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शेरशाह सूरी के बसाए गांव को 74 साल में न मिल सका अस्पताल
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शेरशाह सूरी के बसाए गांव को 74 साल में न मिल सका अस्पताल
मुरादनगर। देश में जीटी रोड बनाने वाले शहशाह सूरी के बसाए गांव शमशेर में आजादी के 74 साल बाद भी अस्पताल नहीं बन सका। लोगों को इलाज के लिए मुरादनगर सीएचसी तक दौड़ लगानी पड़ती है। यहीं नहीं, इस गांव में 1947 में पांचवीं तक स्कूल था। इतने सालों बाद भी जूनियर हाईस्कूल नहीं बन पाया। पांचवीं के बाद पढ़ाई के लिए छात्रों को कई किमी दूर जाना पड़ता है। पेयजल, सड़क जैसी मूलभूत समस्याओं से ग्रामीण जूझ रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि गांव में 33 साल बाद ट्रैक्टर आया था और चार दशक बाद बिजली की लाइन खींची गई।
सिरसा गढ़ से हुआ शमशेर
ग्रामीणों का कहना है कि गांव का पुराना नाम सिरसा गढ़ है, ग्राम प्रधान रविंद्र कुमार ने बताया कि गांव में महल होने के अवशेष हैं। अवशेष के रूप में कुआं, एक भव्य द्वार गांव में आज भी मौजूद है जो इसके इतिहास को प्रमाणित करता है। भव्य द्वार में लखौरी ईंट व लाल बलुआ पत्थर का प्रयोग किया गया है। बताया कि शेरशाह सूरी के समय यह गांव दोबारा बसाया गया था, तब इसका नाम शमशेर गांव रखा गया। किवदंतियों के अनुसार गांव में भगत नरसिंह ने अपनी बेटी हरनंदी को मंशा सेठ के ब्याहा था और भात दिया था और भगवान कृष्ण ने यहां सोने की बारिश की थी। गांव में खोदाई के समय चांदी, तांबे के सिक्के और बर्तन मिल चुके हैं।
पेयजल और सड़क व्यवस्था ठीक नहीं
गांव में 80 हैंडपंप है, जो खराब पड़े हैं। गांव का पानी भी दूषित है। गांव का मुख्य मार्ग भी करीब 700 मीटर जर्जर है। सबसे बड़ी समस्या है कि पाइपलाइन बादशाही मार्ग पर सवारी की व्यवस्था न होने के कारण लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। यह समस्याएं दूर होनी चाहिए।
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कालूराम ग्रामीण
पांचवीं के बाद पढ़ाई की व्यवस्था नहीं
गांव में पांचवीं के बाद पढ़ाई की व्यवस्था नहीं है। उच्च शिक्षा के लिए कोसों दूर जाना पड़ता है। बालिकाअ लड़कियां पढ़ने के लिए बाहर जाती हैं। हर समय एक डर सा बना रहता है। गांव में इंटर कॉलेज होना चाहिए। गांव में पुराना शिव मंदिर है।
श्रीकृष्ण ग्रामीण।
1973 में आई पहली साइकिल
गांव में 1965 में रेडियो आया था। इसके बाद पहली साइकिल 1973 में आई, 1980 में स्कूटर व पहला ट्रैक्टर आया। 1980 में पहली कार गांव में आई। पहले बैलों से खेती होती थी। ट्रैक्टर आने के बाद खेती का तरीका बदल गया।
बुद्ध प्रकाश, ग्रामीण।
गांव में 1990 में आई बिजली
गांव में पानी की निकासी के लिए तालाब नहीं हैं। अस्पताल, आंगनबाड़ी केंद्र, पानी की टंकी, खेल का मैदान, बरातघर नहीं हैं। गांव में 1990 में बिजली और टेलीफोन लगा था। बुजुर्गों ने चंदा करके 1980 में प्राइमरी स्कूल बनवाया। गांव में पुरुषों से अधिक महिलाओं की संख्या है। आजादी के बाद भी गांव मूलभूत सुविधाओं से पिछड़ा हुआ है।
रविंद्र कुमार, ग्राम प्रधान
गांव की आबादी है मिश्रित
जनसंख्या - करीब 2000 हजार
मतदाता - 1210
शैक्षिकता -75 प्रतिशत लोग शिक्षित
आबादी मिश्रित - जिसमें पाल समाज के लोग सबसे अधिक है, इसके बाद जाट, बढ़ई, पंडित आदि शामिल।
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मुरादनगर। देश में जीटी रोड बनाने वाले शहशाह सूरी के बसाए गांव शमशेर में आजादी के 74 साल बाद भी अस्पताल नहीं बन सका। लोगों को इलाज के लिए मुरादनगर सीएचसी तक दौड़ लगानी पड़ती है। यहीं नहीं, इस गांव में 1947 में पांचवीं तक स्कूल था। इतने सालों बाद भी जूनियर हाईस्कूल नहीं बन पाया। पांचवीं के बाद पढ़ाई के लिए छात्रों को कई किमी दूर जाना पड़ता है। पेयजल, सड़क जैसी मूलभूत समस्याओं से ग्रामीण जूझ रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि गांव में 33 साल बाद ट्रैक्टर आया था और चार दशक बाद बिजली की लाइन खींची गई।
सिरसा गढ़ से हुआ शमशेर
ग्रामीणों का कहना है कि गांव का पुराना नाम सिरसा गढ़ है, ग्राम प्रधान रविंद्र कुमार ने बताया कि गांव में महल होने के अवशेष हैं। अवशेष के रूप में कुआं, एक भव्य द्वार गांव में आज भी मौजूद है जो इसके इतिहास को प्रमाणित करता है। भव्य द्वार में लखौरी ईंट व लाल बलुआ पत्थर का प्रयोग किया गया है। बताया कि शेरशाह सूरी के समय यह गांव दोबारा बसाया गया था, तब इसका नाम शमशेर गांव रखा गया। किवदंतियों के अनुसार गांव में भगत नरसिंह ने अपनी बेटी हरनंदी को मंशा सेठ के ब्याहा था और भात दिया था और भगवान कृष्ण ने यहां सोने की बारिश की थी। गांव में खोदाई के समय चांदी, तांबे के सिक्के और बर्तन मिल चुके हैं।
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पेयजल और सड़क व्यवस्था ठीक नहीं
गांव में 80 हैंडपंप है, जो खराब पड़े हैं। गांव का पानी भी दूषित है। गांव का मुख्य मार्ग भी करीब 700 मीटर जर्जर है। सबसे बड़ी समस्या है कि पाइपलाइन बादशाही मार्ग पर सवारी की व्यवस्था न होने के कारण लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। यह समस्याएं दूर होनी चाहिए।
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कालूराम ग्रामीण
पांचवीं के बाद पढ़ाई की व्यवस्था नहीं
गांव में पांचवीं के बाद पढ़ाई की व्यवस्था नहीं है। उच्च शिक्षा के लिए कोसों दूर जाना पड़ता है। बालिकाअ लड़कियां पढ़ने के लिए बाहर जाती हैं। हर समय एक डर सा बना रहता है। गांव में इंटर कॉलेज होना चाहिए। गांव में पुराना शिव मंदिर है।
श्रीकृष्ण ग्रामीण।
1973 में आई पहली साइकिल
गांव में 1965 में रेडियो आया था। इसके बाद पहली साइकिल 1973 में आई, 1980 में स्कूटर व पहला ट्रैक्टर आया। 1980 में पहली कार गांव में आई। पहले बैलों से खेती होती थी। ट्रैक्टर आने के बाद खेती का तरीका बदल गया।
बुद्ध प्रकाश, ग्रामीण।
गांव में 1990 में आई बिजली
गांव में पानी की निकासी के लिए तालाब नहीं हैं। अस्पताल, आंगनबाड़ी केंद्र, पानी की टंकी, खेल का मैदान, बरातघर नहीं हैं। गांव में 1990 में बिजली और टेलीफोन लगा था। बुजुर्गों ने चंदा करके 1980 में प्राइमरी स्कूल बनवाया। गांव में पुरुषों से अधिक महिलाओं की संख्या है। आजादी के बाद भी गांव मूलभूत सुविधाओं से पिछड़ा हुआ है।
रविंद्र कुमार, ग्राम प्रधान
गांव की आबादी है मिश्रित
जनसंख्या - करीब 2000 हजार
मतदाता - 1210
शैक्षिकता -75 प्रतिशत लोग शिक्षित
आबादी मिश्रित - जिसमें पाल समाज के लोग सबसे अधिक है, इसके बाद जाट, बढ़ई, पंडित आदि शामिल।