नोएडा: सॉफ्टवेयर कंपनी के नाम पर चलाई जा रही थी ई-सिगरेट फैक्ट्री, सील
-मौके से 18 लोगों को गिरफ्तार कर पांच लाख का माल बरामद
-ब्रेन पल्स टैक्नोलॉजी के नाम पर चल रही थी ई-सिगरेट कंपनी
-विदेशों के नाम पर डालर में बेची जाती थीं ई-सिगरेट
-लव लाइट डाट इन के नाम से चलाई जा रही थी वेबसाइट
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नोएडा जिला प्रशासन की ओर से जिले को तंबाकू रहित करने के लिए अभियान के तहत सोमवार को पुलिस के साथ मिलकर फेज-थ्री कोतवाली क्षेत्र के सेक्टर-63 में छापेमारी की गई। फैक्ट्री में पुलिस-प्रशासन ने विदेशों से ऑनलाइन माल मंगाकर ई सिगरेट बनाने की कंपनी का भंडाफोड़ कर दिया। कंपनी को साफ्टवेयर के नाम से चलाया जा रहा था। जबकि वहां पर महंगे विदेशी सिगार और ई-सिगरेट बनाकर पैक किए जा रहे थे और देश के विभिन्न कौने में ऑनलाइन बेचा जा रहा था। प्रशासन ने पुलिस के साथ मिलकर ई-सिगरेट फैक्ट्री को सील कर दिया है और मौके से 18 लोगों को गिरफ्तार कर लिया है। तंबाकू कमेटी की ओर से कंपनी के मालिक के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई गई है।
डीएम के निर्देश में बनाई गई एंटी तंबाकू समिति के नोडल अधिकारी शैलेंद्र कुमार मिश्र को सूचना मिली थी कि सेक्टर-63 स्थित ग्राउंड फ्लोर पर बनी ब्रेन पल्स कंपनी में ई-सिगरेट बनाने और बेचने का काम किया जा रहा है। सूचना पर उन्होंने सीओ द्वितीय पीयूष कुमार, फेज-थ्री पुलिस और तंबाकू नियंत्रण विभाग के डॉ. सुनील दोहरे के नेतूत्व में कमेटी ने सेक्टर-63 में छापेमारी की। जहां पर भारी संख्या में सिगरेट बनाते हुए 18 लोग मिले और सभी को मौके से गिरफ्तार कर लिया।
विदेशी सिगार और विदेशी ई-सिगरेट पैकिंग और कुछ कच्छा माल बरामद हुआ। पुलिस-प्रशासन ने 5 लाख रुपये से अधिक का माल बरामद किया है। सिटी मजिस्ट्रेट ने बताया कि ब्रेन पल्स टैक्नोलॉजी कंपनी के नाम से रजिस्ट्रेशन कराया गया था और ई-सिगरेट कंपनी चलाई जा रही थी। जांच-पड़ताल में सामने आया कि कंपनी के अंदर लव लाइट डॉट इन के नाम से वेबसाइट चलाई जा रही थी। जिसके माध्यम से ऑनलाइन कच्चा माल मंगाया जा रहा था और ऑनलाइन ही सिगार और ई-सिगरेट को बेचा जा रहा था। जिसके चलते कंपनी परिसर को सील कर दिया गया। तंबाकू विभाग के डॉ. सुनील दोहरे की ओर से कंपनी संचालक अरुण गुप्ता समेत 19 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कराया गया है। जबकि 18 लोगों को गिरफ्तार कर लिया गया है।
एक से दो लाख रुपये का हर दिन करती है कंपनी कारोबार
जिले में यह कंपनी ऑनलाइन कारोबार कर रही थी और हर दिन करीब एक से दो लाख रुपये के ई-सिगरेट बेच देती थी। ई-सिगरेट खरीदने वाले अधिक्तर दुकानदार है और कुछ युवा शामिल है। गौतमबुद्धनगर के दुकानदारों की डिटेल निकाली जा रही है। जिससे उन पर कार्रवाई की जा सके। इसके अलावा बाहरी जिलों या प्रदेशों में खरीदने वाले दुकानदार और युवाओं की तलाश की जा रही है। अरुण गुप्ता की गिरफ्तारी के बाद पूरा प्रकरण सामने आ पाएगा। हालांकि गिरफ्तार हुए लोगों ने काफी हद तक जानकारी मुहैया करा दी है।
अधिकारियों की मानें तो ई-सिगरेट का क्रेज बढ़ाने के लिए कंपनी की ओर से भारत में भी डॉलर से कारोबार किया जा रहा था। जिससे किसी को पता न चले कि कंपनी कहां की है। हालांकि कंपनी पैमेंट रुपये में ही लेती थी मगर डॉलर के अनुसार काम कर रही थी। एक ई-सिगरेट 10 से 50 डॉलर कीमत की है। जो कई-कई माह तक चल जाती है। सिगरेट के साथ युवाओं में सिगार का भी शौक बढ़ रहा है। अधिकारियों की माने तो बुकिंग रिकार्ड देखने में सामने आया है कि युवाओं द्वारा अधिक खरीदारी की जा रही है जो घर से बाहर रहते हैं। इनमें कॉरपोरेट कंपनी में काम करने वाले और कॉलेजों में शिक्षा ग्रहण कर रहे युवा शामिल है।
कंपनी में बडे़ स्तर पर ई-सिगरेट बनाकर ऑनलाइन बेचने का काम किया जा रहा था जिसमें प्रथम दृष्टया युवा और दुकानदारों की कुछ जानकारी मिली है। कंपनी को सील कर दिया गया है और 18 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। जल्द ही इसमें कुछ और लोगों पर कार्रवाई की जाएगी। -शैलेंद्र कुमार मिश्र, सिटी मजिस्ट्रेट, नोएडा