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22 साल में एक डंपिंग ग्राउंड नहीं बना पाया निगम

Sat, 06 May 2017 11:08 PM IST
ब्यूरो , अमर उजाला गाजियाबाद
ब्यूरो , अमर उजाला गाजियाबाद Updated Sat, 06 May 2017 11:08 PM IST
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Corporation found no dumping ground in 22 years
डंपिंग ग्राउंड - फोटो : अमर उजाला

 22 साल में नगर निगम शहर में एक डंपिंग ग्राउंड तक नहीं बना पाया। पहले डूंडाहेड़ा फिर प्रताप विहार और अब गालंद में जमीन चिह्नित कर डंपिंग ग्राउंड व सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट लगाने की प्लानिंग की गई है लेकिन रास्ता यहां भी आसान नहीं है।

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गाजियाबाद का कचरा 20 किलोमीटर दूर गालंद में डाले जाने पर पार्षदों में असहमति है। शुक्रवार को हुई बोर्ड बैठक में पार्षदों ने गालंद से जुड़े प्रस्ताव को खारिज कर दिया है। यही नहीं निगम को यहां जनविरोध का भी सामना करना पड़ सकता है।
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सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर एयरफोर्स स्टेशन वाले शहरों में सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट लगाने की प्रक्रिया वर्ष 2003 में ही शुरू हो गई थी। नगर निगम, पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड, हिंडन एयरफोर्स और जीडीए के सीनियर अधिकारियों की टीम ने निरीक्षण के बाद डूंडाहेड़ा में लैंडफिल साइट तय कर दी गई थी।
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2004 में केंद्र सरकार की ओर से नगर निगम को 13.06 करोड़ की ग्रांट दी गई, जिसके बाद चिह्नित जमीन पर बाउंड्रीवाल का निर्माण शुरू कर दिया गया। 2005 में जीडीए ने मास्टर प्लान 2021 लागू किया और डूंडाहेड़ा में बिल्डरों की गतिविधियां बढ़ गई।

वर्ष 2008 में निगम के प्रस्तावित डंपिंग ग्राउंड और सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट के खिलाफ हाईकोर्ट चले गए। हालांकि 2011 में हाईकोर्ट से बिल्डरों को फटकार लगी और फैसला नगर निगम के पक्ष में आया। इस मामले में हाईकोर्ट ने अंसल और क्रासिंग्स के बिल्डर पर 2 करोड़ की पेनाल्टी भी लगाई गई।

हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ बिल्डर सुप्रीम कोर्ट चले गए, जहां पर मामला उच्चतम न्यायालय में विचाराधीन है।

प्रताप विहार में भी शुरू हुआ विरोध
डूंडाहेड़ा में डंपिंग ग्राउंड पर रोक लगने के बाद नगर निगम ने प्रताप विहार में सरकारी जमीन पर कूड़ा डालना शुरू किया। अब इसके आसपास भी आवास विकास की ऊंची-ऊंची बिल्डिंगें खड़ी हो गईं। ऐसे में यहां भी डंपिंग ग्राउंड का विरोध शुरू हो गया। इसके खिलाफ स्थानीय लोग एनजीटी में चले गए।

अब प्रताप विहार डंपिंग ग्राउंड का मामला भी एनजीटी में विचाराधीन है।
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गालंद में कचरा ले जाना नियम विरुद्ध
निगम के सीनियर पार्षद राजेंद्र त्यागी का केंद्र सरकार के रूल्स-2000 के मुताबिक कोई भी निकाय अपनी सीमा क्षेत्र से बाहर जाकर अपने क्षेत्र के कचरे का निस्तारण नहीं कर सकता। उसी क्षेत्र में डंपिंग ग्राउंड के लिए साइट उपलब्ध कराना क्षेत्र की डेवलपमेंट अथॉरिटी की जिम्मेदारी है। ऐसे में गालंद में गाजियाबाद का कचरा ले जाना नियम विरुद्ध और सुप्रीम कोर्ट की गाइड लाइन के खिलाफ है।
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कोट
फिलहाल जीडीए की ओर से 19 एकड़ जमीन मिल गई है। इसका हस्तांतरण निगम को हो गया है। अब डंपिंग ग्राउंड बनाने का निर्णय बोर्ड को करना है। - डीके सिन्हा, अपर नगरायुक्त


डंपिंग ग्राउंड और सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट लगाने के लिए मंथन किया जा रहा है। यह समस्या जितनी जल्दी हल हो सके, उतना ही अच्छा है। शहर की इस बड़ी समस्या को दूर करने के लिए प्रयास किया जा रहा है। जल्द ही इस पर निर्णय लिया जाएगा। - अशु वर्मा, मेयर 

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