{"_id":"6988ab9e0066f73c34072624","slug":"development-work-in-mcd-will-gain-momentum-financial-powers-of-engineers-increased-delhi-ncr-news-c-340-1-del1004-123337-2026-02-08","type":"story","status":"publish","title_hn":"Delhi NCR News: एमसीडी में विकास कार्यों को मिलेगी रफ्तार, इजीनियरों के बढ़ गए वित्तीय अधिकार","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Delhi NCR News: एमसीडी में विकास कार्यों को मिलेगी रफ्तार, इजीनियरों के बढ़ गए वित्तीय अधिकार
विज्ञापन
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली।
एमसीडी की ओर से किए जाने वाले विकास कार्य अब पहले की तुलना में कहीं अधिक तेज गति से पूरे होंगे। एमसीडी आयुक्त ने प्रशासनिक सुधार की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए इंजीनियरिंग विभाग के अधिकारी कार्यकारी अभियंता, अधीक्षण अभियंता और मुख्य अभियंता के वित्तीय अधिकार बढ़ा दिए हैं। इसका असर यह होगा कि अब फाइलें सीमित अधिकारियों की टेबलों तक ही जाएंगी और सालों से चली आ रही देरी की समस्या पर लगाम लगेगी।
एमसीडी के अनुसार, प्रशासनिक स्वीकृति (एए), व्यय स्वीकृति (ईएस), तकनीकी मंजूरी, टेंडर स्वीकृति और अनुबंध से जुड़े मामलों में अधिकारों का विकेंद्रीकरण किया है, ताकि सड़क, नाली, रखरखाव और अन्य बुनियादी ढांचा परियोजनाओं को समय पर जमीन पर उतारा जा सके। दरअसल विभिन्न मदों के तहत किए जाने वाले विकास कार्यों की प्रगति संतोषजनक नहीं थी, जनप्रतिनिधियों ने भी बार-बार टेंडर और मंजूरी में देरी को लेकर चिंता जताई थी। क्योंकि अब तक विकास कार्यों में सबसे बड़ी बाधा बार-बार मंजूरी लेने और फाइलों के कई स्तरों पर घूमने की प्रक्रिया थी।
जोनस्तर तक के अधिकारियों के बढ़े अधिकार
संशोधित व्यवस्था के तहत जोन स्तर पर कार्यकारी अभियंता, अधीक्षण अभियंता और मुख्य अभियंता को अधिक अधिकार दिए गए हैं। अब 25 लाख रुपये तक के कार्यों में प्रशासनिक और व्यय स्वीकृति जोन स्तर पर दी जा सकेगी। वहीं एक करोड़ रुपये तक के कार्यों में भी अब पहले की तुलना में कम स्तर पर मंजूरी संभव होगी। कई मामलों में पांच करोड़ रुपये तक की परियोजनाओं में तकनीकी और टेंडर प्रक्रिया को तेज करने की व्यवस्था की गई है, बशर्ते वित्त विभाग की सहमति हो। वहीं सिंगल टेंडर की स्वीकृति, कार्य अवधि बढ़ाने, माइलस्टोन में बदलाव, अतिरिक्त या वैकल्पिक मदों की स्वीकृति जैसे मामलों में भी अधिकारियों की शक्तियां बढ़ाई गई हैं। इससे अब छोटे-छोटे मामलों के लिए फाइलें बार-बार मुख्यालय या स्थायी समिति के चक्कर नहीं काटेंगी।
विज्ञापन
धूल प्रदूषण कम करने में मदद
एमसीडी के अधिकतर विकास कार्य सड़क निर्माण और रखरखाव से जुड़े होते हैं, जिनका सीधा संबंध धूल प्रदूषण में कमी से है। ऐसे कार्यों में समय बेहद अहम होता है और देरी से न सिर्फ लागत बढ़ती है, बल्कि पर्यावरण और जनता दोनों प्रभावित होते हैं।
वित्तीय अनुशासन भी रहेगा बरकरार
वित्तीय शक्तिया बढ़ी हैं, लेकिन साथ ही यह स्पष्ट किया कि हर स्तर पर वित्तीय अनुशासन और जवाबदेही बनी रहेगी। बड़े कार्यों में वित्त विभाग की सहमति अनिवार्य होगी और यह सुनिश्चित किया जाएगा कि अतिरिक्त या वैकल्पिक मदों के कारण परियोजना की कुल लागत अनियंत्रित रूप से न बढ़े।
विज्ञापन
नई दिल्ली।
एमसीडी की ओर से किए जाने वाले विकास कार्य अब पहले की तुलना में कहीं अधिक तेज गति से पूरे होंगे। एमसीडी आयुक्त ने प्रशासनिक सुधार की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए इंजीनियरिंग विभाग के अधिकारी कार्यकारी अभियंता, अधीक्षण अभियंता और मुख्य अभियंता के वित्तीय अधिकार बढ़ा दिए हैं। इसका असर यह होगा कि अब फाइलें सीमित अधिकारियों की टेबलों तक ही जाएंगी और सालों से चली आ रही देरी की समस्या पर लगाम लगेगी।
एमसीडी के अनुसार, प्रशासनिक स्वीकृति (एए), व्यय स्वीकृति (ईएस), तकनीकी मंजूरी, टेंडर स्वीकृति और अनुबंध से जुड़े मामलों में अधिकारों का विकेंद्रीकरण किया है, ताकि सड़क, नाली, रखरखाव और अन्य बुनियादी ढांचा परियोजनाओं को समय पर जमीन पर उतारा जा सके। दरअसल विभिन्न मदों के तहत किए जाने वाले विकास कार्यों की प्रगति संतोषजनक नहीं थी, जनप्रतिनिधियों ने भी बार-बार टेंडर और मंजूरी में देरी को लेकर चिंता जताई थी। क्योंकि अब तक विकास कार्यों में सबसे बड़ी बाधा बार-बार मंजूरी लेने और फाइलों के कई स्तरों पर घूमने की प्रक्रिया थी।
विज्ञापन
जोनस्तर तक के अधिकारियों के बढ़े अधिकार
संशोधित व्यवस्था के तहत जोन स्तर पर कार्यकारी अभियंता, अधीक्षण अभियंता और मुख्य अभियंता को अधिक अधिकार दिए गए हैं। अब 25 लाख रुपये तक के कार्यों में प्रशासनिक और व्यय स्वीकृति जोन स्तर पर दी जा सकेगी। वहीं एक करोड़ रुपये तक के कार्यों में भी अब पहले की तुलना में कम स्तर पर मंजूरी संभव होगी। कई मामलों में पांच करोड़ रुपये तक की परियोजनाओं में तकनीकी और टेंडर प्रक्रिया को तेज करने की व्यवस्था की गई है, बशर्ते वित्त विभाग की सहमति हो। वहीं सिंगल टेंडर की स्वीकृति, कार्य अवधि बढ़ाने, माइलस्टोन में बदलाव, अतिरिक्त या वैकल्पिक मदों की स्वीकृति जैसे मामलों में भी अधिकारियों की शक्तियां बढ़ाई गई हैं। इससे अब छोटे-छोटे मामलों के लिए फाइलें बार-बार मुख्यालय या स्थायी समिति के चक्कर नहीं काटेंगी।
विज्ञापन
धूल प्रदूषण कम करने में मदद
एमसीडी के अधिकतर विकास कार्य सड़क निर्माण और रखरखाव से जुड़े होते हैं, जिनका सीधा संबंध धूल प्रदूषण में कमी से है। ऐसे कार्यों में समय बेहद अहम होता है और देरी से न सिर्फ लागत बढ़ती है, बल्कि पर्यावरण और जनता दोनों प्रभावित होते हैं।
वित्तीय अनुशासन भी रहेगा बरकरार
वित्तीय शक्तिया बढ़ी हैं, लेकिन साथ ही यह स्पष्ट किया कि हर स्तर पर वित्तीय अनुशासन और जवाबदेही बनी रहेगी। बड़े कार्यों में वित्त विभाग की सहमति अनिवार्य होगी और यह सुनिश्चित किया जाएगा कि अतिरिक्त या वैकल्पिक मदों के कारण परियोजना की कुल लागत अनियंत्रित रूप से न बढ़े।