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Ghaziabad News: अपर नगर आयुक्त ने पार्षदों पर लगाया अभद्रता का आरोप, मांगी सुरक्षा

Ghaziabad Bureau गाजियाबाद ब्यूरो
Updated Sat, 21 Mar 2026 01:14 AM IST
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Additional Municipal Commissioner accuses councilors of indecency, seeks security
गाजियाबाद। नगर निगम के अपर नगर आयुक्त जंग बहादुर सिंह ने नगर निगम कार्यकारिणी के उपाध्यक्ष प्रवीण चाैधरी व एक अन्य पार्षदों पर अभद्रता और जान-माल को नुकसान पहुंचाने की धमकी देने का आरोप लगाया है। उन्होंने नगर आयुक्त को पत्र लिखकर सुरक्षा दिए जाने की गुहार लगाई है। पुलिस कमिश्नर और डीएम को भी उन्होंने पत्र भेजा है। इसके बाद से निगम में राजनीति गर्मा गई है। पार्षद व कार्यकारिणी उपाध्यक्ष प्रवीण चाैधरी ने आरोपों को नकारा है। वहीं अधिकारी इस पर खुलकर बात नहीं कर रहे हैं।
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मामला निलंबित कर्मचारी की माैत से जुड़ा है। बीती 13 मार्च को महापाैर सुनीता दयाल के फर्जी हस्ताक्षर कर सामुदायिक भवन की बुकिंग में अतिरिक्त छूट लेने का प्रयास किया गया था। इस मामले में प्रेमपाल और रमेश चंद को निलंबित कर दिया गया था। इस घटना के बाद प्रेमपाल की हापुड़ में संदिग्ध हालत में माैत हो गई। अपर नगर आयुक्त ने इसी मामले में 18 मार्च को विरोध के दाैरान पार्षदों पर अभद्रता करने का आरोप लगाया है। हालांकि पुलिस अधिकारियों का कहना है कि पत्र अभी मिला नहीं है।
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वहीं प्रवीण चाैधरी का कहना है कि सभी आरोप गलत हैं। पार्षद राजीव शर्मा के साथ वह सिर्फ शोक के लिए गए थे। वहां अधिकारियों से कर्मचारी के परिवार की मदद करने के लिए कहा गया। अभद्रता या धमकी देने की कोई बात ही नहीं हुई। किसी अधिकारी से कोई विवाद भी नहीं हुआ। प्रवीण के अनुसार इस दाैरान वहां कई अधिकारी और कर्मचारी माैजूद थे। इस बारे में उनसे भी जानकारी की जा सकती है।
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मानसिक उत्पीड़न के साथ भय की स्थिति

अपर नगर आयुक्त ने पत्र में लिखा है कि उन्होंने नियमों के तहत कार्रवाई की थी। 18 मार्च को उन्हें जानकारी हुई कि प्रेमपाल की माैत के बाद कर्मचारियों को कार्य पर आने से रोका जा रहा है। इस पर उन्हें समझाने के लिए बुलाया गया। उनका आरोप है कि वह बात ही कर रहे थे, इस बीच दो पार्षद आए और उनके साथ अभद्रता की गई। पत्र में उन्होंने लिखा है कि उन्हें धमकाया गया। उनके लिए यह मानसिक उत्पीड़न के साथ-साथ डराने वाली स्थिति है। इस मामले में प्रेमपाल के परिवार की तरफ से अभी कोई शिकायत नहीं दी गई है।

आपसी विवाद में अप्रिय घटना हुई तो थाना प्रभारी व संबंधित अधिकारी होंगे जिम्मेदार





गाजियाबाद। जिलाधिकारी रविंद्र कुमार मांदड़ और पुलिस कमिश्नर जे रविंदर गौड़ ने संयुक्त आदेश जारी कर कहा है कि किसी विभाग या संगठन से धमकी, रंगदारी या अवैध वसूली जैसी सूचना प्राप्त होती है तो जिम्मेदार अधिकारियों को तत्काल पुलिस और प्रशासन को अवगत कराना होगा। निकटतम थाना प्रभारी या संबंधित विभाग को सूचित करना होगा। थाना प्रभारी ऐसे प्रकरणों पर तत्काल संज्ञान लेकर पीड़ित पक्ष को न्याय दिलाएंगे। अगर प्रकरण लंबित रखने या अनदेखी से कोई अप्रिय घटना घटित होती है तो उसकी पूरी जिम्मेदारी संबंधित थाना प्रभारी या अधिकारी की होगी। उनके विरुद्ध निलंबन या सेवा समाप्ति की रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को भेजी जाएगी।



किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए कमेटी का भी गठन किया गया है। जिले में लोक व्यवस्था व जन सुरक्षा को सुदृढ़ बनाये रखने के उद्देश्य से यह कदम उठाया गया है। जिला प्रशासन और पुलिस ने विभिन्न संगठनों, संस्थाओं व औद्योगिक इकाइयों के साथ समन्वय स्थापित करने के लिए रणनीति तैयार की है। इस तरह के विवादों और उनका क्या समाधान किया गया? इसके लिए हर पहले और तीसरे गुरुवार को जिला व पुलिस प्रशासन की ओर से विभिन्न संगठनों के साथ संयुक्त बैठक आयोजित की जाएगी। बैठक में लोक व्यवस्था, जन सुरक्षा व जीवन रक्षक सेवाओं से संबंधित विषयों पर प्राप्त प्रार्थना-पत्रों का निस्तारण कराया जाएगा। साथ ही संबंधित अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए जाएंगे।



जिलाधिकारी के अनुसार इंडियन मेडिकल एसोसिएशन, फिजिशियन एसोसिएशन, एंबुलेंस एसोसिएशन, बैंक कर्मचारी संघ, व्यापार मंडल, सर्राफा एसोसिएशन, औद्योगिक संगठन, श्रमिक संगठन, ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन, होटल-रेस्टोरेंट संगठन, पेट्रोलियम डीलर्स, रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन, पत्रकार संगठन, कर्मचारी संगठन, नागरिक सुरक्षा संगठन समेत सभी संगठनों को प्रशासन से नियमित संवाद बनाए रखने के निर्देश दिये गये हैं।




पुलिस आयुक्त जे रविंदर गौड़ ने कहा कि जिले में केंद्र व राज्य सरकार के कार्यालयों के साथ-साथ सार्वजनिक व निजी क्षेत्र की बड़ी कंपनियां, अस्पताल और अन्य संस्थाएं संचालित हैं। यहां बड़ी संख्या में कर्मचारी काम करते हैं। कई बार कर्मचारियों, प्रबंधकों या विभागाध्यक्षों के बीच उत्पन्न विवाद, आपसी मनमुटाव और अन्य संवेदनशील प्रकरण व्यक्तिगत मानकर इसकी जानकारी नहीं दी जाती। ऐसे मामले आगे चलकर गंभीर घटना का रूप ले सकते हैं।
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