आप से संभावित गठजोड़ पर कांग्रेस नेताओं की चिंता वाजिब, जल सत्याग्रह आंदोलन भी टांय-टांय फिस्स
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दिल्ली में कांग्रेस से आप के गठजोड़ को लेकर प्रदेश स्तर के नेताओं की नींद हराम हुई पड़ी है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय माकन कांग्रेस को दिल्ली में पुन: खड़ा करने के लिए दिन रात एक किए हुए हैं, लेकिन आप से गठजोड़ की खबरों ने उनको बैकफुट पर ला कर खड़ा कर दिया।
आप सरकार को घेरने के लिए चलाया जा रहा जल सत्याग्रह आंदोलन टांय-टांय फिस्स होकर रह गया है। वहीं कांग्रेसी नेता आम लोगों के बीच जाने से भी बचने लगे हैं। जो कुछ वोट बैंक आप को छोड़ वापस आया था, वे भी उलझन में है और इसको लेकर प्रदेश कांग्रेस नेताओं की चिंता वाजिब भी है।
कांग्रेस की पिछले कई वर्षों से दिल्ली में हालत किसी से छुपी नहीं है। कभी दिल्ली पर राज करने वाली कांग्रेस आज धरातल पर है। अजय माकन ने पिछले एक वर्ष से हर मुद्दे पर आप सरकार को घेरने में कोई कसर नहीं छोड़ी।
सीसीटीवी, बिजली-पानी, डीटीसी की खस्ता हालत के अलावा अन्य बुनियादी मुद्दों को लेकर वे सड़क पर आंदोलन करते रहे, ताकि कांग्रेस का खोया वोट बैंक किसी तरह वापस आ जाए। उधर कांग्रेस का लोकसभा सीटों में आप से गठजोड़ की संभावना की खबरों को लेकर उनकी चिंता बढ़ा दी है।
इस मुद्दे पर वे भले ही खंडन करते आ रहे हैं, लेकिन आलाकमान के किसी भी नेता द्वारा कोई टिप्पणी न करने से वे बैकफुट पर हैं। हालत यह है कि संवाददाता सम्मेलन में मुद्दा कोई भी हो, लेकिन कांग्रेस-आप गठजोड़ पर वे सफाई देते रह जाते हैं। कई मौकों पर तो वे बोखला तक गए। वर्तमान में कांग्रेस ने राजधानी में पानी की समस्या को लेकर जल आंदोलन चलाया हुआ है।
शुरू में तो आंदोलन ने तेजी पकड़ी, लेकिन जब से गठजोड़ की खबरें आई है आम लोगों ने जल सत्याग्रह आंदोलन से किनारा करना शुरू कर दिया। आम लोगों में संदेश जा रहा है कि दोनों पार्टियां मिली हुई हैं और आंदोलन से उनकी समस्याओं का कोई समाधान नहीं होगा। हालत यह है कि कांग्रेस नेताओं ने भी आंदोलन से दूरी बनानी शुरू कर दी है। इसका सीधा असर कांग्रेस के वोट बैंक पर भी पड़ रहा है।