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विरोध के बीच 480 अवैध निर्माण धराशायी
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फरीदाबाद। न्यू टाउन रेलवे स्टेशन के समीप बसे 60 साल पुराने संजय नगर में बुधवार को रेलवे का बुलडोजर चला। इस दौरान रेल विभाग के तोड़फोड़ दस्ते ने करीब 480 मकानों को ध्वस्त कर दिए, जबकि 250 मकान बच गए। मकान तोड़े जाने पर लोगों ने कार्रवाई का विरोध किया। रेलवे अधिकारियों के कार्यालय का घेराव किया, लेकिन अधिकारियों ने उनकी एक न सुनी और खदेड़ दिया।
लोगों के समर्थन में कांग्रेस नेता बलजीत कौशिक भी पहुंचे। पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया। लोगों का आरोप है कि सुप्रीम कोर्ट के स्टे के बावजूद मकानों को तोड़ा गया है। संजय नगर में बुुधवार सुबह रेल विभाग का तोड़फोड़ दस्ता भारी पुलिस के साथ पहुंचा। इसे देख कर लोग सहम गए। कुछ लोग अपने झुग्गी/मकानों को खाली करने लगे तो कई घरों के अंदर ही रहे। सुबह करीब 10 बजे चार जेसीबी की सहायता से रेलवे ने तोड़फोड़ कार्रवाई शुरू की। कुछ लोग जेसीबी पर चढ़ गए।
लोग बोले, घरों को उजड़ने नहीं देंगे
लोगों ने कहा कि मर जाएंगे लेकिन घरों को उजड़ने नहीं देंगे। पुलिस ने उन्हें बलपूर्वक जेसीबी से उतारा और कार्रवाई शुरू कराई। लोगों ने कहा कि 60 साल से रह रहे हैं। लाखों रुपये लगा कर जमीन खरीदी है। जब रहने लगे तो रेलवे ने उजाड़ रहा है। ऐसे में अब वह कहां जाएंगे। तोड़फोड़ से पहले रेलवे को उन्हें रहने के लिए मकान देने चाहिए थे।
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सरकार पुनर्वास के बारे में चिंतित नहीं
सामाजिक कार्यकर्ता दीनदयाल गौतम ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट के द्वारा संजय नगर झुग्गी बस्ती को स्टे दे दिया है। इसके बाद भी रेलवे ने बस्ती को तोड़ दिया। उन्होंने ने बताया कि कई साथियों को पुलिस ने हिरासत में ले लिया है। जबकि वह तो प्रयास कर रहे थे कि सुप्रीम कोर्ट का आदेश रेलवे प्रशासन तक पहुंचाया जाए। निर्मल गोराना ने आरोप लगाया है कि फरीदाबाद में जिस गति से मजदूरों के घर उजाड़े जा रहे हैं उस गति से सरकार पुनर्वास के बारे में चिंतित नहीं है। याचिकाकर्ता दीपक शर्मा ने बताया कि हरियाणा सरकार मजदूर विरोधी है। जबकि पुनर्वास हमारा अधिकार है।
संजय नगर में साढ़े सात सौ मकान
संजय नगर में करीब साढ़े सात सौ मकान बने हुए हैं। इनमें करीब 3500 लोग निवास करते थे। नगर निगम ने यहां पर सीवर, वाटर सप्लाई व बरात घर आदि की सुविधा दे रखी है। यहां रह रहे लोगों के पास वोटर कार्ड, पहचान पत्र, आधार कार्ड आदि सभी दस्तावेज मौजूद है। बिजली विभाग ने यहां मीटर कनेक्शन दे रखे हैं। छोटे अतिक्रमण से शुरू हुआ ये इलाका देखते ही देखते संजय नगर में तब्दील हो गया। यहां रहने वाले लोगों के बच्चे रेलवे लाइन पर ही खेलते रहते हैं। इससे दुर्घटना के आसार बढ़ जाते हैं। कई बार चलती ट्रेनों पर पत्थर फेंकने की भी शिकायत आ चुकी है।
मौके पर भारी पुलिस तैनात
तोड़फोड़ कार्रवाई को लेकर न्यू टाउन रेलवे स्टेशन पर भारी पुलिस तैनात रही। इनमें जीआरपी, आरपीएफ और सामान्य पुलिस भी शामिल थी। कुछ पुलिस फोर्स को गुरुग्राम सहित दूसरे जिलों से बुलाया गया था।
करीब 80 साल से रह रहे थे। 90 गज का मकान था और एक प्रॉपर्टी डीलर से लाखों रुपये में खरीदा था। पहले पता होता कि यहां तोड़फोड़ होगी तो यहां कभी मकान नहीं खरीदते।
- सविता देवी, स्थानीय निवासी
तोड़फोड़ से पहले रेलवे ने कोई नोटिस नहीं दिया। जो नोटिस घरों पर चस्पा किए गए। उन पर किसी अधिकारी का नाम नहीं था। कोर्ट ने तोड़फोड़ कार्रवाई पर रोक लगा दी थी। इसके बावजूद कार्रवाई की गई है। - मालती, स्थानीय निवासी
प्रधानमंत्री कहते हैं जहां झुग्गी वहां मकान। ये दावा केवल दिखावा तक सीमित है। इसी वजह से उनके मकानों को तोड़ा गया। कभी ऐसी उम्मीद नहीं थी कि उन्हें बेघर कर दिया जाएगा। - गुलशन देवी, स्थानीय निवासी
एक कपड़ा कंपनी में काम करती हूं। सात हजार रुपये वेतन मिलता है। मकान टूटने के बाद अब यदि किसी किराये के मकान में जाते हैं तो वहां किराया कहां से भरेंगे। किराया भरने के साथ बच्चों को पढ़ाना भी मुश्किल हो जाएगा। - किरण देवी, स्थानीय निवासी
रेलवे की जमीन पर लोगों ने कई वर्षों से कब्जा कर रखा था। जमीन खाली करने के लिए लोगों को कई बार नोटिस जारी किए गए। लेकिन लोगों ने नोटिस को अनदेखा कर दिया। तोड़फोड़ से पहले भी लोगों को नोटिस जारी कर घर खाली करने के आदेश दिए गए थे।
- संजय राघव, स्टेशन अधीक्षक, न्यू टाउन रेलवे स्टेशन
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लोगों के समर्थन में कांग्रेस नेता बलजीत कौशिक भी पहुंचे। पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया। लोगों का आरोप है कि सुप्रीम कोर्ट के स्टे के बावजूद मकानों को तोड़ा गया है। संजय नगर में बुुधवार सुबह रेल विभाग का तोड़फोड़ दस्ता भारी पुलिस के साथ पहुंचा। इसे देख कर लोग सहम गए। कुछ लोग अपने झुग्गी/मकानों को खाली करने लगे तो कई घरों के अंदर ही रहे। सुबह करीब 10 बजे चार जेसीबी की सहायता से रेलवे ने तोड़फोड़ कार्रवाई शुरू की। कुछ लोग जेसीबी पर चढ़ गए।
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लोग बोले, घरों को उजड़ने नहीं देंगे
लोगों ने कहा कि मर जाएंगे लेकिन घरों को उजड़ने नहीं देंगे। पुलिस ने उन्हें बलपूर्वक जेसीबी से उतारा और कार्रवाई शुरू कराई। लोगों ने कहा कि 60 साल से रह रहे हैं। लाखों रुपये लगा कर जमीन खरीदी है। जब रहने लगे तो रेलवे ने उजाड़ रहा है। ऐसे में अब वह कहां जाएंगे। तोड़फोड़ से पहले रेलवे को उन्हें रहने के लिए मकान देने चाहिए थे।
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सरकार पुनर्वास के बारे में चिंतित नहीं
