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Faridabad News: कबाड़ से करोड़ों का कारोबार
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फैक्टरियों से निकलने वाले स्क्रैप से ऑटो पार्ट्स, चप्पलें और रबर टाइल्स बनाई जा रहीं
संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद। औद्योगिक नगरी फरीदाबाद में इंडस्ट्रियल वेस्ट को लेकर एक बड़ा व्यापारिक बदलाव देखने को मिल रहा है। शहर की फैक्टरियों से निकलने वाले स्क्रैप को अब कचरा समझकर फेंकने के बजाय बड़े पैमाने पर रीसायकल किया जा रहा है। सेक्टर-24, 25, 58 और बल्लभगढ़ जैसे प्रमुख औद्योगिक क्षेत्रों में इस कबाड़ से करोड़ों रुपये का संगठित व्यापार खड़ा हो चुका है, जो स्थानीय अर्थव्यवस्था को नई मजबूती दे रहा है।
फरीदाबाद देश का एक बड़ा ऑटोमोबाइल और ट्रैक्टर विनिर्माण हब है। फैक्ट्रियों में शीट-मेटल की कटिंग और इंजीनियरिंग काम के दौरान भारी मात्रा में वेस्ट लोहा और एल्युमिनियम का बुरादा निकलता है। स्थानीय रीसाइक्लिंग इकाइयां और फाउंड्रीज इस कबाड़ को खरीदकर अपनी भट्ठियों में पिघला रहीं हैं। इस पिघले हुए कच्चे माल से दोबारा बेहद सस्ते ऑटो पार्ट्स, गियर और ट्रैक्टरों के कलपुर्जे तैयार किए जा रहे हैं, जिनकी बाजार में भारी मांग है।
लोहे के अलावा बल्लभगढ़ बेल्ट की फुटवियर और टायर कंपनियों से निकलने वाले रबर वेस्ट का भी औद्योगिक स्तर पर सदुपयोग किया जा रहा है। इस वेस्ट रबर को मशीनों में क्रश करने के बाद रीसायकल किया जाता है। इस सामग्री से रोजमर्रा के इस्तेमाल की सस्ती हवाई चप्पलें, उद्योगों में बिछने वाली एंटी-स्लिप मैट और खेल के मैदानों की रबर टाइल्स बनाई जा रही हैं।
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उत्पादन लागत घटने से उद्यमियों को बड़ी राहत
कारोबारी वीरभान शर्मा, पवन गुप्ता, राकेश मिश्रा और आर के भाटी ने बताया कि कच्चे माल की बढ़ती कीमतों के बीच फरीदाबाद के सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योगों के लिए यह रीसाइक्लिंग मॉडल बेहद फायदेमंद साबित हो रहा है। इस कबाड़ से तैयार माल के उपयोग के कारण उद्यमियों की कुल उत्पादन लागत कई फीसदी तक कम हो गई है। यह व्यवस्था न केवल उद्योगों का मुनाफा बढ़ा रही है, बल्कि फरीदाबाद को एक जीरो-वेस्ट इंडस्ट्रियल टाउन बनाने की दिशा में भी मददगार साबित हो रही है।
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संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद। औद्योगिक नगरी फरीदाबाद में इंडस्ट्रियल वेस्ट को लेकर एक बड़ा व्यापारिक बदलाव देखने को मिल रहा है। शहर की फैक्टरियों से निकलने वाले स्क्रैप को अब कचरा समझकर फेंकने के बजाय बड़े पैमाने पर रीसायकल किया जा रहा है। सेक्टर-24, 25, 58 और बल्लभगढ़ जैसे प्रमुख औद्योगिक क्षेत्रों में इस कबाड़ से करोड़ों रुपये का संगठित व्यापार खड़ा हो चुका है, जो स्थानीय अर्थव्यवस्था को नई मजबूती दे रहा है।
फरीदाबाद देश का एक बड़ा ऑटोमोबाइल और ट्रैक्टर विनिर्माण हब है। फैक्ट्रियों में शीट-मेटल की कटिंग और इंजीनियरिंग काम के दौरान भारी मात्रा में वेस्ट लोहा और एल्युमिनियम का बुरादा निकलता है। स्थानीय रीसाइक्लिंग इकाइयां और फाउंड्रीज इस कबाड़ को खरीदकर अपनी भट्ठियों में पिघला रहीं हैं। इस पिघले हुए कच्चे माल से दोबारा बेहद सस्ते ऑटो पार्ट्स, गियर और ट्रैक्टरों के कलपुर्जे तैयार किए जा रहे हैं, जिनकी बाजार में भारी मांग है।
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लोहे के अलावा बल्लभगढ़ बेल्ट की फुटवियर और टायर कंपनियों से निकलने वाले रबर वेस्ट का भी औद्योगिक स्तर पर सदुपयोग किया जा रहा है। इस वेस्ट रबर को मशीनों में क्रश करने के बाद रीसायकल किया जाता है। इस सामग्री से रोजमर्रा के इस्तेमाल की सस्ती हवाई चप्पलें, उद्योगों में बिछने वाली एंटी-स्लिप मैट और खेल के मैदानों की रबर टाइल्स बनाई जा रही हैं।
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उत्पादन लागत घटने से उद्यमियों को बड़ी राहत
कारोबारी वीरभान शर्मा, पवन गुप्ता, राकेश मिश्रा और आर के भाटी ने बताया कि कच्चे माल की बढ़ती कीमतों के बीच फरीदाबाद के सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योगों के लिए यह रीसाइक्लिंग मॉडल बेहद फायदेमंद साबित हो रहा है। इस कबाड़ से तैयार माल के उपयोग के कारण उद्यमियों की कुल उत्पादन लागत कई फीसदी तक कम हो गई है। यह व्यवस्था न केवल उद्योगों का मुनाफा बढ़ा रही है, बल्कि फरीदाबाद को एक जीरो-वेस्ट इंडस्ट्रियल टाउन बनाने की दिशा में भी मददगार साबित हो रही है।