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काली कमाई को खापने के फार्मूले में फंस गए खिलाड़ी
Updated Sat, 30 Jun 2018 05:52 PM IST
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लेनदेन था मोटा, दिखाया छोटा-छोटा
गाजियाबाद। टैक्स चोरी कर काली कमाई को खपाने का फार्मूला मोदीनगर से जुड़े तीनों लोगों पर भारी पड़ा। आयकर विभाग की 15 टीमों ने शुक्रवार को 26 घंटे से अधिक की कार्रवाई के बाद उम्मीद से कहीं अधिक टैक्स चोरी पकड़ी है। बरामद दस्तावेजों को आयकर विभाग काफी अहम मान रहा है, जिनके ऑडिट के आधार पर टैक्स चोरी का आंकड़ा 60 करोड़ से अधिक जा सकता है। भाजपा नेता सतेंद्र त्यागी के बेटे की कंपनियों व तमाम परिजनों के खातों में मोटी रकम का लेनदेन किया गया है। आयकर रिटर्न में इसका कहीं उल्लेख नहीं है।
छापामारी के दौरान हाथ लगे दस्तावेजों से सत्येंद्र त्यागी के खिलाफ काफी साक्ष्य मिले हैं। सूत्रों का कहना है कि बेटे के नाम पर मुरादनगर में उत्तम फर्नीचर के साथ ही मोबाइल टावर मेंटिनेंस का काम देखने वाली एके टेक कंपनी पंजीकृत है, जो बीते करीब आठ वर्षों से काम कर रही है। वहीं, एक कंपनी लोहे के उत्पाद की मैन्यूफैक्चरिंग का काम करती है। इन कंपनियों व परिजनों के खातों से बड़ी धनराशि का लेनदेन हुआ है जो आयकर रिटर्न में कहीं पर नहीं दर्शाया गया। सूत्रों का दावा है कि अन्य जरियों से कमाई की रकम तमाम परिजनों के खातों से कंपनी में डाली गई, जिन्हें ग्राहक बताया गया। अब इन्हीं बिंदुओं पर ऑडिट के दौरान सतेंद्र त्यागी व बेटे को जवाब देने होंगे।
मोदी मिल के स्क्रैप से बन गया करोड़ पति
आयकर विभाग ने सतेंद्र त्यागी पर कार्रवाई करने से पहले बीते 15-20 वर्ष तक का रिकॉर्ड खंगाला। सूत्रों के मुताबिक छापामारी से पहले इनपुट जुट रही आयकर टीम को काफी चौंकाने वाले तथ्य मिले। बैंक के लेनदेन व सालाना टर्नओवर को देखा तो टीम चौंक गई। दस्तावेजों से पता चला कि सतेंद्र त्यागी की असली किस्मत मोदी ग्रुप की बंद फैक्ट्री के स्क्रैप को बचने का टेंडर मिलने के बाद बदली। उससे पहले सतेंद्र की पहचान एक सामान्य स्क्रैप व्यापारी के तौर पर थी, लेकिन मोदी मिल का स्क्रैप बेच करोड़ों का मुनाफा कमाया। उसके बाद राजनीति का दामन थामा और वर्ष 2012 में विधानसभा चुनाव भी लड़े। इसी दौरान बेटे व अन्य परिजनों के नाम पर पूरा बिजनेस भी सैट कर लिया गया, जिसमें अन्य जरियों से की गई कमाई को खपाया गया।
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पत्नी का मकान भी रात में मारा छापा
बृहस्पतिवार को सतेंद्र त्यागी व उनके बेटे से जुड़ी कंपनियों के ठिकानों पर आयकर की टीम कार्रवाई कर रही थी। इसी बीच देर रात में आयकर को जानकारी मिली कि गाजियाबाद में उनकी दूसरी पत्नी भी रहती है। इसके बाद राजनगर स्थित पत्नी के मकान पर भी छापा मारा गया, जहां से कोई अहम दस्तावेज हाथ नहीं लगा।
ओपीडी की कमाई छिपाकर लगाया चूना
रिटर्न में दिखाई जा रही थी सिर्फ अस्पताल में भर्ती मरीजों की कमाई
गाजियाबाद। अपनी कमाई को रिटर्न से छिपाकर खपाने का फार्मूला डॉ. सतीश त्यागी के लिए मुसीबत खड़ी करने जा रहा है। आयकर विभाग ने डॉक्टर के घर व अस्पताल से जवाब कागजात में काफी अहम साक्ष्य मिले हैं। आयकर सूत्रों का कहना है कि डॉक्टर ने आयकर रिटर्न भरते वक्त सिर्फ उन मरीजों से प्राप्त धनराशि को दिखाया जो अस्पताल में भर्ती होते थे। ओपीडी में आने वाले मरीजों से प्राप्त किसी रकम का उल्लेख नहीं किया है। आयकर टीम ने छापामारी के दौरान डा. सतीश से जवाब मांगा तो उसका कोई संतोष जनक जवाब नहीं दे पाई। इस बीच शुरूआती गणना के आधार पर करीब 20 करोड़ की टैक्स चोरी निकाली गई, लेकिन डॉ. सतीश अभी तक सरेंडर करने को तैयार नहीं हुए हैं। ऐसे में आयकर विभाग अब विस्तृत ऑडिट के बाद जांच पेनल्टी के साथ टैक्स चोरी निर्धारित करेगा।
