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Faridabad News: गंदे पानी को शोधित करने के लिए संयंत्र लगेंगे
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-औद्योगिक रसायन युक्त पानी की जांच के बाद सीईटीपी का डीपीआर बना रहा
अमर उजाला ब्यूरो
फरीदाबाद। औद्योगिक इकाईयों से निकलने वाले गंदे पानी को शोधित करने के लिए शहर में तीन सीईटीपी (कॉमन इंफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट) की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) बनाई जा रही है। उद्योगाें से निकलने वाले गंदे पानी की लैब में जांच के आधार पर संयंत्रों का डीपीआर बनवाया जा रहा है। इसके पूरा होने में एक माह का समय लगेगा। तीनों संयंत्रों से 90 एमएलडी पानी शोधित होगा।
एचएसआईआईडीसी (हरियाणा स्टेट इंडस्ट्रियल एंड इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट काॅर्पोरेशन) के एसडीओ हरि किशन ने बताया कि प्रतापगढ़ में 12 एकड़ में 50 एमएलडी का संयंत्र बनाया जाना है। वहीं, मिर्जापुर में 10 एकड़ में 25 एमएलडी और बादशाहपुर में पांच एकड़ में 15 एमएलडी का सीईटीपी बनाया जाना है। उन्होंने बताया कि डीपीआर तैयार कराने से पहले उद्योगों से निकलने वाले पानी की जांच कराई गई। उन्होंने बताया कि इसमें पानी में मिलने रसायनों समेत अन्य का अध्ययन करने के बाद सीईटीपी की डिजाइन तैयार कराई जा रही है। एसडीओ ने बताया कि कंसलटेंट एक माह में तीनों का डीपीआर तैयार कर देगा। इसके बाद इसे बनाने के लिए टेंडर जारी होगा। इप पर करीब तीन से चार सौ करोड़ का खर्च आने का अनुमान है।
अभी नहीं पर्याप्त इंतजाम
जिले में करीब 28 हजार छोटी-बड़ी औद्योगिक इकाईयां हैं। इसके अलावा काफी बगैर पंजीकृत इकाईयां भी हैं। औद्योगिक इकाईयों से निकलने वाले गंदे पानी को साफ करने में घरेलू सीवर शोधन संयंत्र (एसटीपी) पूरी तरह से कारगर नहीं हैं। वहीं, जिले में डाई यूनिटें, कैमिकल फैक्ट्रियां व एल्युमिनियम की कंपनियां भी हैं। उद्योगों का कई बार गंदा पानी भी सीवर लाइनों के जरिए एसटीपी में पहुंच रहा है। इसे देखते हुए औद्योगिक गंदे पानी को साफ करने के लिए अलग से सीईटीपी की जरूरत है। अभी एक आईएमटी में लगा है।
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यमुना का पानी हो रहा दूषित
एनजीटी और प्रदूषण बोर्ड का सख्त निर्देश है कि यमुना नदी में शोधित पानी को ही डाला जाए लेकिन जिले में पर्याप्त सीवर शोधन संयंत्र नहीं होने से सैकड़ों लीटर पानी नालों के जरिए यमुना में गिर रहा है। उद्योगों का गंदा पानी चोरी छिपे नालों में डाल दिया जाता है। यमुना एक्शन प्लॉन के तहत घरेलू और औद्योगिक इकाईयों से निकलने वाले गंदे पानी को 100 फीसदी शोधित करने हैं।
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फरीदाबाद। औद्योगिक इकाईयों से निकलने वाले गंदे पानी को शोधित करने के लिए शहर में तीन सीईटीपी (कॉमन इंफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट) की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) बनाई जा रही है। उद्योगाें से निकलने वाले गंदे पानी की लैब में जांच के आधार पर संयंत्रों का डीपीआर बनवाया जा रहा है। इसके पूरा होने में एक माह का समय लगेगा। तीनों संयंत्रों से 90 एमएलडी पानी शोधित होगा।
एचएसआईआईडीसी (हरियाणा स्टेट इंडस्ट्रियल एंड इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट काॅर्पोरेशन) के एसडीओ हरि किशन ने बताया कि प्रतापगढ़ में 12 एकड़ में 50 एमएलडी का संयंत्र बनाया जाना है। वहीं, मिर्जापुर में 10 एकड़ में 25 एमएलडी और बादशाहपुर में पांच एकड़ में 15 एमएलडी का सीईटीपी बनाया जाना है। उन्होंने बताया कि डीपीआर तैयार कराने से पहले उद्योगों से निकलने वाले पानी की जांच कराई गई। उन्होंने बताया कि इसमें पानी में मिलने रसायनों समेत अन्य का अध्ययन करने के बाद सीईटीपी की डिजाइन तैयार कराई जा रही है। एसडीओ ने बताया कि कंसलटेंट एक माह में तीनों का डीपीआर तैयार कर देगा। इसके बाद इसे बनाने के लिए टेंडर जारी होगा। इप पर करीब तीन से चार सौ करोड़ का खर्च आने का अनुमान है।
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अभी नहीं पर्याप्त इंतजाम
जिले में करीब 28 हजार छोटी-बड़ी औद्योगिक इकाईयां हैं। इसके अलावा काफी बगैर पंजीकृत इकाईयां भी हैं। औद्योगिक इकाईयों से निकलने वाले गंदे पानी को साफ करने में घरेलू सीवर शोधन संयंत्र (एसटीपी) पूरी तरह से कारगर नहीं हैं। वहीं, जिले में डाई यूनिटें, कैमिकल फैक्ट्रियां व एल्युमिनियम की कंपनियां भी हैं। उद्योगों का कई बार गंदा पानी भी सीवर लाइनों के जरिए एसटीपी में पहुंच रहा है। इसे देखते हुए औद्योगिक गंदे पानी को साफ करने के लिए अलग से सीईटीपी की जरूरत है। अभी एक आईएमटी में लगा है।
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यमुना का पानी हो रहा दूषित
एनजीटी और प्रदूषण बोर्ड का सख्त निर्देश है कि यमुना नदी में शोधित पानी को ही डाला जाए लेकिन जिले में पर्याप्त सीवर शोधन संयंत्र नहीं होने से सैकड़ों लीटर पानी नालों के जरिए यमुना में गिर रहा है। उद्योगों का गंदा पानी चोरी छिपे नालों में डाल दिया जाता है। यमुना एक्शन प्लॉन के तहत घरेलू और औद्योगिक इकाईयों से निकलने वाले गंदे पानी को 100 फीसदी शोधित करने हैं।