फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Delhi ›   Delhi NCR News ›   Ghaziabad: Injured kept suffering for 3 hours in government hospital, did not get treatment

Ghaziabad : सरकारी अस्पताल में 3 घंटे तड़पता रहा घायल, नहीं मिला उपचार, निजी एंबुलेंस से ले जाना पड़ा प्राइवेट

Sun, 03 Dec 2023 06:19 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, गाजियाबाद
अमर उजाला नेटवर्क, गाजियाबाद Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Sun, 03 Dec 2023 06:19 AM IST
सार

संयुक्त में चिकित्सक ने देखते ही रेफर कर दिया। एमएमजी नें तीन घंटे तक वह इमरजेंसी के बाहर स्ट्रेचर पर लेटे तड़पते रहे, लेकिन कोई चिकित्सक देखने तक नहीं आया। हालत बिगड़ती देख परिजन निजी अस्पताल ले गए।

विज्ञापन
Ghaziabad: Injured kept suffering for 3 hours in government hospital, did not get treatment
demo pic... - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

गोविंदपुरम में सड़क हादसे में गंभीर रूप से घायल हुए दिल्ली निवासी किरण (42) को न जिला संयुक्त अस्पताल में उपचार मिला और न ही जिला एमएमजी अस्पताल में। संयुक्त में चिकित्सक ने देखते ही रेफर कर दिया। एमएमजी नें तीन घंटे तक वह इमरजेंसी के बाहर स्ट्रेचर पर लेटे तड़पते रहे, लेकिन कोई चिकित्सक देखने तक नहीं आया। हालत बिगड़ती देख परिजन निजी अस्पताल ले गए।

विज्ञापन


उन्हें सुबह साढ़े दस बजे संयुक्त अस्पताल लाया गया था। यहां कहने के लिए ट्राॅमा सेंटर है लेकिन गंभीर हालत में आए मरीजों को देखते ही रेफर कर दिया जाता है। किरण को भी चिकित्सक ने देखा और तुरंत तीमारदारों को पर्ची थमाकर कह दिया कि एमएमजी ले जाओ।
विज्ञापन


उनके भाई रवि ने बताया कि वह एमएमजी पहुंचे तो केस इमरजेंसी का बताया गया। पर्चा बनवाकर वे इमरजेंसी पहुंच गए। वहां चिकित्सक ने कह दिया कि पहले एक्सरे होगा, उसकी रिपोर्ट देखने के बाद उपचार किया जाएगा। वे एक्सरे विभाग में गए तो कहा गया कि नई पर्ची बनवाओ। इस पर नंबर मिलेगा। नंबर आने पर ही एक्सरे होगा। उन्होंने पर्ची बनवा ली, लेकिन तीन घंटे बीत जाने पर भी नंबर नहीं आया। इसके बाद और इंतजार करते तो भाई की हालत और बिगड़ जाती। मजबूरी में वे निजी अस्पताल ले गए। वह गोविंदपुरम में पुलिस चौकी के पास ड्यूटी पर पिलखुवा जाते समय कैंटर की टक्कर लग जाने से घायल हुए थे।
विज्ञापन
विज्ञापन


निजी एंबुलेंस से ले जाना पड़ा
रवि कुमार ने बताया कि जब एमएमजी में तीन घंटे उपचार नहीं मिला तो उन्होंने स्टाफ से कहा एंबुलेंस की व्यवस्था करने के लिए कहा ताकि भाई को निजी अस्पताल ले जाया जा सके। वहां सरकारी एंबुलेंस भी नहीं मिली। ऐसे में निजी एंबुलेंस से ही ले जाना पड़ा। निजी अस्पताल में तुरंत उपचार मिला। एक्सरे भी दस मिनट में हो गया। चिकित्सक ने बताया कि किरण के पैर की हड्डी टूटी है। इसी से उन्हें असहनीय पीड़ा हो रही थी।


आखिर गलती किसकी
गंभीर रूप से घायल मरीज तीन घंटे तक तड़पता रहा और उसे उपचार नहीं मिला। इस पर भी जिला एमएमजी और संयुक्त अस्पताल के चिकित्सा अधिकारी किसी की गलती मानने के लिए तैयार नहीं हैं। मरीज को उपचार न मिल पाने की दोनों ने अलग-अलग वजह बताई हैं।

सड़क हादसे का केस था। मेडिको लीगल कार्रवाई के लिए अस्पताल में रेडियोलॉजिस्ट नहीं हैं, इसलिए मरीज को एमएमजी अस्पताल रेफर करना पड़ा।
- डॉ. विनोद कुमार पांडे, सीएमएस, संयुक्त अस्पताल

पुलिस केस में कार्रवाई में समय लगता है। परिजन इंतजार नहीं करना चाह रहे थे इसलिए वह अपनी मर्जी से निजी अस्पताल में मरीज को लेकर गए।
- डॉ. मनोज चतुर्वेदी, सीएमएस, एमएमजी अस्पताल

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed