हिंसा या बीमारी: तिहाड़ जेल में आठ दिनों में पांच कैदियों की मौत, सभी मामलों की हो रही जांच
शुक्रवार को विक्रम नाम का कैदी अपने सेल में अचेत अवस्था में मिला था। उसे जेल के अस्पताल में ले जाया गया। जहां उसे मृत घोषित कर दिया गया। विक्रम पर झपटमारी, चोरी और लूट के कई मामले दर्ज थे और वह जेल संख्या तीन में बंद था। मामले की मजिस्ट्रेट जांच चल रही है। इ
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तिहाड़ जेल में पिछले आठ दिन में पांच कैदियों की मौत का मामला सामने आया है। जेल अधिकारियों का कहना है कि किसी भी कैदी की मौत हिंसा की वजह से नहीं हुई है। उनके मुताबिक कैदियों की मौत का कारण पुरानी बीमारी या अन्य वजह से हुई है। जिसकी जांच की जा रही है।
शुक्रवार को विक्रम नाम का कैदी अपने सेल में अचेत अवस्था में मिला था। उसे जेल के अस्पताल में ले जाया गया। जहां उसे मृत घोषित कर दिया गया। विक्रम पर झपटमारी, चोरी और लूट के कई मामले दर्ज थे और वह जेल संख्या तीन में बंद था। मामले की मजिस्ट्रेट जांच चल रही है। इससे पहले 20 दिसंबर को जेल संख्या आठ में बंद नूर आलम की संदिग्ध हालत में मौत हो गई। उसे घटना के चार दिन पहले ही जेल में लाया गया था। उसे बवाना थाना पुलिस ने चोरी के मामले में गिरफ्तार किया था। जब उसकी गिरफ्तारी हुई थी तब उसके पैर में प्लास्टर था। नूर ने पूछताछ में बताया था कि कबाड़ी का काम करने के दौरान उसे चोट लगी थी।
23 दिसंबर को भी एक कैदी नहाने के बाद बाहर आया। जहां वह गिरकर अचेत हो गया। उसे जेल के अस्पताल में भर्ती कराया गया। जहां उसे मृत घोषित कर दिया गया। बताया जा रहा है कि मृत कैदी को बीमारी थी। इसी तरह से दो अन्य कैदियों की मौत हुई है। जेल प्रशासन इन सभी कैदियों के पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार कर रही है।
तिहाड़ के हाई रिस्क सेल में बंद कैदियों ने दो कैदियों की पिटाई की
तिहाड़ जेल संख्या आठ-नौ के हाई रिस्क सेल में बंद कैदियों ने शुक्रवार शाम एक विचाराधीन कैदी की पिटाई कर दी। बीच बचाव में आए एक अन्य कैदी को आरोपियों ने पीट पीट कर अधमरा कर दिया। घायल कैदियों को इलाज के लिए दीनदयाल उपाध्याय अस्पताल में भर्ती कराया गया। हरिनगर थाना पुलिस ने पीड़ित कैदी के बयान पर मारपीट का मामला दर्ज कर जांच कर रही है।
शुक्रवार शाम पुलिस को दीनदयाल उपाध्याय अस्पताल से दो कैदियों की पिटाई किए जाने की सूचना मिली। सूचना मिलते ही पुलिस अस्पताल पहुंची। जहां पुलिस ने मारुफ और नीरज को उपचाराधीन पाया। मारुफ ने पुलिस को दिए बयान में बताया कि वह जामिया नगर बाटला हाउस की झुग्गी में रहता है। गाजीपुर थाने के एक मामले में वह जेल संख्या 8-9 में बंद है।
शुक्रवार शाम वह अपने मामले के सिलसिले में ड्योढी पर वकील से मिलने गया था। जहां पर हाईरिस्क सेल में बंद दो विचाराधीन कैदी नीरज की पिटाई कर रहे थे। वह नीरज का बचाव करने के लिए वहां पहुंचा। उसके बचाव करने से नाराज दोनों आरोपी कैदी नीरज को छोडकर उसकी लात घूंसों से पिटाई करने लगे। जिससे उसे काफी चोट आई।
मारपीट करते देख जेल कर्मी वहां पहुंचे, जिन्हें देखकर आरोपी कैदी वहां से भाग गए। पीड़ित ने बताया कि वह हमला करने वाले कैदियों को नहीं पहचानते हैं। लेकिन सामने आने पर उनकी पहचान कर लेंगे। जेल कर्मियों ने घायल नीरज और मारुफ को इलाज के लिए दीनदयाल उपाध्याय अस्पताल पहुंचाया।
मारुफ के बयान पर पुलिस ने अज्ञात कैदियों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले की जांच की जा रही है और हमला करने वाले बदमाशों की पहचान कर उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।