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डॉक्टर-नर्सों से ज्यादा 'समझदार' निकले आम लोग, वैक्सीन लगवाने के लिए रोजना आ रहीं 70-80 कॉल्स

Thu, 18 Feb 2021 05:13 PM IST
Harendra Chaudhary अमित शर्मा, अमर उजाला, नई दिल्ली
अमित शर्मा, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Harendra Chaudhary Updated Thu, 18 Feb 2021 05:13 PM IST
सार

  • अभी केवल फ्रंटलाइन वॉरियर्स के लिए जारी है वैक्सीनेशन कार्यक्रम, लेकिन कुछ लोग दूसरी डोज लगवाने नहीं पहुंचे
  • दिल्ली सरकार की चौबीसों घंटे चलने वाली कोविड हेल्पलाइन सेवा में प्रतिदिन 70-80 कॉल्स वैक्सीन लगवाने के लिए आ रही हैं

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Doctors and Nurses are avoiding for 2nd dose of Corona vaccine, but Common people asking for vaccination program
कोरोना वैक्सीन लगवाते डॉक्टर - फोटो : अमर उजाला (फाइल)

विस्तार

कोरोना महामारी कमजोर जरूर पड़ी है, लेकिन खतरा अभी भी बरकरार है। अपने फ्रंटलाइन कोरोना योद्धाओं को कोरोना संक्रमण के खतरे से बचाने के लिए सरकार ने वैक्सीनेशन कार्यक्रम भी चालू कर रखा है। लेकिन कई डॉक्टर और नर्स वैक्सीनेशन के लिए आगे नहीं आ रहे हैं। कई ऐसे भी हैं जिन्होंने वैक्सीन की पहली डोज तो ले ली, लेकिन दूसरी डोज के लिए सामने नहीं आए। सरकार के लिए कोरोना योद्धाओं का यह रुख चिंता का विषय बन गया है। जबकि विशेषज्ञों ने लगातार साफ किया है कि कोरोना वैक्सीन पूरी तरह सुरक्षित है और इसे हर व्यक्ति को आवश्यक रूप से लगवाना चाहिए।

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लेकिन स्वास्थ्यकर्मियों के इस असमंजस के बीच सामान्य लोग कोरोना वैक्सीन को लेकर काफी जागरूक दिख रहे हैं। भारी संख्या में आम लोग जल्द से जल्द कोरोना वैक्सीन लगवाना चाहते हैं और वे इसकी प्रक्रिया के बारे में पता कर रहे हैं। दिल्ली सरकार की कोविड हेल्पलाइन पर रोज इस तरह के 70-80 कॉल्स आ रहे हैं।
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केंद्र सरकार के एक अस्पताल के एक सीनियर डॉक्टर ने अमर उजाला से बताया कि कोरोना वैक्सीन को लेकर कुछ लोगों में भ्रम अभी भी बरकरार है। इसमें आम लोगों के साथ-साथ स्वास्थ्यकर्मी भी शामिल हैं। कोरोना वैक्सीन को केवल छह महीने के लिए कारगर बताया गया है। इसके बाद आगे की प्रक्रिया क्या होगी, इसके बारे में अभी सरकार ने कोई स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी नहीं किया है। इसके बाद दोबारा वैक्सीन लगानी होगी या कोई बूस्टर डोज लगाई जाएगी, इस पर भी अभी स्थिति स्पष्ट नहीं है।
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वैक्सीन लगवाने के बाद कुछ लोगों में हाथ दर्द, कंपकपी छूटना या बुखार आने की शिकायत भी पाई गई है। हालांकि, वैक्सीन लगवाने की प्रक्रिया की शुरुआत में ही यह बताया गया था कि वैक्सीन लगाने के बाद सामान्य बुखार आ सकता है। पहले ही उपलब्ध कुछ अन्य वैक्सीन के मामले में भी यह होता है। इस जानकारी के बाद भी लोगों के मन में वैक्सीन को लेकर संशय बरकरार है।

कहां करें रजिस्ट्रेशन

पिछले वर्ष अक्टूबर माह में एक रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया शुरू की गई थी। इसमें सभी अस्पतालों को अपने फ्रंटलाइन वारियर्स की जानकारी देनी थी। इस पर काफी संख्या में लोगों ने रजिस्ट्रेशन करवा भी दिया था। बाद में सरकार ने स्पष्ट किया कि यह जानकारी फ्रंटलाइन योद्धाओं को कोरोना वैक्सीन लगाने के लिए इस्तेमाल की जाएगी। इस पोर्टल पर रजिस्टर डॉक्टरों और नर्सों का ही वैक्सीनेशन कराया जा रहा है।

लेकिन जो लोग अपना रजिस्ट्रेशन नहीं करवा सके थे, उनके लिए अभी भी कोई वेबसाइट या पोर्टल उपलब्ध नहीं करवाया गया है जहां वे अपना रजिस्ट्रेशन करवाकर वैक्सीन लगवा सकते हैं। वैक्सीनेशन के लिए कम संख्या में लोगों के सामने आने के पीछे इसे भी एक बड़ा कारण बताया जा रहा है।

इन संगठनों ने लोगों को वैक्सीन लगवाने के लिए लिखा पत्र

वैक्सीन लगवाने के लिए डॉक्टरों-नर्सों में भी अनिच्छा को देखते हुए प्रमुख स्वास्थ्य संगठनों ने अपने साथ जुड़े स्वास्थ्यकर्मियों से वैक्सीन लगवाने की अपील की है। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन ने अपने से जुड़े डॉक्टरों के लिए पहले ही इस तरह की एक अपील जारी की थी। आईएमए के अलावा इंडियन नर्सिंग काउंसिल, द ट्रेंड नर्सेज एसोसिएशन ऑफ इंडिया और ऑल इंडिया गवर्नमेंट नर्सेज फेडरेशन ने भी एक पत्र लिखकर अपनी नर्सों से वैक्सीन लगवाने की अपील की है।

सामान्य लोग लगातार कर रहे फोन

एक तरफ जहां कुछ डॉक्टरों-नर्सों में वैक्सीन को लेकर कुछ शंकाएं बरकरार हैं तो वहीं सामान्य लोग लगातार फोन कर वैक्सीन के बारे में पता कर रहे हैं। दिल्ली सरकार की कोविड हेल्पलाइन पर लगातार फोन करके आम लोग पूछ रहे हैं कि उनके लिए कोरोना की वैक्सीन कब तक उपलब्ध हो पाएगी। इसकी कीमत क्या होगी और इसकी प्रक्रिया क्या होगी। लोग यह भी पूछ रहे हैं कि वैक्सीन लगाने के बाद उनके ऊपर कोई दुष्प्रभाव तो नहीं पड़ेगा।



दिल्ली सरकार की दिल्ली स्वास्थ्य निदेशालय के कार्यालय में चल रही कोविड हेल्पलाइन पिछले साल 24 मार्च को स्थापित की गई थी। हफ्ते के सातों दिन चौबीसों घंटे काम करने वाली इस हेल्पलाइन में दस कर्मचारी लगातार काम करते हैं। सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक इनके फोन नंबरों पर रोजाना 70 से 80 कॉल्स सिर्फ इसलिए आ रही हैं कि उन्हें कोरोना की वैक्सीन कब तक उपलब्ध हो पाएगी।

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