फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Delhi ›   Delhi NCR News ›   demand of getting dismissed section 56 of Code of civil procedure

महिला की गिरफ्तारी पर रोक को मिली चुनौती, इस धारा को खारिज करने की हुई मांग

Tue, 09 Jan 2018 11:21 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Tue, 09 Jan 2018 11:21 AM IST
विज्ञापन
demand of getting dismissed section 56 of Code of civil procedure
arrest

बैंकों से ऋण लेने के बाद भुगतान नहीं करने पर महिला की गिरफ्तारी पर रोक के संबंध में प्रावधान को चुनौती देते हुए उच्च न्यायालय में याचिका दायर की गई है। याचिका पर सिविल प्रक्रिया संहिता की धारा 56 को खारिज करने की मांग की गई है।

विज्ञापन


याचिका में कहा गया है कि धन के भुगतान के लिए डिक्री जारी होने के बावजूद इस धारा में महिला को हिरासत में लेने से छूट है और यह सरासर भारतीय संविधान में समानता के सिद्धांतों का उल्लंघन है।
विज्ञापन


अदालत ने इस मुद्दे पर केंद्र सरकार, कानून और न्याय मंत्रालय व विधि आयोग को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश गीता मित्तल और न्यायमूर्ति सी.हरि शंकर की खंडपीठ ने सभी पक्षों को स्पष्ट करने का निर्देश दिया है कि क्यों न याचिका स्वीकार कर ली जाए।
विज्ञापन
विज्ञापन


अदालत ने मामले की सुनवाई 6 फरवरी तय की है। यह याचिका गैर बैंकिंग वित्त कंपनी में काम कर रहे अनिल कुमार ने दायर की है। उन्होंने कहा कि धारा-56 भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14 समानता, और 15 धर्म, जाति, जाति, जन्म स्थान व लिंग भेद के आधार पर भेदभाव करती है।

याचिका में यह बातें कही गईं

demand of getting dismissed section 56 of Code of civil procedure

याचिकाकर्ता के अधिवक्ता कमलेश कुमार ने खंडपीठ को बताया कि धारा 56 में असमान और अनुचित संरक्षण गलत तरीके से प्रदान किया गया है। उन्होंन कहा यद्यपि एक महिला गलत है और वह डिफॉल्टर होने के बावजूद वह इस प्रावधान का दुरुपयोग कर रही है।

याचिका में कहा गया है कि इतने सारे बैंक और गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनियां (एनबीएफसी) लोगों को सुविधाएं और व्यक्तिगत ऋण प्रदान करती हैं क्योंकि इन बैंकों और एनबीएफसी को भारत के संविधान के अनुच्छेद 19 (जी) के तहत संरक्षित किया गया है।

वहीं अब यह फैशन बन गया है कि लोग सिविल प्रक्रिया संहिता की धारा 56 का फायदा उठाकर जानबूझकर धोखाधड़ी करना और बैंक व एनबीएफसी को वाहनों, संपत्ति, व्यक्तिगत ऋण को लेकर नुकसान पहुंचाते है।

उन्होंने कहा महिलाएं निजी क्षमता में ऋण ले रही हैं और धन की वसूली के लिए बैंकों और एनबीएफसी को डिफाल्टरों के खिलाफ सिविल कार्यवाही करने में बहुत पैसा खर्च करना पड़ता है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed