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दिल्ली: दिवाली के लिए कारोबारी तैयार, उम्मीदों पर पानी न फेर दे प्रदर्शन; कहा- रोज हो रहा 100 करोड़ का नुकसान

Fri, 16 Oct 2026 06:31 AM IST
दुष्यंत शर्मा ज्योति सिंह, नई दिल्ली
ज्योति सिंह, नई दिल्ली Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Fri, 16 Oct 2026 06:31 AM IST
सार

कनॉट प्लेस से पालिका बाजार और जनपथ से बंगाली बाजार तक कई कारोबारियों के लिए इस बार त्योहार की चमक चिंता में बदल रही है। 

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Delhi: Traders gear up for Diwali, but fear protests might dash their hopes
कनॉट प्लेस में प्रदर्शनकारियों का जमावड़ा - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

दिवाली साल में एक बार आती है, लेकिन कारोबारियों को इसका इंतजार पूरे साल रहता है। कारोबारियों के लिए यही वे चंद दिन होते हैं, जिनकी कमाई से सालभर के खर्चों की उम्मीद बंधी होती है। त्योहार के इस सीजन में बाजारों में रौनक, दुकानों पर ग्राहकों की भीड़ और कारोबारियों के चेहरों पर सालभर की मेहनत का फल मिलने की खुशी होनी चाहिए थी। लेकिन कनॉट प्लेस से पालिका बाजार और जनपथ से बंगाली बाजार तक कई कारोबारियों के लिए इस बार त्योहार की चमक चिंता में बदल रही है। 

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प्रदर्शन और रास्तों पर बंदिशों के कारण ग्राहक बाजारों तक नहीं पहुंच पा रहे हैं। कारोबारियों का दावा है कि इससे रोजाना करीब 100 करोड़ रुपये का नुकसान हो रहा है। पिछले तीन दिनों में कारोबार को भारी नुकसान पहुंचा है। 
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दुकानों में लाखों रुपये का माल भरा है, सजावट हो चुकी है और कर्मचारियों के वेतन से लेकर किराये तक के खर्च सामने खड़े हैं। ऐसे में त्योहार के दौरान दुकान खोलना मजबूरी है और कमाई के लिए ग्राहकों का आना जरूरी। कारोबारियों को चिंता है कि कहीं दिवाली की तैयारियां कमाई के बजाय घाटे का हिसाब बनकर न रह जाएं।
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पिछले दिनों 90 प्रतिशत तक का हुआ नुकसान
दिवाली साल में एक बार आती है, लेकिन हमें इसका इंतजार पूरे साल रहता है। हमने त्योहार के लिए लाखों रुपये का माल मंगाया है। उम्मीद थी कि दिवाली की खरीदारी से कारोबार को रफ्तार मिलेगी और सालभर की कमाई में इजाफा होगा। लेकिन पिछले दिनों 90 प्रतिशत का नुकसान हुआ। उम्मीद है कि सरकार कोई कदम उठाए। हमारे कमाने का यही महीना होता है। सरकार हमारी परेशानी को समझे। सभी व्यपारी परेशान हैं।  
- विक्रम बधवार, महासचिव, नई दिल्ली ट्रेडर्स एसोसिएशन, कनॉट प्लेस

ग्राहक नहीं आ रहे लेकिन किराया तो देना ही है
ग्राहकों की आवाजाही पर इतना असर पड़ा है कि कोई ग्राहक नहीं आ रहा। अगर कोई समस्या है तो उसका समाधान होना चाहिए और व्यापारियों को राहत मिलनी चाहिए। हम एनडीएमसी के किरायेदार हैं। जुलाई में बाजार बंद रहा और पिछले तीन दिन भी कारोबार प्रभावित रहा। हमें किराया तो देना ही होगा। क्या सरकार हमारा किराया माफ करेगी? प्रदर्शन स्थल बदलने का फैसला सरकार को बहुत पहले ही ले लेना चाहिए था। इस बार दशहरे और दिवाली से कोई उम्मीद नहीं है।
-विनय ठाकुर, महासचिव, पालिका बाजार शॉपकीपर्स वेलफेयर एसोसिएशन

दिवाली सालभर की उम्मीद
तीन महीने से धरना-प्रदर्शनों के कारण कनॉट प्लेस और जनपथ मार्केट का कारोबार बुरी तरह प्रभावित हुआ है। दुकानदारों के लिए दुकान खोलना और खर्च निकालना मुश्किल हो गया था। उम्मीद है कि बाजारों में फिर से रौनक लौटेगी।
-विनोद शर्मा, अध्यक्ष, ओल्ड मिनी मार्केट एसोसिएशन, जनपथ

1950 से हैं दुकानें, आज व्यापार ठप होने की नौबत
हमारी दुकानें 1950 से हैं। यह दिल्ली का प्रमुख बाजार है। जब प्रदर्शन बोट क्लब में होते थे, तब कोई दिक्कत नहीं थी। लेकिन जब से जंतर-मंतर पर प्रदर्शन होने लगे हैं, नजदीक होने के कारण हमें परेशानी होती है। रास्ते बंद कर दिए जाते हैं। प्रदर्शनों के दौरान हुड़दंग होने पर लोग भी यहां से गुजरने से कतराते हैं। यह त्योहार का समय है और ऐसे में कारोबार प्रभावित होना बहुत गलत है। मैं सरकार के फैसले का स्वागत करता हूं।  हमारा कारोबार ठप हो रहा है। बाजार का कारोबार 90 प्रतिशत तक प्रभावित हुआ है। मैं इसे बदतमीजी कहता हूं।

- ध्रुव शंकर, उपाध्यक्ष, जनपथ भवन ट्रेडर्स एसोसिएशन

त्योहार को देखते हुए हमने सामान मंगाया है...
कनॉट प्लेस, पालिका बाजार, शंकर बाजार, बंगाली मार्केट और मोहन प्लेस में रोजाना करीब 100 करोड़ रुपये का नुकसान हो रहा है। त्योहार को देखते हुए हमने सामान मंगाया है, लेकिन व्यापारी परेशान हैं। यह हमारी आजीविका का सवाल है। प्रदर्शनकारियों को समझना चाहिए कि कनॉट प्लेस प्रदर्शन स्थल नहीं है। प्रदर्शन करें, लेकिन किसी निर्धारित जगह पर। हमें कर्मचारियों को वेतन देना है, आयकर चुकाना है और किराया भी देना है। सरकार और विपक्ष को मिलकर कोई रास्ता निकालना चाहिए। ऐसे प्रदर्शनों में व्यापारियों को होने वाले नुकसान की भरपाई कोई नहीं करता। जंतर-मंतर पर पर्याप्त जगह नहीं होने के कारण लोग सड़कों, बाजारों और रिहायशी इलाकों तक फैल रहे हैं। इससे सभी को परेशानी हो रही है।
-अतुल भार्गव, अध्यक्ष, नई दिल्ली ट्रेडर्स एसोसिएशन

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