स्टांप चोरी के मामले के बाद रडार पर आया बजाज परिवार
आन रोड जमीन को कृषि भूमि दिखाकर कराया था बैनामा
गाजियाबाद। बीते वर्ष स्टांप एवं निबंधन विभाग में राजस्व चोरी का मामला सामने आया, जिसमें आरोप लगे कि व्यावसायिक भूमि को कृषि व आबादी बाहुल्य दिखाकर बैनामा कराया गया। यह घोटाला काफी समय तक चर्चा में रहा, जिस पर आयकर विभाग ने उन लोगों के नाम व पते खंगाले जिन्होंने संबंधित भूमि खरीदी थी। यह जमीन दिल्ली मेरठ रोड पर थी, लेकिन इसे रोड से करीब 500 मीटर दूर दिखाकर बैनामा कराया गया। आयकर ने रिकार्ड खंगाला तो पेट्रोल पंप कारोबारी हरीश बजाज व उसके परिजनों का नाम सामने आया। उस वक्त विभाग नौकरशाह व सिंचाई विभाग के अधिकारियों पर छापामारी कर रहा था। इसलिए हरीश बजाज से जुड़े फाइल को होल्ड पर रख दिया गया, लेकिन अब इंटेलिजेंस विंग ने अभियान चलाया तो पुराने फाइलों को खंगाला गया, जिसमें हरीश के साथ उनके भाई देवेंद्र बजाज व उमेश बजाज से जुड़ी कंपनियां भी रडार पर आ गई। बजाज बंधुओं को पेट्रोल पंप के साथ लुब्रीकेंट व बिल्डिंग निर्माण से जुड़े पार्ट बनाने का काम हैं। सारे कंपनियों व संपत्ति को ध्यान तके रखकर छापा मारा गया तो बजाज बंधुओं ने 15 करोड़ रुपया सरेंडर कर दिया है। इसी बीच यह आंकड़ा ओर भी अधिक जा सकता है, क्योंकि अभी तमाम कारोबार से जुड़े वित्तीय कागजों की जांच जारी है।
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गाजियाबाद। टैक्स चोरी कर काली कमाई को खपाने का फार्मूला मोदीनगर से जुड़े तीनों लोगों पर भारी पड़ा। आयकर विभाग की 15 टीमों ने शुक्रवार को 26 घंटे से अधिक की कार्रवाई के बाद उम्मीद से कहीं अधिक टैक्स चोरी पकड़ी है। बरामद दस्तावेजों को आयकर विभाग काफी अहम मान रहा है, जिनके ऑडिट के आधार पर टैक्स चोरी का आंकड़ा 60 करोड़ से अधिक जा सकता है। भाजपा नेता सतेंद्र त्यागी के बेटे की कंपनियों व तमाम परिजनों के खातों में मोटी रकम का लेनदेन किया गया है। आयकर रिटर्न में इसका कहीं उल्लेख नहीं है।
छापामारी के दौरान हाथ लगे दस्तावेजों से सत्येंद्र त्यागी के खिलाफ काफी साक्ष्य मिले हैं। सूत्रों का कहना है कि बेटे के नाम पर मुरादनगर में उत्तम फर्नीचर के साथ ही मोबाइल टावर मेंटिनेंस का काम देखने वाली एके टेक कंपनी पंजीकृत है, जो बीते करीब आठ वर्षों से काम कर रही है। वहीं, एक कंपनी लोहे के उत्पाद की मैन्यूफैक्चरिंग का काम करती है। इन कंपनियों व परिजनों के खातों से बड़ी धनराशि का लेनदेन हुआ है जो आयकर रिटर्न में कहीं पर नहीं दर्शाया गया। सूत्रों का दावा है कि अन्य जरियों से कमाई की रकम तमाम परिजनों के खातों से कंपनी में डाली गई, जिन्हें ग्राहक बताया गया। अब इन्हीं बिंदुओं पर ऑडिट के दौरान सतेंद्र त्यागी व बेटे को जवाब देने होंगे।
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मोदी मिल के स्क्रैप से बन गया करोड़ पति
आयकर विभाग ने सतेंद्र त्यागी पर कार्रवाई करने से पहले बीते 15-20 वर्ष तक का रिकॉर्ड खंगाला। सूत्रों के मुताबिक छापामारी से पहले इनपुट जुट रही आयकर टीम को काफी चौंकाने वाले तथ्य मिले। बैंक के लेनदेन व सालाना टर्नओवर को देखा तो टीम चौंक गई। दस्तावेजों से पता चला कि सतेंद्र त्यागी की असली किस्मत मोदी ग्रुप की बंद फैक्ट्री के स्क्रैप को बचने का टेंडर मिलने के बाद बदली। उससे पहले सतेंद्र की पहचान एक सामान्य स्क्रैप व्यापारी के तौर पर थी, लेकिन मोदी मिल का स्क्रैप बेच करोड़ों का मुनाफा कमाया। उसके बाद राजनीति का दामन थामा और वर्ष 2012 में विधानसभा चुनाव भी लड़े। इसी दौरान बेटे व अन्य परिजनों के नाम पर पूरा बिजनेस भी सैट कर लिया गया, जिसमें अन्य जरियों से की गई कमाई को खपाया गया।
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पत्नी का मकान भी रात में मारा छापा
बृहस्पतिवार को सतेंद्र त्यागी व उनके बेटे से जुड़ी कंपनियों के ठिकानों पर आयकर की टीम कार्रवाई कर रही थी। इसी बीच देर रात में आयकर को जानकारी मिली कि गाजियाबाद में उनकी दूसरी पत्नी भी रहती है। इसके बाद राजनगर स्थित पत्नी के मकान पर भी छापा मारा गया, जहां से कोई अहम दस्तावेज हाथ नहीं लगा।
ओपीडी की कमाई छिपाकर लगाया चूना
रिटर्न में दिखाई जा रही थी सिर्फ अस्पताल में भर्ती मरीजों की कमाई
गाजियाबाद। अपनी कमाई को रिटर्न से छिपाकर खपाने का फार्मूला डॉ. सतीश त्यागी के लिए मुसीबत खड़ी करने जा रहा है। आयकर विभाग ने डॉक्टर के घर व अस्पताल से जवाब कागजात में काफी अहम साक्ष्य मिले हैं। आयकर सूत्रों का कहना है कि डॉक्टर ने आयकर रिटर्न भरते वक्त सिर्फ उन मरीजों से प्राप्त धनराशि को दिखाया जो अस्पताल में भर्ती होते थे। ओपीडी में आने वाले मरीजों से प्राप्त किसी रकम का उल्लेख नहीं किया है। आयकर टीम ने छापामारी के दौरान डा. सतीश से जवाब मांगा तो उसका कोई संतोष जनक जवाब नहीं दे पाई। इस बीच शुरूआती गणना के आधार पर करीब 20 करोड़ की टैक्स चोरी निकाली गई, लेकिन डॉ. सतीश अभी तक सरेंडर करने को तैयार नहीं हुए हैं। ऐसे में आयकर विभाग अब विस्तृत ऑडिट के बाद जांच पेनल्टी के साथ टैक्स चोरी निर्धारित करेगा।
स्टांप चोरी के मामले के बाद रडार पर आया बजाज परिवार
आन रोड जमीन को कृषि भूमि दिखाकर कराया था बैनामा
गाजियाबाद। बीते वर्ष स्टांप एवं निबंधन विभाग में राजस्व चोरी का मामला सामने आया, जिसमें आरोप लगे कि व्यावसायिक भूमि को कृषि व आबादी बाहुल्य दिखाकर बैनामा कराया गया। यह घोटाला काफी समय तक चर्चा में रहा, जिस पर आयकर विभाग ने उन लोगों के नाम व पते खंगाले जिन्होंने संबंधित भूमि खरीदी थी। यह जमीन दिल्ली मेरठ रोड पर थी, लेकिन इसे रोड से करीब 500 मीटर दूर दिखाकर बैनामा कराया गया। आयकर ने रिकार्ड खंगाला तो पेट्रोल पंप कारोबारी हरीश बजाज व उसके परिजनों का नाम सामने आया। उस वक्त विभाग नौकरशाह व सिंचाई विभाग के अधिकारियों पर छापामारी कर रहा था। इसलिए हरीश बजाज से जुड़े फाइल को होल्ड पर रख दिया गया, लेकिन अब इंटेलिजेंस विंग ने अभियान चलाया तो पुराने फाइलों को खंगाला गया, जिसमें हरीश के साथ उनके भाई देवेंद्र बजाज व उमेश बजाज से जुड़ी कंपनियां भी रडार पर आ गई। बजाज बंधुओं को पेट्रोल पंप के साथ लुब्रीकेंट व बिल्डिंग निर्माण से जुड़े पार्ट बनाने का काम हैं। सारे कंपनियों व संपत्ति को ध्यान तके रखकर छापा मारा गया तो बजाज बंधुओं ने 15 करोड़ रुपया सरेंडर कर दिया है। इसी बीच यह आंकड़ा ओर भी अधिक जा सकता है, क्योंकि अभी तमाम कारोबार से जुड़े वित्तीय कागजों की जांच जारी है।