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जर्जर हाल में बापू नगर और डबुआ कॉलोनी के फ्लैट
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फरीदाबाद। खोरी गांव में तोड़फोड़ की कार्रवाई से बेघर हुए लोगों को सुप्रीम कोर्ट से राहत जरूर मिली है। लेकिन सरकार ने लोगों को जो फ्लैट देने की घोषणा की है। उनकी हालत अभी भी जर्जर है। पार्क में गंदगी के ढेर लगे हैं। जगह-जगह गंदा पानी भरा है। निगम की ओर से अब तक मरम्मत समेत कोई काम नहीं कराया गया है।
लोगों का कहना है कि सरकार बेहतर व्यवस्था के साथ जल्द घर सौंपे। एनबीसीसी ने जवाहर लाल नेहरू नेशनल अर्बन मिशन के तहत करीब 11 वर्ष पूर्व बापू नगर में 1280 मकान बनाए थे, इनमें से 149 मकान जरूरतमंद लोगों को अलॉट कर दिए गए थे। ऐसे ही डबुआ कॉलोनी में बनाए गए 1968 में से 203 मकान अलॉट किए गए थे। कुछ मकान अन्य जरूरतमंद लोगों को दे दिए गए थे। अब यहां करीब 2500 फ्लैट है। इन फ्लैटों की मौजूदा हालात की बात करें, कई मकान यहां जर्जर हालत में हैं।
पार्क के लिए जगह है, मगर पार्क विकसित नहीं हैं। पार्कों में गंदगी के ढेर लगे हैं, पानी भरा हुआ है और पशु घूमते रहते हैं। शौचालय की सीट और दरवाजे टूटे हैं। कई मकानों के दरवाजे नहीं हैं। खिड़कियां टूटी हुई हैं। पिछले साल प्रधानमंत्री आवास योजना की टीम ने यहां दौरा किया था। नगर निगम के साथ जब यह टीम डबुआ कालोनी में गई थी, तो उस समय चर्चा हुई थी। खोरी में तोड़फोड़ कार्रवाई से पहले भी निगम अधिकारियों ने फ्लैटों की जल्द मरम्मत कराने की बात कही थी। करीब दो माह बीतने के बाद भी कोई काम शुरू नहीं हुआ है।
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वर्जन
डबुआ कॉलोनी और बापू नगर में बने ईडब्ल्यूएस के फ्लैटों का जल्द मरम्मत कार्य शुरू कराया गया है। इसके बाद इन्हें खोरी के लोगों को सौंपा जा सकता है। - यशपाल यादव, निगमायुक्त
डबुआ कॉलोनी में हम रह नहीं सकते हैं। वहां गंदगी बहुत ज्यादा है। हमारा जितना घर तोड़ा है। उसके बराबर घर दिया जाए। जिसमें हम गुजारा कर सके। एक लोगों का परिवार एक फ्लैट में नहीं रह पाएगा। - सपना गुप्ता, खोरी से विस्थापित
खोरी में तोड़फोड़ से पहले फ्लैट के लिए नगर निगम में आवेदन किया था। अब तक कुछ नहीं हुआ। मजबूरन किराये पर रहना पड़ रहा है। मकान का किराया भी निगम ने देने का आश्वासन दिया था। वह भी नहीं मिला। - शारदा देवी, खोरी से विस्थापित
महंगे किराये से बचने के लिए हम अपने टूट आशियाने की जगह पर ही टेंट लगा कर रह रहे हैं। अधिकारियों ने फ्लैट देने का आश्वासन दिया था। मौके पर जाकर फ्लैट की हालात देखी तो बेहद खराब है। - विभा देवी, खोरी से विस्थापित
नगर निगम को तोड़फोड़ कार्रवाई से पहले लोगों को फ्लैट देने चाहिए था। उसके बाद कार्रवाई करनी चाहिए थी। अब फ्लैट की उम्मीद लगाए बैठे हैं कब मिलेगा पता नहीं। - अनिता, खोरी से विस्थापित
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लोगों का कहना है कि सरकार बेहतर व्यवस्था के साथ जल्द घर सौंपे। एनबीसीसी ने जवाहर लाल नेहरू नेशनल अर्बन मिशन के तहत करीब 11 वर्ष पूर्व बापू नगर में 1280 मकान बनाए थे, इनमें से 149 मकान जरूरतमंद लोगों को अलॉट कर दिए गए थे। ऐसे ही डबुआ कॉलोनी में बनाए गए 1968 में से 203 मकान अलॉट किए गए थे। कुछ मकान अन्य जरूरतमंद लोगों को दे दिए गए थे। अब यहां करीब 2500 फ्लैट है। इन फ्लैटों की मौजूदा हालात की बात करें, कई मकान यहां जर्जर हालत में हैं।
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पार्क के लिए जगह है, मगर पार्क विकसित नहीं हैं। पार्कों में गंदगी के ढेर लगे हैं, पानी भरा हुआ है और पशु घूमते रहते हैं। शौचालय की सीट और दरवाजे टूटे हैं। कई मकानों के दरवाजे नहीं हैं। खिड़कियां टूटी हुई हैं। पिछले साल प्रधानमंत्री आवास योजना की टीम ने यहां दौरा किया था। नगर निगम के साथ जब यह टीम डबुआ कालोनी में गई थी, तो उस समय चर्चा हुई थी। खोरी में तोड़फोड़ कार्रवाई से पहले भी निगम अधिकारियों ने फ्लैटों की जल्द मरम्मत कराने की बात कही थी। करीब दो माह बीतने के बाद भी कोई काम शुरू नहीं हुआ है।
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डबुआ कॉलोनी और बापू नगर में बने ईडब्ल्यूएस के फ्लैटों का जल्द मरम्मत कार्य शुरू कराया गया है। इसके बाद इन्हें खोरी के लोगों को सौंपा जा सकता है। - यशपाल यादव, निगमायुक्त
डबुआ कॉलोनी में हम रह नहीं सकते हैं। वहां गंदगी बहुत ज्यादा है। हमारा जितना घर तोड़ा है। उसके बराबर घर दिया जाए। जिसमें हम गुजारा कर सके। एक लोगों का परिवार एक फ्लैट में नहीं रह पाएगा। - सपना गुप्ता, खोरी से विस्थापित
खोरी में तोड़फोड़ से पहले फ्लैट के लिए नगर निगम में आवेदन किया था। अब तक कुछ नहीं हुआ। मजबूरन किराये पर रहना पड़ रहा है। मकान का किराया भी निगम ने देने का आश्वासन दिया था। वह भी नहीं मिला। - शारदा देवी, खोरी से विस्थापित
महंगे किराये से बचने के लिए हम अपने टूट आशियाने की जगह पर ही टेंट लगा कर रह रहे हैं। अधिकारियों ने फ्लैट देने का आश्वासन दिया था। मौके पर जाकर फ्लैट की हालात देखी तो बेहद खराब है। - विभा देवी, खोरी से विस्थापित
नगर निगम को तोड़फोड़ कार्रवाई से पहले लोगों को फ्लैट देने चाहिए था। उसके बाद कार्रवाई करनी चाहिए थी। अब फ्लैट की उम्मीद लगाए बैठे हैं कब मिलेगा पता नहीं। - अनिता, खोरी से विस्थापित