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पटरी पर लौट रहा रोडवेज निगम, यात्रियों को मिली राहत
ब्यूरो / अमर उजाला, फरीदाबाद
Updated Wed, 24 Feb 2016 06:30 PM IST
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जाट आंदोलन के शांत होने के बाद आखिरकार राष्ट्रीय राजमार्ग पर रौनक वापिस लौट आई है। बुधवार को रोडवेज की करीब 170 बसें विभिन्न रूटों पर उतरी।
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जिससे मुसाफिरों ने राहत की सांस ली। हालांकि अभी रोहतक, हांसी, हिसार, भिवानी रूटों पर रोडवेज बस चलाने के तैयार नहीं है। संभावना जताई जा रही है कि संभवत: बृहस्पतिवार इन रूटों पर भी बसें संचालित हो जाएं।
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दरअसल, गत 13 फरवरी से प्रदेश में भडक़े जाट आरक्षण के आंदोलन को लेकर रोडवेज निगम ने अपनी बसों का संचालन बंद कर दिया था। सुरक्षा के मद्देनजर आमतौर पर सिर्फ 20 से 25 बसें ही संचालित हुई।
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जबकि डिपो में लॉग रूट की 110 बसों का बेड़ा है। इन बसों में 15 बसें रोहतक, हिसार होते हुए सिरसा तक जाती है। जबकि वाया गुडग़ांव झज्जर जाने वाली बसों की संख्या भी 15 है।
इसी तरह कैथल, यमुनानगर, करनाल एक-एक बस चलती है। जबकि हर रोज चंडीगढ़ 19 बसें संचालित होती है। जाट आरक्षण आंदोलन के चलते जाट आरक्षण आंदोलन के चलते रोडवेज की रोहतक, झज्जर, कैथल, चंडीगढ़ की बस सेवा बुरी तरह से प्रभावित हो रही है। इन रूटों पर सही रूप से नहीं चल पा रही है। जिसके कारण बल्लभगढ़ डिपो को करीब 36 लाख का भारी नुकसान हुआ।
डिपो पहुंची बसें
13 फरवरी को रोहतक रूट पर दस बसें गई थी। जो पूरे 10 दिन बाद बुधवार को डिपो पहुंची। इसके अलावा पानीपत, चंडीगढ़, कटरा डिपो में खड़ी बसें भी अब डिपो पहुंच गई हैं। बसों के सुरक्षित डिपो पहुंचने पर रोडवेज अधिकारियों ने राहत की सांस ली। चालक-परिचालकों के बीच जाट आंदोलन की चर्चा जोरों पर रही।
यात्रियों ने ली राहत
पूरानी समय-सारिणी के मुताबिक बुधवार तडक़े चार बजे चंडीगढ़ की पहली बस रवाना हुई। इस बस में गिने-चुने ही यात्रियों ने सफर किया। बस में उन परीक्षार्थियों की संख्या ज्यादा थी, जिन्हें कुरूक्षेत्र विश्वविद्यालय में रेलवे की परीक्षा देनी थी। दोबारा बस सेवा शुरू होने से यात्रियों ने राहत की सांस ली।