फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Delhi NCR ›   Faridabad News ›   यमुना की बाढ़: फसल खराब, पशु बीमार, आफत में किसान

यमुना की बाढ़: फसल खराब, पशु बीमार, आफत में किसान

Fri, 03 Aug 2018 08:56 PM IST
Updated Fri, 03 Aug 2018 08:56 PM IST
विज्ञापन
यमुना की बाढ़: फसल खराब, पशु बीमार, आफत में किसान

विज्ञापन
सड़ती फसलें, पशु बीमार... आफत में किसान
यमुना की बाढ़ : पानी भरा है खेतों में, गंदे पानी में पनप रहे हैं मच्छर

- बाढ़ का पानी भरा पड़ा है खेतों में, पशुओं में मुंहपका-खुरपका, गलघोंटू रोग की आशंका
- राजस्व विभाग ने गिरदावरी कराने के लिए सरकार को लिखा पत्र, शुरू हुआ टीकाकरण

अमर उजाला ब्यूरो
फरीदाबाद। खादर इलाके में नुकसान लेकर आई यमुना नदी के उतरने के बाद अब किसानों की परेशानियां और बढ़ गई हैं। इलाके में बीमारियों के पैर पसारने का खतरा बढ़ गया है। पशुओं में मुंह पका, खुरपका जैसी बीमारियां होने की आशंका बढ़ गई है। हालांकि, स्वास्थ्य विभाग और पशुपालन विभाग सहित प्रशासन बाढ़ के बाद होने वाली समस्याओं से निपटने की तैयारियां कर रहा है। इधर, बर्बाद हुई फसल का मुआवजा किसानों को देने के लिए राजस्व विभाग की ओर से चंडीगढ़ मुख्यालय चिट्ठी लिखी गई है।
बीते रविवार भोर पहर खादर इलाके के किसानों के लिए आफत बन कर आया यमुना नदी का पानी उतरने के बाद अपने पीछे सड़ती हुई फसलें, खराब खेेत और बीमारियां जैसी समस्याएं छोड़ गया। औद्योगिक नगरी में बाढ़ से प्रभावित होने वाले 40 गांवों की सूची प्रशासन ने तैयार की थी लेकिन हथिनी कुंड बैराज से छोड़े गए पांच लाख क्यूसेक पानी में बसंतपुर और लतीफपुर गांव सर्वाधिक प्रभावित हुए। इन दोनों गांवों में दस हजार एकड़ से ज्यादा फसल जलमग्न होकर खराब हुई थी। बसतंपुर यमुना पुश्ता इलाके में तोरई, घीया, खीरा, पेठा जैसी सब्जियों की फसल चौपट हुई वहीं लतीफपुर में ज्वार, कपास, धान की छह हजार एकड़ से अधिक फसल बर्बाद हुई।
विज्ञापन


पानी घटा तो बीमारियों की आशंका बढ़ी
पानी उतरने के कारण लोग अब अपने पशु और सामान लेकर गांव में लौटे तो हैं, लेकिन जगह-जगह रुके हुए पानी में बीमारियां पैदा होने की आशंका बढ़ गई है। ठहरे हुए पानी में मच्छर पनप रहे हैं। पशुओं में भी मुंहपका-खुरपका और गलघोंटू जैसी संक्रामक बीमारियां फैलने की आशंका बढ़ गई है। बसंतपुर गांव की महिला किसान प्रेमवती ने बताया कि रुके हुए पानी में मच्छर तेजी से पनप रहे हैं। यह मच्छर दिन में ही काट रहे हैं। नेक्सू ने बताया कि बाढ़ का पानी तो उतर गया लेकिन पीने के पानी की समस्या है, ट्यूबवेल और पाइपलाइन से जो पानी निकल रहा है वह पीने योग्य नहीं है। नल के पानी को छान कर इस्तेमाल किया जा रहा है।
विज्ञापन
विज्ञापन

लतीफपुर के किसान काला सिंह ने बताया कि बाढ़ आने पर गांव वाले अपने करीब दो सौ पशुओं को यूपी बार्डर स्थित पड़ोस के गांव ले गए थे अब वापस लाए हैं। खेतों में फसल सड़ रही है, कीड़े मकोड़ों की भरमार हो गई है। भूखे पशु यह सड़ा हुआ चारा खाने को मजबूर हैं, इससे उनमें खुरपका, मुंह पका और पेट की बीमारियां बढ़ने की आशंका है। खेतों में जहरीले कीड़े-मकोड़े पशु और मनुष्य दोनों के लिए खतरा हैं।

स्वास्थ्य और पशुपालन विभा को कार्रवाई के आदेश
जिला उपायुक्त अतुल कुमार द्विवेदी ने बताया कि बाढ़ के बाद बीमारियां न फैलें, इसके लिए स्वास्थ्य विभाग और पशुपालन विभाग दोनों को कार्रवाई के निर्देश जारी किए हैं। जिला मलेरिया नियंत्रण अधिकारी, डिप्टी सीएमओ डॉ. रामभगत ने बताया कि बाढ़ग्रस्त इलाकों पर विशेष नजर रखी जा रही है, इन गांवों में एंटी लार्वा एक्टिविटी कराई जा रही है, जरूरत पड़ने पर फॉगिंग भी कराई जाएगी। पशुपालन विभाग के डॉ. राजबेल ने बताया कि पशुओं को संक्रामक रोगों से बचाने के लिए टीकाकरण अभियान जल्द ही शुरू किया जाएगा, गांवों पर नजर रखी जा रही है।

विशेष गिरदावरी कराएगा राजस्व विभाग
जिला राजस्व अधिकारी नरेश जोवल ने बताया कि बाढ़ के कारण फसलों को हुए नुकसान का मुआवजा किसानों को दिलाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। सरकार को पत्र लिख कर विशेष गिरदावरी कराने का अनुरोध किया गया है। सरकार से स्वीकृति मिलते ही सर्वे करा प्रभावित खेत, फसल और किसानों का रिकॉर्ड तैयार कर उन्हें उचित मुआवजा दिलाया जाएगा।


चांदपुर गांव में किया गया पशुओं का टीकाकरण
बाढ़ प्रभावित गांव चांदपुर में पशुओं को किसी भी प्रकार की महामारी से बचाव के लिए पशुपालन विभाग की टीम भी पहुंची और पशुओं को गल घोटू बीमारी से बचाव के टीके लगाए। राजकीय पशु चिकित्सालय कौराली के डॉ. राजबेल देशवाल ने बताया कि यमुना के बढ़ते जलस्तर से पशुओं में भी बीमारी होने का अंदेशा बना है। इसलिए गांव चांदपुर में 450 पशुओं को गल घोटू बीमारी से बचाव के टीके लगाए गए। इसके साथ ही पशुपालकों को बरसात के मौसम में होने वाली अन्य बीमारियों से बचाव के सुझाव दिए। पशुपालन विभाग की टीम ने गांव का दौरा कर पशुपालकों को किसी भी प्रकार की बीमारी होने पर तुरंत सूचित करने का आह्वान किया।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed