{"_id":"6a3fd82e3fc6b02e7a024ebd","slug":"four-accused-acquitted-in-attempt-to-murder-case-delhi-ncr-news-c-340-1-del1004-142913-2026-06-27","type":"story","status":"publish","title_hn":"Delhi NCR News: हत्या की कोशिश के मामले में चार आरोपी बरी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Delhi NCR News: हत्या की कोशिश के मामले में चार आरोपी बरी
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
-अभियोजन पक्ष आरोप साबित करने में रहा नाकाम
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। पटियाला हाउस कोर्ट ने हत्या की कोशिश के एक मामले में चार आरोपी को बरी कर दिया। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश धीरेंद्र राणा ने परवेज, पुनीत और विनय सहित चार आरोपियों के खिलाफ दर्ज मामले की सुनवाई की। न्यायाधीश ने कहा कि अभियोजन पक्ष उनके खिलाफ लगाए गए आरोपों को संदेह से परे साबित करने में पूरी तरह नाकाम रहा।
अभियोजन पक्ष के अनुसार, 5 जुलाई 2017 को हुई बहस के बाद आरोपियों ने शिकायतकर्ता अमित पर हत्या की कोशिश की थी। सुनवाई के दौरान मुख्य शिकायतकर्ता कोर्ट में पेश नहीं हुए, जबकि उसे समन जारी किया गया था। कोर्ट ने कहा कि आपराधिक मामलों में आरोप साबित करने की जिम्मेदारी पूरी तरह अभियोजन पक्ष की होती है और अगर संदेह की कोई गुंजाइश रहती है तो उसका लाभ आरोपी को दिया जाना चाहिए। न्यायाधीश ने पाया कि इस मामले में शिकायतकर्ता और घायल व्यक्ति का बयान दर्ज नहीं हो सका।
विज्ञापन
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। पटियाला हाउस कोर्ट ने हत्या की कोशिश के एक मामले में चार आरोपी को बरी कर दिया। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश धीरेंद्र राणा ने परवेज, पुनीत और विनय सहित चार आरोपियों के खिलाफ दर्ज मामले की सुनवाई की। न्यायाधीश ने कहा कि अभियोजन पक्ष उनके खिलाफ लगाए गए आरोपों को संदेह से परे साबित करने में पूरी तरह नाकाम रहा।
अभियोजन पक्ष के अनुसार, 5 जुलाई 2017 को हुई बहस के बाद आरोपियों ने शिकायतकर्ता अमित पर हत्या की कोशिश की थी। सुनवाई के दौरान मुख्य शिकायतकर्ता कोर्ट में पेश नहीं हुए, जबकि उसे समन जारी किया गया था। कोर्ट ने कहा कि आपराधिक मामलों में आरोप साबित करने की जिम्मेदारी पूरी तरह अभियोजन पक्ष की होती है और अगर संदेह की कोई गुंजाइश रहती है तो उसका लाभ आरोपी को दिया जाना चाहिए। न्यायाधीश ने पाया कि इस मामले में शिकायतकर्ता और घायल व्यक्ति का बयान दर्ज नहीं हो सका।
विज्ञापन