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Hindi News ›   Delhi ›   Delhi NCR News ›   Frequent throat infections in childhood put young people's hearts at risk, reveals study of 385 patients

Delhi NCR News: बचपन में बार-बार गले के संक्रमण से युवाओं का दिल खतरे में, 385 मरीजों के अध्ययन में खुलासा

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sun, 25 Oct 2026 08:09 PM IST
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गंभीर रूमैटिक हार्ट डिजीज से पीड़ित मरीजों की औसत उम्र महज 31 साल, 82 प्रतिशत में फेफड़ों की धमनियों का दबाव बढ़ा मिला, छह महीने में 7.2 प्रतिशत की मौत
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नितिन राजपूत
पूर्वी दिल्ली। बचपन में बार-बार गले का संक्रमण, समय पर बीमारी की पहचान न होना और इलाज में देरी आगे चलकर दिल की गंभीर बीमारी का कारण बन सकती है। दिल्ली के दो अस्पतालों में रूमैटिक हार्ट डिजीज (गठिया बुखार से जुड़ी हृदय वाल्व की बीमारी) से पीड़ित 385 मरीजों के अध्ययन में यह चिंताजनक तस्वीर सामने आई है। सितंबर 2023 से सितंबर 2025 के बीच लाल बहादुर शास्त्री अस्पताल और डॉ. राम मनोहर लोहिया अस्पताल में भर्ती मरीजों के रिकॉर्ड के विश्लेषण में उनकी औसत उम्र महज 31.2 वर्ष रही।
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अध्ययन के अनुसार, अध्ययन में शामिल 82 प्रतिशत मरीजों में फेफड़ों की धमनियों का दबाव गंभीर रूप से बढ़ा हुआ था, जबकि 58 प्रतिशत को एट्रियल फिब्रिलेशन यानी दिल की धड़कन अनियमित होने की समस्या थी। मरीजों में 68 प्रतिशत महिलाएं थीं और 57 प्रतिशत बीमारी की गंभीर अवस्था में अस्पताल पहुंचे थे।
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सांस फूलना सबसे आम लक्षण
सांस फूलने की शिकायत 89 प्रतिशत मरीजों में दर्ज की गई। वहीं, 76 प्रतिशत को दिल की धड़कन तेज या अनियमित होने और 67 प्रतिशत को पैरों में सूजन की समस्या थी। करीब 23 प्रतिशत मरीजों ने बेहोशी या ऐसा महसूस होने की शिकायत की। सभी मरीजों के माइट्रल वाॅल्व में गंभीर संकुचन पाया गया। इससे पता चला कि कई मरीजों के हृदय के एक से अधिक वाॅल्व प्रभावित थे।
बचपन के संक्रमण को नजरअंदाज करना भारी
अस्पताल के दुर्घटना एवं आपातकाल विभाग की डॉ. श्रेया स्टेन के अनुसार, 45 प्रतिशत मरीजों ने बचपन में बार-बार गले में संक्रमण होने की जानकारी दी, लेकिन केवल 23 प्रतिशत के रिकॉर्ड में एक्यूट रूमैटिक फीवर का निदान दर्ज था। वहीं, 31 प्रतिशत मरीजों को हृदय में असामान्य आवाज (मर्मर) के बारे में बताया गया था, लेकिन वे नियमित जांच के लिए नहीं लौटे।रूमैटिक हार्ट डिजीज में संक्रमण के बाद शरीर की प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया हृदय के वाल्वों को नुकसान पहुंचा सकती है। ऐसे में समय पर पहचान और नियमित निगरानी बेहद जरूरी है।


छह महीने में 7.2 प्रतिशत मरीजों की मौत
अध्ययन में 23 प्रतिशत मरीजों में अस्पताल से जुड़े संक्रमण पाए गए। इनमें 12 प्रतिशत को एमआरएसए बैक्टीरिया से रक्त संक्रमण हुआ। करीब 23 प्रतिशत मरीजों को आईसीयू में भर्ती करना पड़ा। अस्पताल में मृत्यु दर 3.4 प्रतिशत रही, जो छह महीने में बढ़कर 7.2 प्रतिशत हो गई। हालांकि, छह महीने का फॉलोअप केवल 67 प्रतिशत मरीजों का उपलब्ध था। अस्पताल से छुट्टी मिलने तक 78 प्रतिशत मरीजों की कार्यक्षमता में सुधार हुआ और 89 प्रतिशत की स्थिति स्थिर रही।
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