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Sajjan Kumar Death: पहले किस मामले में मिली उम्रकैद, कब हुए बरी? 1984 दंगों के दूसरे केस में भी ठहरे थे दोषी

Thu, 20 Aug 2026 02:36 PM IST
Rahul Kumar Tiwari अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली Published by: Rahul Kumar Tiwari Updated Thu, 20 Aug 2026 02:36 PM IST
सार

Sajjan Kumar Death: सज्जन कुमार का निधन उस वक्त हुआ, जब वह 1984 सिख-विरोधी दंगों से जुड़े मामलों में उम्रकैद की सजा काट रहे थे। दिल्ली कैंट के पांच सिखों की हत्या से लेकर सरस्वती विहार हत्याकांड तक, जानिए कब-कब अदालतों में क्या हुआ और उन्हें किन मामलों में सजा मिली।

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Former MP Sanjay Kumar was serving two life sentences Comprehensive updates on all 1984 riots
Sajjan Kumar Death - फोटो : अमर उजाला GFX

विस्तार

Sajjan Kumar Death: पूर्व कांग्रेस सांसद और वरिष्ठ नेता सज्जन कुमार का निधन हो गया है। उन्हें तबीयत बिगड़ने के बाद दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। निधन के समय सज्जन कुमार 1984 के सिख-विरोधी दंगों से जुड़े मामलों में उम्रकैद की सजा काट रहे थे।

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सज्जन कुमार को 1984 के सिख-विरोधी दंगों से जुड़े दो अलग-अलग मामलों में उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी। इनमें पहली सजा दिसंबर 2018 में दिल्ली हाईकोर्ट ने सुनाई थी, जबकि दूसरी सजा फरवरी 2025 में दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने दी थी।

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पहले किस मामले में मिली थी उम्रकैद?
सज्जन कुमार को पहली बार दिल्ली कैंट इलाके में 1984 के दंगों के दौरान पांच सिखों की हत्या के मामले में उम्रकैद की सजा मिली थी। यह मामला एक और दो नवंबर 1984 को दिल्ली के राजनगर इलाके में हुई हिंसा से जुड़ा था। इस घटना में पांच सिखों की हत्या हुई थी और एक गुरुद्वारे को भी जला दिया गया था। 

इस मामले में दिल्ली की निचली अदालत ने 2013 में सज्जन कुमार को बरी कर दिया था। हालांकि, सीबीआई और पीड़ित पक्ष की अपील पर दिल्ली हाईकोर्ट ने निचली अदालत के फैसले को पलट दिया। 17 दिसंबर 2018 को हाईकोर्ट ने सज्जन कुमार को दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई। अदालत ने उनकी उम्रकैद को शेष जीवन तक जारी रहने वाली सजा बताया था। 

इस मामले में अदालत के सामने यह आरोप था कि सज्जन कुमार ने भीड़ को उकसाया, जिसके बाद दिल्ली कैंट के राजनगर इलाके में पांच सिखों की हत्या कर दी गई। मामले में उनके खिलाफ आपराधिक साजिश और हत्या समेत गंभीर आरोपों पर सुनवाई हुई थी।
 

दूसरी बार किस मामले में मिली उम्रकैद?
सज्जन कुमार को फरवरी 2025 में 1984 के दंगों से जुड़े एक दूसरे मामले में भी उम्रकैद की सजा सुनाई गई। यह मामला दिल्ली के सरस्वती विहार इलाके में जसवंत सिंह और उनके बेटे तरुणदीप सिंह की हत्या से जुड़ा था। दोनों की एक नवंबर 1984 को दंगों के दौरान हत्या कर दी गई थी। 

दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने 12 फरवरी 2025 को सज्जन कुमार को इस मामले में दोषी ठहराया था। इसके बाद 25 फरवरी 2025 को विशेष न्यायाधीश कावेरी बावेजा ने उन्हें उम्रकैद की सजा सुनाई। अभियोजन पक्ष ने उनके लिए मृत्युदंड की मांग की थी, लेकिन अदालत ने उम्रकैद की सजा दी। 

इस मामले में अभियोजन पक्ष का आरोप था कि सज्जन कुमार ने भीड़ को उकसाया, जिसके बाद जसवंत सिंह और उनके बेटे तरुणदीप सिंह की हत्या कर दी गई। मामले में उनके घर में लूटपाट और आगजनी के भी आरोप थे। 
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2013 में निचली अदालत से हुए थे बरी
सज्जन कुमार के खिलाफ 1984 के दंगों से जुड़े मामलों में लंबे समय तक कानूनी कार्रवाई चलती रही। दिल्ली कैंट के पांच सिखों की हत्या वाले मामले में निचली अदालत ने 2013 में उन्हें बरी कर दिया था। बाद में दिल्ली हाईकोर्ट ने इस फैसले को पलटते हुए उन्हें दोषी ठहराया और उम्रकैद की सजा दी।  यही मामला सज्जन कुमार की कानूनी स्थिति में बड़ा मोड़ माना गया। 2018 में हाईकोर्ट के फैसले के बाद उन्हें जेल जाना पड़ा और वह तिहाड़ जेल में उम्रकैद की सजा काट रहे थे। 

घटनाक्रम:
  • 31 अक्तूबर 1984: तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या।
  • 1-2 नवंबर  1984: इसके बाद भड़के दंगों में राजनगर इलाके में भीड़ ने पांच सिखों की हत्या कर दी।
  • मई 2000: दंगों की जांच के लिये जीटी नानावती कमीशन का गठन।
  • दिसंबर 2002: सेशन कोर्ट ने सज्जन कुमार को एक मामले में बरी कर दिया था।
  • 24 अक्तूबर 2005: जीटी नानावती कमीशन की सिफारिश पर सीबीआई ने दूसरा मामला दर्ज किया।
  • 1 फरवरी 2010: ट्रायल कोर्ट ने सज्जन कुमार को समन किया।      
  • 24 मई: ट्रायल कोर्ट ने चार्ज फ्रेम किया।      
  • अप्रैल 2013: अदालत ने सज्जन कुमार को इस मामले में बरी किया।      
  • 19 जुलाई 2013: सीबीआई ने निचली अदालत के फैसले के खिलाफ हाई कोर्ट में याचिका दायर की।      
  • 22 जुलाई 2013: हाई कोर्ट ने सज्जन कुमार को नोटिस जारी किया।      
  • 29 अक्तूबर 2018: हाई कोर्ट ने फैसला सुरक्षित किया।      
  • 17 दिसंबर 2018: हाई कोर्ट ने सज्जन कुमार को दोषी करार देते हुये आजीवन कारावास की सजा सुनाई।
  • 12 फरवरी, 2025 को भी दोषी ठहराए गए।
  • 25 फरवरी को उन्हें उम्रकैद की सजा सुनाई गई।
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