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Ghaziabad News: ग्रेटर नोएडा हादसे के बाद भी नहीं जागे जिम्मेदार, एक्सपायर सिलिंडरों के भरोसे दौड़ रहीं बसें

Ghaziabad Bureau गाजियाबाद ब्यूरो
Updated Thu, 08 Oct 2026 01:31 AM IST
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Authorities remain unmoved even after the Greater Noida accident; buses continue to run relying on expired cylinders.

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गाजियाबाद। सड़कों पर दौड़ती रोडवेज और अनुबंधित बसें यात्रियों के लिए किसी बड़े खतरे से कम साबित नहीं हो रही हैं। पिछले दिनों ग्रेटर नोएडा में हुए दर्दनाक सड़क हादसे के बाद भी परिवहन निगम और संबंधित अधिकारी सबक लेने को तैयार नहीं हैं। नियमों के मुताबिक, हर यात्री बस में चालू हालत में अग्निशामक यंत्र (फायर एक्सटिंग्विशर) और प्राथमिक उपचार पेटी (फर्स्ट एड किट) होना अनिवार्य है। इसके उलट धरातल पर हकीकत बेहद चिंताजनक है। पुराने बस अड्डे से विभिन्न रूटों पर चलने वाली पांच बसों में ये जीवनरक्षक उपकरण या तो सिरे से गायब हैं या फिर महज खानापूर्ति के लिए एक्सपायर्ड हालत में टंगे हुए हैं।

सीन एक : पड़ताल में खुली पोल, जंग लगे सिलिंडरों के भरोसे सुरक्षा
अमर उजाला की टीम दोपहर करीब सवा एक बजे पुराने बस अड्डे पहुंची। यहां खड़ी पांच बसों में फायर सेफ्टी सिलिंडर तो थे, लेकिन उनमें से अधिकांश की रिफिलिंग की तारीख महीनों पहले निकल चुकी थी। कई सिलिंडरों पर जंग लगा हुआ था और प्रेशर मीटर शून्य पर अटका था। ऐसे में आपात स्थिति में ये उपकरण आग पर काबू पाने में पूरी तरह असफल साबित हो सकते हैं।
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सीन दो : बसों से गायब फर्स्ट एड बॉक्स
प्राथमिक चिकित्सा बॉक्स की स्थिति भी बदहाल है। अधिकांश बसों से फर्स्ट एड बॉक्स ही गायब थे। किसी भी बस में आपात स्थिति के लिए जरूरी मरहम-पट्टी, एंटीसेप्टिक लोशन या दर्द निवारक दवाएं उपलब्ध नहीं थीं। ऐसे में सफर के दौरान किसी यात्री के चोटिल होने पर तत्काल प्राथमिक उपचार मिलना भी संभव नहीं है।
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चालकों-परिचालकों को प्रशिक्षण तक नहीं
नियमों की अनदेखी का आलम यह है कि बसों में तैनात अधिकांश चालक-परिचालकों को अग्निशमन यंत्र के संचालन की जानकारी तक नहीं है। चलती बस में शॉर्ट सर्किट या इंजन में आग लगने जैसी गंभीर परिस्थिति में यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकालना बड़ी चुनौती बन सकता है।

बॉक्स : बोले यात्री, जिंदगी से खिलवाड़
पुराने बस अड्डे पर मौजूद सुरेश तोमर, नरेंद्र त्यागी और ओमशंकर का कहना है कि वे पूरा किराया देकर सुरक्षित यात्रा की उम्मीद करते हैं, लेकिन डिपो स्तर पर बिना गहन भौतिक सत्यापन के ही बसों को सड़क पर उतार दिया जाता है। नियमित चेकिंग न होने से चालक और परिचालक भी इन जरूरी उपकरणों को लेकर लापरवाह बने रहते हैं।
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यहां के लिए मिलती है बसें : पुराने बस अड्डे से लोनी, मुरादनगर, हापुड़, बुलंदशहर के लिए यात्रियों को बसें मिलती हैं।
अधिकारी का पक्ष
बसों की नियमित जांच की जाती है। अगर किसी बस में ऐसा है तो इसकी पूरी जांच कराई जाएगी। अगर कहीं खामी मिलेगी तो उसे दूर कराया जाएगा।
दिव्यांशी सिंह, एआरएम, पुराना बस अड्डा
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