सामाजिक कार्यकर्ता दीनदयाल गौतम ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट के द्वारा संजय नगर झुग्गी बस्ती को स्टे दे दिया है। इसके बाद भी रेलवे ने बस्ती को तोड़ दिया। उन्होंने ने बताया कि कई साथियों को पुलिस ने हिरासत में ले लिया है। जबकि वह तो प्रयास कर रहे थे कि सुप्रीम कोर्ट का आदेश रेलवे प्रशासन तक पहुंचाया जाए। निर्मल गोराना ने आरोप लगाया है कि फरीदाबाद में जिस गति से मजदूरों के घर उजाड़े जा रहे हैं उस गति से सरकार पुनर्वास के बारे में चिंतित नहीं है। याचिकाकर्ता दीपक शर्मा ने बताया कि हरियाणा सरकार मजदूर विरोधी है। जबकि पुनर्वास हमारा अधिकार है।
संजय नगर में साढ़े सात सौ मकान
संजय नगर में करीब साढ़े सात सौ मकान बने हुए हैं। इनमें करीब 3500 लोग निवास करते थे। नगर निगम ने यहां पर सीवर, वाटर सप्लाई व बरात घर आदि की सुविधा दे रखी है। यहां रह रहे लोगों के पास वोटर कार्ड, पहचान पत्र, आधार कार्ड आदि सभी दस्तावेज मौजूद है। बिजली विभाग ने यहां मीटर कनेक्शन दे रखे हैं। छोटे अतिक्रमण से शुरू हुआ ये इलाका देखते ही देखते संजय नगर में तब्दील हो गया। यहां रहने वाले लोगों के बच्चे रेलवे लाइन पर ही खेलते रहते हैं। इससे दुर्घटना के आसार बढ़ जाते हैं। कई बार चलती ट्रेनों पर पत्थर फेंकने की भी शिकायत आ चुकी है।
मौके पर भारी पुलिस तैनात
तोड़फोड़ कार्रवाई को लेकर न्यू टाउन रेलवे स्टेशन पर भारी पुलिस तैनात रही। इनमें जीआरपी, आरपीएफ और सामान्य पुलिस भी शामिल थी। कुछ पुलिस फोर्स को गुरुग्राम सहित दूसरे जिलों से बुलाया गया था।
करीब 80 साल से रह रहे थे। 90 गज का मकान था और एक प्रॉपर्टी डीलर से लाखों रुपये में खरीदा था। पहले पता होता कि यहां तोड़फोड़ होगी तो यहां कभी मकान नहीं खरीदते।
- सविता देवी, स्थानीय निवासी
तोड़फोड़ से पहले रेलवे ने कोई नोटिस नहीं दिया। जो नोटिस घरों पर चस्पा किए गए। उन पर किसी अधिकारी का नाम नहीं था। कोर्ट ने तोड़फोड़ कार्रवाई पर रोक लगा दी थी। इसके बावजूद कार्रवाई की गई है। - मालती, स्थानीय निवासी
प्रधानमंत्री कहते हैं जहां झुग्गी वहां मकान। ये दावा केवल दिखावा तक सीमित है। इसी वजह से उनके मकानों को तोड़ा गया। कभी ऐसी उम्मीद नहीं थी कि उन्हें बेघर कर दिया जाएगा। - गुलशन देवी, स्थानीय निवासी
एक कपड़ा कंपनी में काम करती हूं। सात हजार रुपये वेतन मिलता है। मकान टूटने के बाद अब यदि किसी किराये के मकान में जाते हैं तो वहां किराया कहां से भरेंगे। किराया भरने के साथ बच्चों को पढ़ाना भी मुश्किल हो जाएगा। - किरण देवी, स्थानीय निवासी
रेलवे की जमीन पर लोगों ने कई वर्षों से कब्जा कर रखा था। जमीन खाली करने के लिए लोगों को कई बार नोटिस जारी किए गए। लेकिन लोगों ने नोटिस को अनदेखा कर दिया। तोड़फोड़ से पहले भी लोगों को नोटिस जारी कर घर खाली करने के आदेश दिए गए थे।
- संजय राघव, स्टेशन अधीक्षक, न्यू टाउन रेलवे स्टेशन