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पहले करते थे स्नान, अब आचमन से भी डरते हैं लोग

Sat, 28 May 2016 01:38 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, गाजियाबाद
ब्यूरो/अमर उजाला, गाजियाबाद Updated Sat, 28 May 2016 01:38 AM IST
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Bath did before, now people are too afraid to sip
hindon - फोटो : अमर उजाला

छह जिलों से होते हुए और 400 किलोमीटर से ज्यादा का सफर करने वाली हरनंदी (हिंडन) में लोग दूर-दूर से स्नान करने परिवार समेत आते थे। सरकारी तंत्र की उदासीनता और विकास के नाम पर अब इस नदी की दुर्दशा हुई तो लोग आचमन से भी डरने लगे हैं। हिंडन को साफ बनाने का संकल्प लेने की बजाय लोगों ने इससे मुंह मोड़ लिया है।

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गढ़ गंगा और यमुना की तरह ही हिंडन नदी भी लोगों की आस्था का केंद्र रही है। खास मौकों पर दूर-दूर से लोग परिवार के साथ स्नान करने आते थे। छठ पूजा के लिए दो दिन पहले ही हिंडन के घाटों पर मेला सा लग जाता था।
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श्रद्धालु हिंडन किनारे ही टेंट लगा लेते थे और दो दिन पूजा-अर्चना के बाद ही घरों को लौटते थे। पूर्व में इसकी पवित्रता भी गंगा और यमुना जैसी ही थी। पुराने लोग बताते हैं कि करीब 35 से 40 साल पूर्व हिंडन नदी का जल इतना साफ था कि फेंके गए सिक्के पानी में पड़े ऊपर से साफ दिखाई पड़ते थे। अब औद्योगिक युग ने धीरे-धीरे इस नदी का अस्तित्व संकट में डाल दिया है। अब स्नान तो दूर छठ पूजा पर भी लोग हिंडन नदी किनारे पूजा करने से बचते हैं।
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पांडवों ने भी हिंडन किनारे बिताया था समय
सरधना (मेरठ) के निकट महाभारत कालीन महादेव मंदिर को पांडवों द्वारा स्थापित बताया जाता है। धर्म के जानकारों के मुताबिक हिंडन नदी के किनारे दुर्योधन ने लाक्षागृह का निर्माण कराया था। लाक्षागृह जलाया गया तो सुरंग के जरिए पांडव हिंडन के किनारे निकले थे।

लाक्षागृह को छोड़ने से पहले पांडवों ने भगवान शिव की पूजा के लिए महादेव मंदिर की स्थापना की थी। जानकारों की मानें तो हिंडन और कृष्णा नदी यहां आकर मिल जाती है। यही बरनावा महाभारत काल में वार्णावृत के नाम से जाना जाता था।

हड़प्पा सभ्यता की गवाह रही है हिंडन
इतिहासकार इसे पहले सिर्फ बरसाती नदी मानते थे, लेकिन बीते दिनों हड़प्पा सभ्यता कालीन अवशेष मिलने के बाद से यह धारणा भी बदल गई है। अब इतिहासकार यह भी मान रहे हैं कि हिंडन का इतिहास 3500 हजार साल से भी पुराना रहा होगा।


यह बरसाती नहीं, सदानीरा नदी रही होगी। तभी हड़प्पा सभ्यता के लोग इसके किनारे आकर बसे होंगे। उद्गम केंद्र पुर का टांडा (सहारनपुर) से निकलकर मुजफ्फरनगर, मेरठ, बागपत, गाजियाबाद और गौतमबुद्ध नगर के सैकड़ों गांवों के बीच से कलकल कर बहती हिंडन नदी मोमनाथनपुर में यमुना में मिल जाती थी।

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