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हवा में मरीज का इलाज: जब अचानक हवाई जहाज में बिगड़ गई बुजुर्ग की तबियत, डॉक्टर ने यूरिन निकालकर बचाई जान

Tue, 22 Oct 2024 12:14 AM IST
विजय पुंडीर अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली Published by: विजय पुंडीर Updated Tue, 22 Oct 2024 12:14 AM IST
सार

डॉ. रिची गुप्ता ने महसूस किया कि एक बुजुर्ग सहयात्री को बार-बार वॉशरूम जाना पड़ रहा था और ऐसा लग रहा था कि वह काफी तकलीफ में हैं। तो उन्होंने एयर हॉस्टेस को सूचित किया कि वह डॉक्टर हैं और यदि किसी प्रकार की आवश्यकता है तो वह इस मामले में उक्त यात्री की मदद कर सकते हैं। 

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Doctor treated elderly patient on UK flight
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Adobe Stock

विस्तार

हजारों फीट ऊंचाई पर उड़ रहे हवाई जहाज में डॉक्टर ने एक बुजुर्ग मरीज का इलाज किया। ब्रिटेन की उड़ान में सफर कर रहा था। इसी उड़ान में निजी अस्पताल की डॉक्टर भी थी। मरीज एक्यूट यूरीनरी रिटेंशन की समस्या से परेशान था।

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एयर हॉस्टेस ने मरीज को ड्राइ आइस दी लेकिन आराम नहीं मिला। काफी देर तक परेशान होने के बाद जब डॉ. रिची गुप्ता ने महसूस किया कि एक बुजुर्ग सहयात्री को बार-बार वॉशरूम जाना पड़ रहा था। और ऐसा लग रहा था कि वह काफी तकलीफ में हैं। तो उन्होंने एयर हॉस्टेस को सूचित किया कि वह डॉक्टर हैं और यदि किसी प्रकार की आवश्यकता है तो वह इस मामले में उक्त यात्री की मदद कर सकते हैं। 

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एयर हॉस्टेस ने जानकारी दी कि मरीज यूरीनरी रिटेंशन की समस्या से जूझ रहे हैं और उन्हें राहत देने के लिए ड्राइ आइस दी गई गई। लेकिन आधा घंटा बीतने के बाद भी मरीज को कोई आराम नहीं मिला था और वह पेशाब नहीं कर पा रहे थे। जिसकी वजह से उनकी हालत और बिगड़ने लगी थी। एयर हॉस्टेस मदद मांगी। उन्हें लगा कि मरीज की बिगड़ती हालत के चलते उन्हें जहाज वापस मोड़ना पड़ सकता है।

डॉ. गुप्ता ने मरीज को पिछली पैंट्री में ले जाकर लेटाया गया। मरीज ने जानकारी दी कि वह डायबिटीज़ या हाइपरटेंशन जैसे किसी रोग से भी पीड़ित नहीं हैं। लेकिन उन्हें यूरीनरी रिटेंशन की शिकायत उसी दिन सवेरे हुई थी और वह एयरपोर्ट डिस्पेन्सरी में गए थे जहां उन्हें कैथेटराइज़ेशन की जरूरत पड़ी थी। उनकी कंडीशन देखकर डिस्पेन्सरी में डॉक्टर ने यूरीनरी कैथेटराइज़ेशन किया था।

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डॉ. गुप्ता ने फ्लाइट में पहले से मौजूद कुछ यूरीनरी कैथेटर, ज़ायलोकेन जेली (जो कि लोकल एनेस्थेटिक जेल होता है), सीरिंज तथा ग्लव्स आदि दिखायी दिए। इन सीमित साधनों से ही डॉ. गुप्ता ने मरीज को कैथेटराइज़ कर करीब 800 मिली पेशाब उनके शरीर से निकाला। मरीज को इससे काफी राहत मिली। डॉ. रिची गुप्ता ने बताया कि प्रायः अधिक उम्र के पुरुषों में प्रोस्टेट ग्रंथि बढ़ने की वजह से यह समस्या होती है। 

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