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जटायु ने ललकारते हुए सीता हरण के दौरान रावण से किया युद्ध
ब्यूरो / अमर उजाला, गुड़गांव
Updated Mon, 19 Oct 2015 05:57 PM IST
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श्री दुर्गा रामलीला कमेटी जैकमपुरा में रविवार रात जटायु-रावण युद्ध का मंचन किया गया। सीता का हरण कर ले जा रहे रावण को जटायु ललकारता है। पहले दोनों में संवाद होता है।
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इसके बाद दोनों में युद्ध छिड़ जाता है। जटायू चौंक के प्रहार कर रावण को लहूलुहान कर देता है। एक बार तो जटायु की चौंच के प्रहारों से रावण कुछ देर के लिए अचेत हो जाता है। लेकिन बाद में वह जटायु के पंख काट देता है।
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इससे पूर्व सीता हरण का मंचन कि गया। लंका में रावण का दरबार लगा होता है, तभी रावण की बहन शूर्पणखा अपनी कटी नाक के साथ दरबार में विलाप करते हुई पहुंचती है।
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वह लंकेश को बताती है कि ‘भइया दो तपस्वी वन में आए हैं, जैसे ही मैंने तेरा नाम लिया उन्होंने मेरा यह हाल किया’। रावण कहता है क्या तूने ये बात खर-दूषण से नहीं कही। वह कहती है कि भइया पहले मैंने उन्हीं से कहा लेकिन वो युद्ध में काम आ गए।
कुछ देर के लिए रावण सोच में पड़ जाता है। तभी बैकग्राउंड से चौपाई सुनाई देती है। ‘खर-दूषण मोसम बलवंता बिन, भगवान कोई ना मरवंता, खर-दूषण का वध हुआ तो निश्चय ही ये सिद्ध हुआ कि नारायण ने अवतार लिया।
निश्चय ही वो अवतारी हैं तो वैर भाव रखूंगा, मिलेगी मुक्ति मुझे, मरना नहीं स्वर्ग की मुक्ति है’। रावण कहता है ‘कोई काटे बहन की कान नाक और मैं उहें भगवान समझूं, नहीं नहीं ऐसा नहीं हो सकता’।
रावण मन ही मन में कहता है कि मैं सीता का हरण कर लाता हूं और इस कार्य में मेरी मदद मामा मारीच से बढ़कर कोई नहीं कर सकता। वह मामा मारीच के पास जाता है।