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मर्चेंट नेवी का पूर्व अधिकारी ठगी में साथी संग गिरफ्तार, विदेशों में कर चुका है काम
ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Sat, 21 Jul 2018 11:50 PM IST
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दिल्ली, हरियाणा, बिहार और चंडीगढ़ के युवाओं को ओएनजीसी में नौकरी लगवाने का झांसा देकर ठगी करने वाले दो बदमाशों को अपराध शाखा ने गिरफ्तार किया है। गैंग का सरगना मर्चेंट नेवी का पूर्व अधिकारी नोएडा सेक्टर-137 निवासी नवीन कुमार उर्फ सिंह साहेब उर्फ कप्तान (38) है। उसने 2010 में नौकरी से इस्तीफा दिया था। उसके साथ नोएडा सेक्टर-70 निवासी हिमांशु सुमन (27) को भी पकड़ा गया है। आरोपियों के पास से सरकारी विभागों की रबर स्टांप व अन्य कागजात बरामद किए गए हैं।
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अपराध शाखा के संयुक्त आयुक्त आलोक कुमार ने बताया कि पिछले दिनों ओएनजीसी अधिकारियों की शिकायत पर पुलिस ने मामला दर्ज किया था। इस बीच हरियाणा के भिवानी निवासी संदीप ने ठगी की शिकायत की। जांच में पता चला कि नवीन कुमार ठग गिरोह का सरगना है। एसीपी अनिल दुरेजा, इंस्पेक्टर सत्यवान लठवाल की टीम ने 11 जुलाई को राजीव चौक मेट्रो स्टेशन के पास से उसे दबोच लिया।
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उसके पास एटीएम कार्ड, कई मंत्रालयों के फर्जी स्टांप व अन्य कागजात बरामद किए गए। नवीन की निशानदेही पर पुलिस ने एक और आरोपी हिमांशु को भी 12 जुलाई को ही दबोच लिया। हिमांशु ने बताया कि वह नवीन को गाड़ी व रहने का स्थान उपलब्ध कराता था। कोर्ट में पेश करने के बाद नवीन को सात दिन के पुलिस रिमांड पर भेज दिया गया।
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पुलिस के मुताबिक, नवीन हमेशा मर्चेंट नेवी की यूनिफॉर्म पहने रहता था और खुद को अधिकारी बताता था। हिमांशु के साथ मिलकर वह युवकों को ओएनजीसी में नौकरी दिलवाने का झांसा देता था। शुरुआत में पीड़ितों से उनके एजुकेशनल सर्टिफिकेट की कॉपी व्हाट्स ऐप पर मांगी जाती थी।
बाद में लाखों रुपये वसूलकर नौकरी का फर्जी लेटर भेजा जाता था। फिर गौतमबुद्ध नगर कासना में मेडिकल भी कराया जाता था। इसके बाद उनको रजिस्टर्ड डाक से नियुक्ति पत्र भेजा जाता था। दी गई तारीख पर जब पीड़ित नियुक्ति पत्र को लेकर जाता था तो उसे ठगी का पता चलता था।
अंकल के साथ मिलकर शुरू की ठगी
पूछताछ के दौरान नवीन ने बताया कि वह मूलरूप से सीतामढ़ी बिहार का रहन वाला है। ग्रेजुएशन करने के बाद उसने कई प्राइवेट नौकरियां की, जिसके बाद उसने मर्चेंट नेवी में नौकरी शुरू की। इसी दरम्यान वह इथोपिया और अफ्रीका भी रहा। 2010 में उसने नौकरी छोड़ दी।
वह अपने अंकल विनय कुमार के साथ मिलकर ठगी करने लगा। उसने चंडीगढ़ के तीन युवकों को सरकारी नौकरी दिलवाने का झांसा देकर ठगी की। 2013 में ठगी के मामले में नवीन को गिरफ्तार कर लिया गया था, लेकिन एक माह बाद ही वह जमानत पर छूट गया।
बाद में लाखों रुपये वसूलकर नौकरी का फर्जी लेटर भेजा जाता था। फिर गौतमबुद्ध नगर कासना में मेडिकल भी कराया जाता था। इसके बाद उनको रजिस्टर्ड डाक से नियुक्ति पत्र भेजा जाता था। दी गई तारीख पर जब पीड़ित नियुक्ति पत्र को लेकर जाता था तो उसे ठगी का पता चलता था।
अंकल के साथ मिलकर शुरू की ठगी
पूछताछ के दौरान नवीन ने बताया कि वह मूलरूप से सीतामढ़ी बिहार का रहन वाला है। ग्रेजुएशन करने के बाद उसने कई प्राइवेट नौकरियां की, जिसके बाद उसने मर्चेंट नेवी में नौकरी शुरू की। इसी दरम्यान वह इथोपिया और अफ्रीका भी रहा। 2010 में उसने नौकरी छोड़ दी।
वह अपने अंकल विनय कुमार के साथ मिलकर ठगी करने लगा। उसने चंडीगढ़ के तीन युवकों को सरकारी नौकरी दिलवाने का झांसा देकर ठगी की। 2013 में ठगी के मामले में नवीन को गिरफ्तार कर लिया गया था, लेकिन एक माह बाद ही वह जमानत पर छूट गया।