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Eye Care Tips: आंखों के मामले में न करें ये गलती, छिन सकती है रोशनी, जानें क्या कहते हैं विशेषज्ञ

Tue, 01 Apr 2025 11:47 AM IST
आकाश दुबे राकेश शर्मा, अमर उजाला, नई दिल्ली
राकेश शर्मा, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: आकाश दुबे Updated Tue, 01 Apr 2025 11:47 AM IST
सार

गुरु नानक नेत्र केंद्र की निदेशक प्रोफेसर डॉ. कीर्ति सिंह ने कहा कि संस्थान में आने वाले काफी बच्चों में यह समस्या देखने को मिल रही है। लापरवाही के कारण बच्चों की आंखों की रोशनी चली जाती है जो फिर वापस नहीं आ पाती।

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Do not make this mistake regarding your eyes it can take away your vision
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : iStock

विस्तार

एलर्जी, आंखों का संक्रमण, सूखी आंखें, चुभन या दूसरे कारणों से होने वाली बीमारी में खुद डॉक्टर न बनें। यह लापरवाही आंखों की रोशनी छीन सकती है। 10 से 14 साल तक की उम्र के बच्चों में यह आंखों की दिव्यांगता का सबसे बड़ा कारण है।

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विशेषज्ञों का कहना है कि धूल, धुएं, फूलों के पराग और जानवरों के बाल सहित दूसरे कारणों से अक्सर बच्चों की आंखों में खुजली होती है। देखा गया है कि अभिभावक बिना डॉक्टर की सलाह लिए दुकान से दवा लेते हैं। अधिकतर समय स्टेरॉयड युक्त दवा का इस्तेमाल आंखों के इलाज के लिए करते हैं। यह दवा आंखों को दिमाग से जोड़ने वाली नस ऑप्टिक तंत्रिका को प्रभावित करती हैं, जो आंख से मस्तिष्क तक दृश्य जानकारी को पहुंचाती है। लंबे समय ऐसी लापरवाही से ऑप्टिक तंत्रिका को नुकसान होता है और आंखों की रोशनी जा सकती है।

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गुरु नानक नेत्र केंद्र की निदेशक प्रोफेसर डॉ. कीर्ति सिंह ने कहा कि संस्थान में आने वाले काफी बच्चों में यह समस्या देखने को मिल रही है। लापरवाही के कारण बच्चों की आंखों की रोशनी चली जाती है जो फिर वापस नहीं आ पाती। यदि लोगों को दवाओं के इस्तेमाल को लेकर जागरूकता होगी तो इस समस्या को पूरी तरह से रोका जा सकता है। उनका कहना है कि आंखों के संबंध में बिना डॉक्टर की सलाह के कोई दवा नहीं लेनी चाहिए।

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तय समय के बाद दवा का इस्तेमाल बंद करें
डॉ. सिंह का कहना है कि आंखों के दवा के इस्तेमाल का समय निश्चित होता है। एक बार दवा इस्तेमाल होने के बाद तय समय के बाद दवा का इस्तेमाल बंद कर देना चाहिए। यदि फिर भी उस दवा का इस्तेमाल किया जाता है तो वह फायदा पहुंचाने की जगह नुकसान करना शुरू कर देती है।

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आंखों की रोशनी खोने के यह भी हैं कारण
सफेद मोतियाबिंद : इसमें आंखों का पारदर्शी लेंस धुंधला हो जाता है। इससे देखने की क्षमता कम हो जाती है। समय पर इलाज न होने पर आंखों की रोशनी चली जाती है।
काला मोतियाबिंद : आंखों में दबाव बढ़ने के कारण यह समस्या होती है। यह आंख की गंभीर समस्या है। इसका इलाज संभव नहीं है, लेकिन रोकथाम की जा सकती है।
मायोपिया : इस रोग में नजदीक की नजर कमजोर हो जाती है। एक अनुमान है कि वर्ष 2050 तक करीब आधे बच्चों में मायोपिया रोग होगा। इसके पीछे स्क्रीन टाइम बड़ा कारण है।

इस कारण भी बढ़ सकती है समस्या
- चोट या रक्त प्रवाह में रुकावट
- आंख के अंदर की सूजन
- रेटिना से या उसमें रक्त प्रवाह में रुकावट
- ऑप्टिक न्युरैटिस
- रेटिना का अलग होना

इनसे भी हो सकता है नुकसान
मोबाइल, लैपटॉप या स्क्रीन पर ज्यादा समय बिताना
गलत खानपान
अस्वस्थ जीवनशैली
नशीले पदार्थों का सेवन
पर्याप्त नींद न लेना

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