। शनिवार को भव्य त्यागी के यूक्रेन से से निकलने की उम्मीद थी, लेकिन वह निकल नहीं सके। पिता चंद्रशेखर त्यागी ने बताया कि शनिवार शाम पांच बजे से लगभग ढाई सौ भारतीय छात्रों को रोमानिया बॉर्डर पर छोड़ दिया गया है। वहां स्थिति काफी खराब है। छात्र दूतावास से संपर्क कर रहे हैं, वहां से कोई सहयोग नहीं मिल रहा है। छात्र बिस्कुट के सहारे 24 घंटे से बार्डर पर हैं।
भव्य तीन महीने पहले ही मेडिकल यूनिवर्सिटी चेरनिविट्स में पढ़ाई करने गए थे। चंद्रशेखर त्यागी ने बताया कि बेटे से बात हुई तो उसने बताया कि शनिवार को ही सभी बच्चों को यूनिवर्सिटी खाली करने के आदेश दे दिए गए थे जिसके बाद ढाई सौ छात्रों को रोमानिया बॉर्डर से आठ किलोमीटर दूर छोड़ दिया गया। जहां से छात्र पैदल बॉर्डर पर पहुंचे।
शनिवार को लिस्ट में नाम आने के बाद उम्मीद जगी थी कि वह आज भारत पहुंच जाएंगे। वहां के समय के अनुसार सभी छात्र शनिवार शाम पांच बजे से बॉर्डर पर हैं, उनकी फ्लाइट भी नहीं पहुंची है। उन्होंने बताया कि दूतावास वालों ने सभी को भगवान भरोसे छोड़ दिया है।
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बर्फबारी के बीच जमीन पर बैठे हैं छात्र
भव्य ने फोन पर पिता को बताया कि बॉर्डर का गेट खोला नहीं जा रहा है और वहां बर्फबारी हो रही है। बच्चे जमीन पर बैठे हुए हैं। खाने पीने का भी सामान नहीं है। युद्ध शुरू होने से पहले सभी बच्चों ने जो बिस्कुट, चाकलेट खरीदे थे उसी के सहारे आसमान के नीचे समय बिता रहे हैं। मां कुमकुम त्यागी की चिंता है कि अगर कुछ घंटे इसी तरह वहां पड़े रहे तो भव्य सहित अन्य बच्चे कहीं बीमार न पड़ जाएं।
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गाजियाबाद। डूंडाहेड़ा के रहने वाले भव्य त्यागी के माता-पिता की चिंताएं काफी बढ़ गई हैं। शनिवार को भव्य त्यागी के यूक्रेन से से निकलने की उम्मीद थी, लेकिन वह निकल नहीं सके। पिता चंद्रशेखर त्यागी ने बताया कि शनिवार शाम पांच बजे से लगभग ढाई सौ भारतीय छात्रों को रोमानिया बॉर्डर पर छोड़ दिया गया है। वहां स्थिति काफी खराब है। छात्र दूतावास से संपर्क कर रहे हैं, वहां से कोई सहयोग नहीं मिल रहा है। छात्र बिस्कुट के सहारे 24 घंटे से बार्डर पर हैं।
भव्य तीन महीने पहले ही मेडिकल यूनिवर्सिटी चेरनिविट्स में पढ़ाई करने गए थे। चंद्रशेखर त्यागी ने बताया कि बेटे से बात हुई तो उसने बताया कि शनिवार को ही सभी बच्चों को यूनिवर्सिटी खाली करने के आदेश दे दिए गए थे जिसके बाद ढाई सौ छात्रों को रोमानिया बॉर्डर से आठ किलोमीटर दूर छोड़ दिया गया। जहां से छात्र पैदल बॉर्डर पर पहुंचे।
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शनिवार को लिस्ट में नाम आने के बाद उम्मीद जगी थी कि वह आज भारत पहुंच जाएंगे। वहां के समय के अनुसार सभी छात्र शनिवार शाम पांच बजे से बॉर्डर पर हैं, उनकी फ्लाइट भी नहीं पहुंची है। उन्होंने बताया कि दूतावास वालों ने सभी को भगवान भरोसे छोड़ दिया है।
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बर्फबारी के बीच जमीन पर बैठे हैं छात्र
भव्य ने फोन पर पिता को बताया कि बॉर्डर का गेट खोला नहीं जा रहा है और वहां बर्फबारी हो रही है। बच्चे जमीन पर बैठे हुए हैं। खाने पीने का भी सामान नहीं है। युद्ध शुरू होने से पहले सभी बच्चों ने जो बिस्कुट, चाकलेट खरीदे थे उसी के सहारे आसमान के नीचे समय बिता रहे हैं। मां कुमकुम त्यागी की चिंता है कि अगर कुछ घंटे इसी तरह वहां पड़े रहे तो भव्य सहित अन्य बच्चे कहीं बीमार न पड़ जाएं।