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Delhi NCR News: जेएनयू की 11 छात्राओं से यौन उत्पीड़न के आरोप में बर्खास्त प्रोफेसर और कांग्रेस सांसद पर प्राथमिकी दर्ज
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- जेएनयू के प्रोफेसर अंगोमचा बिमल अकोइजाम के खिलाफ वसंत कुंज नॉर्थ थाने में दर्ज की गई, मणिपुर से हैं सांसद
- नौ अक्तूबर को विश्वविद्यालय ने सेवा से किया था बर्खास्त, 11 अक्तूबर को पुलिस को दी गई शिकायत
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली।
जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) के बर्खास्त प्रोफेसर और कांग्रेस के लोकसभा सांसद अंगोमचा बिमल अकोइजाम पर छात्राओं के यौन उत्पीड़न के आरोप में दक्षिण-पश्चिमी जिला पुलिस ने वसंतकुंज (नार्थ) में प्राथमिकी दर्ज की है। उन पर 11 छात्राओं के यौन-उत्पीड़न के गंभीर आरोप हैं। पुलिस ने जेएनयू की आंतरिक समिति की जांच रिपोर्ट और मुख्य सुरक्षा अधिकारी की ओर से सौंपे गए दस्तावेजों के आधार पर प्राथमिकी दर्ज की गई है। आंतरिक समिति की रिपोर्ट में प्रोफेसर पर अनुचित व्यक्तिगत व्यवहार, यौन संकेत देने वाले आचरण और छात्राओं के साथ अवांछित शारीरिक संपर्क के आरोपों का उल्लेख है। जांच के लिए पुलिस की अलग टीम बनाई गई है।
दक्षिण-पश्चिमी जिला पुलिस अधिकारियों के अनुसार जेएनयू के मुख्य सुरक्षा अधिकारी ने 11 अक्तूबर को आंतरिक समिति की जांच रिपोर्ट, निष्कर्ष और संबंधित दस्तावेज सौंपकर एफआईआर दर्ज करने की मांग की थी। दस्तावेजों की समीक्षा और विशेषज्ञों से राय लेने के बाद पुलिस ने मामला दर्ज किया। एफआईआर में वारदात की अवधि 15 जुलाई 2025 से छह मई 2026 तक बताई गई है। शिकायत में घटनास्थल के तौर पर जेएनयू के स्कूल ऑफ सोशल साइंसेज स्थित सेंटर फॉर स्टडीज ऑफ सोशल सिस्टम्स और अन्य स्थानों का उल्लेख किया गया है।
समिति की रिपोर्ट को पुलिस ने बनाया आधार : पुलिस सूत्रों ने बताया कि दिल्ली पुलिस ने जेएनयू प्रशासन द्वारा आरोप लगने के बाद बनाई गई समिति की रिपोर्ट को आधार बनाकर प्राथमिकी दर्ज की है। प्राथमिकी के अनुसार आंतरिक समिति ने शिकायतकर्ताओं के बयान, गवाहों के पक्ष, प्रोफेसर की ओर से दिए गए स्पष्टीकरण और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों का आकलन किया था। रिपोर्ट में कहा गया है कि समिति ने आरोपों को सही पाते हुए उनके व्यवहार को अनुचित बताया। इसमें कहा गया कि यौन संकेत देने वाले आचरण और अवांछित शारीरिक संपर्क से महिला विद्यार्थियों के साथ पेशेवर मर्यादाओं का उल्लंघन हुआ। इससे उनके लिए डराने वाला, अपमानजनक और प्रतिकूल शैक्षणिक माहौल बना। समिति ने यह भी कहा कि आचरण की प्रकृति और शिकायतकर्ताओं पर उसके प्रभाव को ध्यान में रखना जरूरी है।
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नौ अक्तूबर को विश्वविद्यालय ने किया बर्खास्त : आंतरिक समिति ने अपनी रिपोर्ट में विश्वविद्यालय के सेवा नियमों के तहत बड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की सिफारिश की थी। इसके बाद जेएनयू प्रशासन ने नौ अक्तूबर को प्रोफेसर को सेवा से बर्खास्त करने का आदेश जारी किया। इसके दो दिन बाद मुख्य सुरक्षा अधिकारी ने पुलिस को शिकायत सौंपी। अब पुलिस एफआईआर में दर्ज आरोपों और उपलब्ध साक्ष्यों की जांच कर रही है।
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- नौ अक्तूबर को विश्वविद्यालय ने सेवा से किया था बर्खास्त, 11 अक्तूबर को पुलिस को दी गई शिकायत
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली।
जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) के बर्खास्त प्रोफेसर और कांग्रेस के लोकसभा सांसद अंगोमचा बिमल अकोइजाम पर छात्राओं के यौन उत्पीड़न के आरोप में दक्षिण-पश्चिमी जिला पुलिस ने वसंतकुंज (नार्थ) में प्राथमिकी दर्ज की है। उन पर 11 छात्राओं के यौन-उत्पीड़न के गंभीर आरोप हैं। पुलिस ने जेएनयू की आंतरिक समिति की जांच रिपोर्ट और मुख्य सुरक्षा अधिकारी की ओर से सौंपे गए दस्तावेजों के आधार पर प्राथमिकी दर्ज की गई है। आंतरिक समिति की रिपोर्ट में प्रोफेसर पर अनुचित व्यक्तिगत व्यवहार, यौन संकेत देने वाले आचरण और छात्राओं के साथ अवांछित शारीरिक संपर्क के आरोपों का उल्लेख है। जांच के लिए पुलिस की अलग टीम बनाई गई है।
दक्षिण-पश्चिमी जिला पुलिस अधिकारियों के अनुसार जेएनयू के मुख्य सुरक्षा अधिकारी ने 11 अक्तूबर को आंतरिक समिति की जांच रिपोर्ट, निष्कर्ष और संबंधित दस्तावेज सौंपकर एफआईआर दर्ज करने की मांग की थी। दस्तावेजों की समीक्षा और विशेषज्ञों से राय लेने के बाद पुलिस ने मामला दर्ज किया। एफआईआर में वारदात की अवधि 15 जुलाई 2025 से छह मई 2026 तक बताई गई है। शिकायत में घटनास्थल के तौर पर जेएनयू के स्कूल ऑफ सोशल साइंसेज स्थित सेंटर फॉर स्टडीज ऑफ सोशल सिस्टम्स और अन्य स्थानों का उल्लेख किया गया है।
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समिति की रिपोर्ट को पुलिस ने बनाया आधार : पुलिस सूत्रों ने बताया कि दिल्ली पुलिस ने जेएनयू प्रशासन द्वारा आरोप लगने के बाद बनाई गई समिति की रिपोर्ट को आधार बनाकर प्राथमिकी दर्ज की है। प्राथमिकी के अनुसार आंतरिक समिति ने शिकायतकर्ताओं के बयान, गवाहों के पक्ष, प्रोफेसर की ओर से दिए गए स्पष्टीकरण और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों का आकलन किया था। रिपोर्ट में कहा गया है कि समिति ने आरोपों को सही पाते हुए उनके व्यवहार को अनुचित बताया। इसमें कहा गया कि यौन संकेत देने वाले आचरण और अवांछित शारीरिक संपर्क से महिला विद्यार्थियों के साथ पेशेवर मर्यादाओं का उल्लंघन हुआ। इससे उनके लिए डराने वाला, अपमानजनक और प्रतिकूल शैक्षणिक माहौल बना। समिति ने यह भी कहा कि आचरण की प्रकृति और शिकायतकर्ताओं पर उसके प्रभाव को ध्यान में रखना जरूरी है।
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नौ अक्तूबर को विश्वविद्यालय ने किया बर्खास्त : आंतरिक समिति ने अपनी रिपोर्ट में विश्वविद्यालय के सेवा नियमों के तहत बड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की सिफारिश की थी। इसके बाद जेएनयू प्रशासन ने नौ अक्तूबर को प्रोफेसर को सेवा से बर्खास्त करने का आदेश जारी किया। इसके दो दिन बाद मुख्य सुरक्षा अधिकारी ने पुलिस को शिकायत सौंपी। अब पुलिस एफआईआर में दर्ज आरोपों और उपलब्ध साक्ष्यों की जांच कर रही है।